गुरुग्राम में कम पानी वाले पूल में कुदा दिए बच्चे, गर्दन टूट गई
सड़क पर पानी है. स्वीमिंग पूल में नहीं. तो क्यों करा रहे तैराकी कंपटीशन?
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सागर राना की गर्दन और रीढ़ की हड्डी में चोटें आई हैं
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गुरुग्राम में गोताखोरी कंपटीशन कराने वाले जिला स्कूल की महिमा अपरंपार हो रखी है. स्वीमिंग पूल में चिरैया के मूत भर पानी भरकर कंपटीशन करा रहे थे. पार्टिसिपेट करने वाले बेचारे तीन लड़कों को सीरियस चोटें आ गईं. एक की तो गर्दन इतनी चोटहिल हो गई कि शायद कोमा में चला जाए.
गुरुग्राम स्वीमिंग एसोसिएशन ने ऑर्गनाइज की थी ये प्रतियोगिता. संदीप टोकस इसका प्रेसिडेंट है. जास्मिन सिंह ने अंडर 17 कैटेगरी में भाग लिया था. बताया, "जहां से कूदा जाता है, वहां पानी सिर्फ 3 फिट था. जिसने छलांग लगाई, चोट खाई. किसी की गर्दन, किसी का सिर, किसी की रीढ़. बुरी तरह से चोटहिल हो गए."
सागर राणा नाम के लड़के के सिर और रीढ़ में इतनी चोट आई कि उसको दौड़कर एम्स ट्रॉमा सेंटर, दिल्ली में भर्ती कराना पड़ा. संदीप बाबू बता रहे हैं, "सिर्फ एक को गंभीर चोट लगी है. बाकी को हल्की खरोंच आई है. और उनको थोड़े इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया." ऐसे कह रहे हैं जैसे 'पूरा घर जल गया तो कोई बात नहीं, चूल्हा तो बच गया.'
परसराम जिला खेल अफसर हैं. वो बोले कि उनको पता ही नहीं था इस कंपटीशन के बारे में. बड़े गुस्साए हैं. जांच कराने का भरोसा दिलाए हैं. और ऑर्गनाइजर्स का लाइसेंस भी जब्त हो सकता है.
ये तो हाल है हमारे देश में खेल का. स्कूल लेवल से खेलने की राह में सौ रोड़े पैदा कर देते हैं. फिर सिर पीटते हैं कि मेडल नहीं लाए. स्कूल में खेल-कूद की क्लास होती है. उसको कितना सीरियसली लिया जाता है. कभी-कभी तो उस क्लास में भी रट्टू तोता मार्का सब्जेक्ट पढ़ाना शुरू हो जाता है.और ऐसे कुदाकर सोचते हैं कि बच्चे बड़े होकर ओलंपिक में मेडल लाएंगे.
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