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  • Madhubani : Love story of Prashant and Preeti which has created violence in Madhubani for more than a month and created a political ruckus for CM Nitish Kumar

एक लव स्टोरी, जिसमें बंद हुआ था बिहार और गिरफ्तार हुए थे लालू-पासवान

मधुबनी में कई दिनों तक आगजनी हुई थी.

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30 अक्तूबर 2018 (अपडेटेड: 30 अक्तूबर 2018, 09:24 AM IST)
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मधुबनी में प्रशांत (बाएं) और प्रीती की प्रेम कहानी ने इतना बड़ा रूप ले लिया कि पूरा शहर तीन दिनों तक आग में जलता रहा.
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BJ Bikas
बीजे बिकास. युवा पत्रकार हैं. बिहार की राजधानी पटना में रहकर पत्रकारिता करते हैं. दि लल्लनटॉप के चाहने वाले हैं और रहने वाले मधुबनी के हैं. उन्होंने मधुबनी की उस मशहूर प्रेम कहानी का किस्सा लिखा है, जिसकी वजह से कई दिनों तक पूरा शहर आग में जलता रहा था.

इश्क में भैले बवाल, हिलल मधुबनी जिल्ला,  इ लभ अइछ कि काल, जरल मधुबनी जिल्ला

ये एक गाने के बोल हैं. एक नाकाम इश्क की कहानी पर बने गाने के बोल, जिसने बिहार के एक जिले मधुबनी को हिलाकर रख दिया था. इन लाइनों का मतलब है- इश्क में इतना बवाल हुआ कि मधुबनी जिला हिल गया. ये प्यार था या काल था, जिसमें मधुबनी जिला जल गया.
इस नाकाम इश्क की कहानी का नायक था 17 साल का एक लड़का. नायिका थी उसी की हमउम्र एक लड़की और विलेन था पूरे बिहार का शासन-प्रशासन. इतना बड़ा विलेन कि तीन लोगों की हत्या हो गई, बिहार के 21 दुर्दांत कैदी फरार हो गए, जिनमें एक कैदी पाकिस्तान का भी था. सैकड़ों गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया था, पूरा शहर धू-धू कर जलता रहा और सियासी लोग अपनी रोटियां सेकते रहे. हम आज आपको उसी कहानी के बारे में बता रहे हैं, जो छह साल पहले बिहार में घटी थी और जो आज भी वहां के लोगों को जुबानी याद है.
जब किसान का बेटा और अधिकारी की बेटी प्यार कर बैठे
खबर फैली कि प्रशांत की हत्या हो गई है, जिसके बाद भीड़ ने आगजनी कर दी.
खबर फैली कि प्रशांत की हत्या हो गई है, जिसके बाद भीड़ ने आगजनी कर दी.

बिहार के मिथिला इलाके में एक जिला है मधुबनी. इसके बेनीपट्टी प्रखंड के अड़ेर गांव में एक किसान परिवार का लड़का था. नाम था प्रशांत झा. 17 साल की उम्र थी. इंडियन पब्लिक स्कूल में पढ़ाई करता था. पढ़ाई के दौरान ही उसे प्यार हो गया. लड़की का नाम प्रीति था. प्रीति के पिता मधुबनी जिले के डीपीओ थे. नाम था जगतपति चौधरी. अब लड़का किसान परिवार का और बेटी अधिकारी परिवार की. हैसियत में बड़ा अंतर. लेकिन प्यार था, तो वो हैसियत कहां देखता. नतीजा घरवालों ने विरोध किया तो दोनों घर छोड़कर भाग गए. वो तारीख थी 4 सितंबर 2012. लड़के प्रशांत के घरवाले थाने पहुंचे. कहा कि बेटे के अपहरण का केस दर्ज करो. पुलिसवाले नहीं माने, किसान बाप को डांटकर भगा दिया. मामला एसपी के पास पहुंचा, लेकिन नतीजा नहीं निकला. एक हफ्ते बाद 11 सितंबर को लड़की के घरवाले थाने पहुंचे. इसलिए कि लड़की के अपहरण का केस दर्ज करो. अब थाने पहुंचने वाले लड़की के पिता जगतपति चौधरी डीपीओ थे. तो केस भी दर्ज हो गया. और केस में नाम आया प्रशांत झा, उसके पिता राजीव झा, दादा चंदेश्वर झा और चचेरे भाई संतोष झा का. प्रशासन हरकत में आया और प्रशांत के बूढ़े दादा को हिरासत में ले लिया. पोते के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए बूढ़े दादा के साथ मारपीट भी हुई. लोगों को पता चला तो उन्होंने विरोध कर दिया और फिर दबाव में आकर पुलिस ने प्रशांत के दादा चंदेश्वर झा को छोड़ दिया.
पुलिस को मिली सिरकटी लाश और फिर शुरू हुआ लोगों का विरोध
पूरा मधुबनी शहर तीन दिनों तक आग में जलता रहा था.
पूरा मधुबनी शहर तीन दिनों तक आग में जलता रहा था.

