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प्लेन से ईंधन गिरने की वजह से 30 लोग चोटिल हो गए!

बच्चों को लगा कि पानी की बूंदें गिर रही हैं.

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15 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 15 जनवरी 2020, 10:28 AM IST)
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प्लेन के फ्यूड डंप करने की प्रतीकात्मक तस्वीर और प्लेन से गिरे फ्यूल के बाद बच्चों को बाहर निकालते हुए लोग. (फोटो-AP)
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14 जनवरी, मंगलवार को एक प्लेन अमेरिका के लॉस एंजेलिस एयरपोर्ट से चीन के शंघाई जा रहा था. इसी दौरान प्लेन के इंजन में कुछ गड़बड़ी हुई, तो इमरजेंसी लैंडिंग के लिए कहा गया. प्लेन ने लैंडिंग के लिए फ्यूल कम किया, लेकिन उस वक्त ऊंचाई कम होने के कारण फ्यूल कुछ स्कूलों पर गिरा गया. इस वजह से कुछ लोग घायल हो गए.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लॉस एंजेलिस के फायर डिपार्टमेंट के अधिकारी ने बताया कि जेट फ्यूल गिरने के कारण 20 बच्चों और 11 लोगों को मालूमी चोट आई है. हालांकि बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया था, जहां से कुछ को फर्स्ट एड के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया. अधिकारियों के मुताबिक, स्कूल एयरपोर्ट से करीब 31 किलोमीटर दूर है. खैर.

#बच्चों ने क्या कहा?

एक स्टूडेंट के मुताबिक, जब फ्यूल गिरा, तो उसे लगा कि पानी की बूंदें हैं. पर जब उसने ऊपर देखा, तो पता चला कि वो पेट्रोल जैसी कोई चीज थी. हालांकि रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेट्रोल का इस्तेमाल प्लेन में नहीं किया जाता है. वो एयर ट्रैफिक फ्यूल था.

डेल्टा एयरलाइन्स ने कहा कि चीन के शंघाई जा रहे विमान-89 से जेट फ्यूल का रिसाव हुआ था, लेकिन टेक्निकल फॉल्ट की वजह से उसे वापस जाना पड़ा. प्लेन को लैंड करवाना था, तो फ्यूल भी कम करना था. फ्यूल कम भी किया गया, पर गलत जगह पर.

#फ्यूल डंप के नियम

डेल्टा एयरलाइंस ने बताया कि इमरजेंसी लैंडिंग के लिए प्लेन का वजन कम होना चाहिए. साथ ही इस दौरान जेट से ईंधन भी गिराया जाता है. नियम के मुताबिक, किसी भी प्लेन की इमरजेंसी लैंडिंग के वक्त आबादी वाले इलाके के ऊपर जेट फ्यूल डंप करने की परमिशन नहीं होती है. साथ ही अमेरिका में फ्यूल डंप करने को लेकर कड़े कानून हैं.

# गैर-आबादी वाले इलाके में ही फ्यूल डंप करना होता है. पानी के ऊपर फ्यूल डंप हो, तो बेहतर है.

# डंप के समय उंचाई भी 10 हजार फीट से ज्यादा होनी चाहिए

डेल्टा एयरलाइन्स के मुताबिक,  पायलट के पास ये ऑप्शन नहीं थे. थोड़ी देर पहले ही टेकऑफ किया था, इसलिए ऊंचाई भी ज्यादा नहीं रही होगी. क्योंकि अगर वो 5 हजार फुट के ऊपर से भी फ्यूल डंप करता, तो वो नीचे आते-आते भाप बनकर उड़ जाता. मतलब विमान की ऊंचाई 5 हजार फुट से कम थी, इसलिए ये हादसा हुआ. हालांकि इसकी जांच हो रही है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक,  उस समय प्लेन में 288 यात्री सवार थे. हालांकि विमान की सेफ लैंडिंग हो गई.


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