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मध्य प्रदेश में कोरोना पॉजिटिव कांग्रेस विधायक PPE किट पहनकर वोट डालने पहुंचे

एक वोट के लिए इतना बड़ा रिस्क लिया गया?

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19 जून 2020 (अपडेटेड: 19 जून 2020, 10:02 AM IST)
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मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए वोटिंग हो रही है. कांग्रेस के विधायक जो कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे. पीपीई किट पहन कर वोटिंग के लिए पहुंचे. (फोटो-एएनआई)
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देशभर में राज्यसभा की 18 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं. इन 18 सीटों में से गुजरात और आंध्र प्रदेश में चार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में तीन, झारखंड में दो और मणिपुर और मेघालय में एक-एक सीट पर चुनाव हो रहे हैं. मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के विधायक जो कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए गए हैं, पीपीई किट पहनकर वोट डालने पहुंचे. सुबह से ही कांग्रेस और बीजेपी के विधायक राज्यसभा चुनाव के लिए वोट डाल रहे हैं. लेकिन दोपहर करीब एक बजे कांग्रेस के विधायक कुणाल चौधरी पीपीई किट पहन कर मतदान करने विधानसभा पहुंचे. विधायक कुछ दिन पहले कोरोना वायरस टेस्ट में पॉजिटिव आए थे. विधायक जब वोट डालकर वापस लौटे तो पूरे क्षेत्र को सेनिटाइज किया गया. वोटिंग डालने वाले इलाके और पूरे मेन गेट को सेनिटाइज किया गया, ताकि किसी और को वायरस का खतरा ना हो. अब सवाल उठता है कि इतना बड़ा रिस्क लेने की क्या ज़रूरत थी? मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटे हैं, लेकिन चार उम्मीदवार मैदान में हैं. एक सीट पर जीत हासिल करने के लिए 52 वोट चाहिए. बीजेपी के 107 विधायक हैं. दोनों उम्मीदवारों की जीत के लिए 104 विधायकों की जरूरत होगी. कांग्रेस के 92 विधायक हैं. एसपी, बीएसपी और निर्दलीय विधायकों ने बीजेपी का समर्थन किया है. इस हिसाब से देखा जाए तो दूसरी सीट पर कांग्रेस की जीत नामुमकिन ही है. इसके बावजूद एक वोट के लिए इतना बड़ा रिस्क लिया गया. इतनी तैयारियां की गईं. एक कोरोना पेशेंट विधानसभा में गए. उन्होंने पीपीई किट पहनी थी, उनके जाते ही पूरे इलाके को सैनिटाइज़ किया गया. लेकिन उनके हाथ गई वोट की पर्ची तो बैलट बॉक्स में बंद हो गई है. ऐसे में जो कर्मचारी वोट गिनने के लिए वो बॉक्स खोलेंगे, उन्हें वायरस इंफेक्शन का खतरा हो सकता है. क्या गाइडलाइंस हैं? गृहमंत्रालय की गाइडलाइन ये साफ कहती है कि कोरोना पॉज़िटिव व्यक्ति को आइसोलेशन में रहना होगा. आइसोलेशन यानी ऐसी जगह जहां उसका किसी और से संपर्क न हो. अगर उसमें बीमारी के हल्के लक्षण हैं  या कोई लक्षण नहीं हैं तो होम क्वारंटीन के लिए कहा जाता है. पूरे परिवार को भी क्वारंटीन किया जाता है. वहीं अगर लक्षण ज्यादा दिख रहे हैं या हालत गंभीर है तो मरीज़ को अस्पताल के कोरोना आइसोलेशन वॉर्ड में रखा जाता है. इसके अलावा कोरोना पॉज़िटिव शख्स के संपर्क में आए दूसरे लोगों को भी 14 दिन क्वारंटीन रहना जरूरी है. इन 14 दिनों में उसे किसी और के संपर्क में नहीं आना होता है. या फिर अगर वो शख्स परिवार के साथ रह रहा है तो पूरे परिवार क्वारंटीन होने की सलाह दी जाती है. चलते चलते जान लेते हैं कि एमपी में कौन-कौन से उम्मीदवार मैदान में हैं. बीजेपी– ज्योतिरादित्य सिंधिया- कांग्रेस के कद्दावर नेता थे. राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आए. सिंधिया के समर्थक विधायकों के इस्तीफे के बाद कांग्रेस की सरकार गिर गई थी. सुमेर सिंह सोलंकी -सुमेर सिंह अनुसूचित जनजाति से आते हैं. पूर्व खरगौन-बड़वानी भाजपा सांसद माकन सिंह सोलंकी के भतीजे हैं. बचपन से ही आरएसएस से जुड़े हुए हैं. राज्यसभा चुनाव के लिए प्रोफेसर के पद से इस्तीफा दिया है. कांग्रेस दिग्विजय सिंह- मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम. राज्यसभा सांसद. राहुल के करीबी. कद्दावर नेता. राज्यसभा सांसद हैं. फिर से चुनाव लड़ रहे हैं. फूल सिंह बरैया- फूल सिंह बरैया बहुजन समाज पार्टी का बड़ा चेहरा रहे. उसके बाद अपनी पार्टी बहुजन संघर्ष दल बना ली. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में शामिल हुए थे. फूल सिंह बरैया की ग्वालियर चंबल इलाके में अनुसूचित जाति वर्ग में अच्छी पैठ है. मध्य प्रदेश में प्रभात झा और सत्यनारायण जटिया राज्यसभा सांसद थे, लेकिन बीजेपी ने दोनों को ही फिर से टिकट नहीं दिया. उनकी जगह नए चेहरे ले आई. सिंधिया के बीजेपी में आने के बाद से ही उनका राज्यसभा टिकट कंफर्म था. लेकिन दूसरी सीट के लिए बीजेपी ने एक प्रोफेसर को चुना है.
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