3 अक्टूबर 2012. नगर थाना पुलिस को ककना पुल के पास एक सिरकटी लाश मिली. दो दिन बाद प्रशांत की मां विनीता देवी और दूसरे घरवालों ने कहा कि ये लाश प्रशांत की है और प्रीती के पिता जगतपति चौधरी ने प्रशांत की हत्या करवा दी है. प्रशांत की मां ने बेटे के पैर के निशान और कपड़े से लाश की शिनाख्त की थी. मां विनीता ने बताया था कि जो पैंट, शर्ट और मोजा पहनकर प्रशांत गायब हुआ था, वही कपड़े लाश के पास भी हैं. लेकिन जब इस लाश का पोस्टमॉर्टम हुआ तो पता चला कि लाश जिसकी है, उसकी उम्र प्रशांत की उम्र से कम से कम 10 साल ज्यादा है. इस रिपोर्ट के आधार पर पुलिस प्रशांत के घरवालों को वो लाश नहीं देती है. लेकिन लोगों के बीच संदेश ये जाता है कि डीपीओ जगतपति चौधरी के दबाव में पुलिस ने रिपोर्ट बदल दी है और इसीलिए पुलिस न तो लाश दे रही है और न ही जगतपति चौधरी को गिरफ्तार कर रही है. इसकी वजह से प्रशांत के घरवाले 11 अक्टूबर को मधुबनी के डीएम ऑफिस में आमरण अनशन पर बैठ जाते हैं. लेकिन उनसे मिलने के लिए न तो कोई पुलिस का अधिकारी जाता है और न ही शासन-प्रशासन की ओर से उन्हें कोई पूछने जाता है. उस दिन की शाम होते-होते पूरे क्षेत्र में ये खबर आम हो जाती है कि जगतपति चौधरी के दवाब में पुलिस प्रशांत के घरवालों की नहीं सुन रही है. इसके बाद 12 अक्टूबर की दोपहर होते-होते हजारों लोग प्रशांत के घरवालों के साथ आ गए और धरने पर बैठ गए.
लोगों पर हुआ लाठीचार्ज और हंगामे में भाग गए 21 कैदी, जिनमें पाकिस्तानी भी था
मधुबनी में हिंसा के दौरान कई कैदी फरार हो गए, जिनमें एक पाकिस्तानी कैदी भी था.
मधुबनी में हिंसा के दौरान कई कैदी फरार हो गए, जिनमें एक पाकिस्तानी कैदी भी था.

जब पुलिस और प्रशासन ने हजारों लोगों को प्रशांत के घरवालों के समर्थन में उतरे देखा तो पुलिस की ओर से लाठीचार्ज कर दिया गया. लोगों ने भी इसका विरोध किया. पुलिस की लाठी से प्रशांत की मां, दादी और दादा गंभीर रूप से घायल हो गए. जब इलाके में पुलिसिया बर्बरता की कहानी फैली तो लोग भी उग्र हो गए. आक्रोशित भीड़ टाउन थाने पहुंच गई और थाने को आग के हवाले कर दिया. जब मधुबनी जिले का माहौल बिगड़ने लगा, तो वहां जेल में बंद कई खूंखार कैदियों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाने लगा. लेकिन भीड़ ने कैदियों की गाड़ी पर भी हमला कर दिया. मौके का फायदा उठाकर 20 से ज्यादा कैदी भाग गए, जिनमें एक पाकिस्तानी कैदी भी शामिल था. जब बवाल ज्यादा बढ़ गया तो पुलिस ने फायरिंग कर दी. करीब 100 राउंड गोलियां चलीं, जिसमें तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 20 से ज्यादा लोगों को गोली लग गई और वो गंभीर रूप से घायल हो गए. जिले का माहौल और भी खराब हो गया और कई दूसरे थानों पर भी भीड़ ने हमला कर दिया. थानों को आग के हवाले कर दिया गया और कई सरकारी दफ्तरों में तोड़फोड़ और लूटपाट हुई. हालात इतने खराब हुए कि 12 अक्टूबर की शाम होते-होते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आदेश पर डीएम और एसपी के साथ ही डीआईजी रेंज का भी ट्रांसफर कर दिया गया. लेकिन हालात काबू में नहीं हुए. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मामले की मैजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दे दिए, लेकिन 13 सितंबर की शाम तक मधुबनी जलता ही रहा.
लालू और पासवान को देनी पड़ी गिरफ्तारी
मधुबनी में प्रशांत की हत्या के खिलाफ सड़क पर उतरे राम विलास पासवान और लालू यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था.
मधुबनी में प्रशांत की हत्या के खिलाफ सड़क पर उतरे राम विलास पासवान और लालू यादव को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था.

