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अरे यार! शौचालय बनवाने को पैसा नहीं मिला, तो लोग लोटा लेकर ये कहां चल दिए?

'सोच' कहीं भी आ सकती है.

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17 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 17 जनवरी 2020, 10:18 AM IST)
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लोगों ने घूस मांगे जाने का आरोप भी लगाया. फोटो- दैनिक भास्कर.
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स्वच्छ भारत अभियान. ODF यानी खुले में शौच से मुक्ति. भारत को ODF बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार अलग-अलग योजनाएं चला रही हैं. इन्हीं में से एक है बिहार का लोहिया स्वच्छा अभियान. इसके तहत शौचालय निर्माण करवाने पर लोगों को प्रोत्साहन राशि दी जाती है. लेकिन मुजफ्फरपुर जिले के औरई ब्लॉक में लोग महीनों से प्रोत्साहन राशि का इंतज़ार कर रहे हैं. बार-बार आवेदन देने के बाद भी पैसे नहीं मिले तो गांववालों ने प्रोटेस्ट का अनोखा तरीका अपनाया. 15 जनवरी को 200 से ज्यादा महिला, पुरुष और बच्चे औरई ब्लॉक ऑफिस पहुंचे. लोटा लेकर. और दफ्तर के बाहर बैठ गए. इस अनोखे प्रोटेस्ट को जन संघर्ष मोर्चा (JSM) के अखिलेश यादव लीड कर रहे हैं. अखिलेश ने बताया कि उन्होंने पहले ही ऐलान कर दिया था कि अगर 10 जनवरी से पहले भुगतान नहीं होता है, तो वे मकर संक्रांति के दिन ब्लॉक ऑफिस के बाहर प्रोटेस्ट करेंगे. अखिलेश के अनुसार,
हमने मकर संक्रांति का दिन इसलिए चुना क्योंकि यह दिन स्वच्छता का प्रतीक है. दरअसल शौचालय बनवाने के लिए 12000 रुपये प्रति शौचालय के हिसाब से हर लाभार्थी को मिलने थे. हमने कई बार ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर, सर्कल ऑफिसर और सब-डिवीजन के इंचार्ज से मिलने की कोशिश की. मिले भी मगर इसका कोई असर नहीं पड़ा. और इसलिए हमने तय किया हमसब सामूहिक रूप से लोटा मार्च निकालेंगे. ताकि संबधित अधिकारियों का ध्यान इस पर जाए.
औराई के BDO विनोद कुमार प्रसाद का कहना है कि पेमेंट की प्रक्रिया जारी है. विनोद कुमार के अनुसार,
कुछ तकनीकी खामियों के चलते पेमेंट में देरी हुई है. इन कमियों पर काम किया जा रहा है और फरवरी अंत तक पैसों का भुगतान कर दिया जायेगा.

यह पहली बार नहीं के मुजफ्फरपुर के लोगों ने लोटा आंदोलन किया है. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार मुजफ्फरपुर के जिला कारागार में 1856 में लोटा आंदोलन हुआ था. तब जेल में बंद कैदियों के लिए पीतल के लोटों को हटाकर मिट्टी के लोटे ला दिये गए थे. उसी के खिलाफ बंदियों ने जेल प्रशासन के खिलाफ विद्रोह कर दिया. कहा जाता है कि 1857 के विद्रोह को यहीं से बल मिला था.


ये खबर हमारे साथ इंटर्नशिप कर रहे शाश्वत ने लिखी है.


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