बचपन में दूरदर्शन में एक गाना आता था. अब भी कभी-कभी आता है. मिले सुर मेरातुम्हारा. इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों के सिनेमा, संगीत और कला से जुड़ी बड़ी-बड़ीहस्तियां नज़र आती हैं. भीमसेन जोशी, लता मंगेशकर और भी बहुत सारे लोग. इन्हीं केबीच कर्नाटक के सिंगर एम. बाल मुरली कृष्णा की भी आवाज़ गूंजती थी. सफ़ेद कुर्ते-धोतीमें समन्दर किनारे टहलते हुए गाते हैं. आज उनका निधन हो गया है. बाल मुरली कृष्ण कोपद्म श्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था. फ्रांस की सरकार ने भी2005 में उन्हें Chavalier of the Orfre des Arts et des Letters सम्मान से नवाजाथा. आंध्र प्रदेश में बाल मुरलीकृष्ण पैदा हुए थे. कई सारे म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्सबजाने में उस्ताद थे. संगीत घराने से आते थे. पिताजी वायलिन, बांसुरी और वीणा मेंपारंगत थे. मां भी वीणा बजातीं थीं. ऐसे में संगीत उन्हें विरासत में मिलना लाजिमीथा. उन्होंने कर्नाटक संगीत की शिक्षा ली. छह साल की उम्र से गाना शुरू कर दिया था.आठ साल की उम्र में उन्होंने पहला स्टेज परफॉरमेंस दिया. उन्होंने 25,000 से भीज्यादा कॉन्सर्ट किए. पंडित भीमसेन जोशी, पंडित हरिप्रसाद प्रसाद चौरसिया जैसेउस्तादों के साथ जुगलबंदी की. श्री भाद्रचालु रामदासु और श्री अन्नमाचार्य कीकम्पोजीशंस को उन्होंने अमर बना दिया. उन्होंने फिल्मों में भी संगीत दिया. तेलुगु,संस्कृत, कन्नड़ और तमिल भाषा में 400 से भी ज्यादा कम्पोजीशन उनके नाम हैं.उन्होंने कर्नाटक संगीत में बहुत से नए प्रयोग किए. राग गणपति, सर्वश्री, महती,लवंगी का क्रेडिट उन्हें ही जाता है. विदा बाल मुरलीकृष्ण साहब. मिले सुर मेरातुम्हारा. https://www.youtube.com/watch?v=-jf6pwtPqCs उनके कुछ कर्नाटक क्लासिक-https://www.youtube.com/watch?v=W6TeyBzP4KU-------------------------------------------------------------------------------- ये स्टोरी निशान्त ने की है.--------------------------------------------------------------------------------