जब हंगामा नहीं थमा तो प्रशासन ने तय किया कि वो सिरकटी लाश प्रशांत के घरवालों को सौंप दी जाए. लाश घरवालों को सौंप दी गई. घरवालों ने दाह-संस्कार कर दिया. गांव के लोगों ने बाल मुंडवा लिए. लेकिन 15 अक्टूबर को इस मामले में वाम दलों ने बिहार बंद बुलाया था. इस बंद को विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल के साथ ही लोजपा ने भी समर्थन दिया. खुद लालू प्रसाद यादव और राम विलास पासवान नारेबाजी करते हुए सड़कों पर उतरे. पुलिस ने लालू और पासवान को गिरफ्तार कर लिया.
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस और पलट गया पूरा मामला
जब हंगामा चल ही रहा था, उस वक्त बिहार के डीजीपी रहे अभयानंद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि जिस प्रशांत की हत्या की बात हो रही है, वो जिंदा है.
जब हंगामा चल ही रहा था, उस वक्त बिहार के डीजीपी रहे अभयानंद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि जिस प्रशांत की हत्या की बात हो रही है, वो जिंदा है.

जब मधुबनी में सियासत अपने चरम पर थी, बिहार के तत्कालीन डीजीपी अभयानंद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जिस प्रशांत की हत्या पर इतना हंगामा हुआ है, वो जिंदा है. इतना ही नहीं लड़की प्रीती भी जिंदा है और दोनों एक साथ दिल्ली में हैं. डीजीपी अभयानंद के मुताबिक दिल्ली के महरौली में रहने वाले एमएन झा नाम के एक आदमी ने महरौली की ही एक दूकान पर प्रीती-प्रशांत को देखकर 100 नम्बर पर फोन कर पुलिस को इस बात की जानकारी दी. मौके पर पहुंची दिल्ली पुलिस ने दोनों से पूछताछ की थी. उन दोनों ने पुलिस को बताया कि घरवालों के विरोध को देखते हुए सात सितंबर को वो लोग मधुबनी से भागे थे. वहां से दोनों रांची, जम्मू और दार्जिलिंग गए थे. जब पैसे ख्तम होने लगे तो वो दिल्ली पहुंच गए और वहीं रहने लगे.
और इस तरह से खत्म हो गई एक प्रेम कहानी
कई दिनों की हिंसा और तीन लोगों की मौत के बाद इस प्रेम कहानी का नाकाम अंत हुआ
कई दिनों की हिंसा और तीन लोगों की मौत के बाद इस प्रेम कहानी का नाकाम अंत हुआ

जब पुलिस ने लोगों को बताया कि दोनों जिंदा हैं, तो फिर हंगामा शांत हो गया. पुलिस ने दोनों को उनके घरवालों को सौंप दिया. लड़की के घरवालों ने लड़की की शादी कहीं और कर दी. लड़के की अभी तक शादी नहीं हुई है और वो मधुबनी में ही ग्रैजुएशन कर रहा है. केस लड़के और उसके घरवालों पर दर्ज हुआ था, तो वो अब भी चल रहा है. हंगामा और आगजनी करने के आरोप में भी प्रशांत के गांव अड़ेर के लोग थाने-कचहरी के चक्कर लगाते रहते हैं. और इस प्रेम कहानी में जिन तीन लोगों की जान गई थी, वो अब भी इंसाफ की आस लगाए बैठे हैं.


 

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