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अपना ट्रांसफर रोकने वाले जज साहब अब मांग रहे हैं माफी

कह रहे हैं, मेंटल बैलेंस बिगड़ गया था

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24 फ़रवरी 2016 (अपडेटेड: 24 फ़रवरी 2016, 10:12 AM IST)
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जस्टिस कर्णन भी मजेदार आदमी हैं. कुछ दिनों पहले इन्होंने खुद ही अपना ट्रान्सफर आर्डर रोक लिया था. और अब कह रहे हैं कि अपना ट्रान्सफर रोकने का ऑर्डर उन्होंने फ्रस्ट्रेशन और मेंटल बैलेंस खोने की वजह से दिया था. ऐसा उन्होंने चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर और सुप्रीम कोर्ट के के जजों जेएस खेहर और आर बनुमती को लिखे एक खत में लिखा. जस्टिस कर्णन अब कह रहे हैं, "15 फरवरी को मैंने अपनी मेंटल फ्रस्ट्रेशन की वजह से एक गलत ऑर्डर दे दिया था. क्योंकि मैं कई चीजों को लेकर डिस्टर्ब चल रहा था." अपने खत में कर्णन ने लिखा, "मेरी कोशिश यही है कि सबसे साथ प्रेम से रहूं." कर्णन कहते हैं कि उनके साथ जाति भेद किया जाता है. "मीडिया ने मुझे कई बार उकसा कर उन लोगों का नाम पूछने की कोशिश की है कि जो मेरी जाति के आद्धर पर मेरे साथ भेदभाव करते हैं. पर मैं कभी इस बारे में बात नहीं करता क्योंकि ये ज्यूडीशियरी के मान का सवाल है." बता दें कि जस्टिस कर्णन को सुप्रीम कोर्ट से ट्रान्सफर ऑर्डर मिला था कि उन्हें मद्रास हाई कोर्ट से कोलकाता हाई कोर्ट भेजा जाए. 15 फरवरी को उन्होंने खुद ही ऑर्डर स्टे कर लिया था. तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि तबादले के ऑर्डर के बाद जस्टिस कर्णन का दिया हुआ कोई भी ऑर्डर मान्य नहीं होगा. ये भी पढ़ें: जज साहब ने खुद की कोर्ट में रोक लिया खुद का ट्रांसफर

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