पहले खबर पढ़ लो. अमेरिका का लॉस एंजेल्स हॉलीवुड सिटी है. वहां अंग्रेजी के कैपिटललेटर्स में बड़ा बड़ा HOLLYWOOD लिखा बोर्ड लगा है. कई किलोमीटर दूर से दिखता है.संडे की रात पहली जनवरी. न्यू इयर का जश्न आसमान में. रात में 3 बजे डेढ़ घंटे लगकरएक काले लिबास वाले आदमी ने Wood के O बदलकर E कर दिए. ये हो गया हॉलीवीड. मतलबगांजा एनर्जी. गंजेड़ियों का एडवेंचर सुबह पता चला जब लोगों ने देखा कि गुरू खेलाहो गया. वहां के लोकल मीडिया से ये खबर पता चली. सीसीटीवी फुटेज में काले कपड़ोंमें वो गंजेड़ी दिखा. ये पहली बार नहीं है. कि सिक्योरिटी को धुप्पल देकरएडवेंचरबाजों ने नाम के साथ कांड किया हो. डैनी फाइनगुड नाम के आदमी ने पहली जनवरीसन 1976 को भी ऐसा किया था. गांजे के ऊपर लदे नियम कानून बदलने की डिमांड के साथ.लेकिन वो ठहरे अमेरिकी. पाश्चात्य सभ्यता वाला देश. उनको बड़ा गुमान है कि वो 200साल पुरानी डेमोक्रेसी हैं. लेकिन ढक्कन पैदा करने में उस देश का कोई मुकाबला नहीं.ये मानते हैं कि हॉलीवुड बदलना डेयरिंग वाला काम था. लेकिन ऐसे काम तो यहां रोजहोते हैं यार. पड़ोसी के घर की बेल बजाकर भागने वाले बच्चे की जिंदगी के साथ भी यहीरिस्क होता है. लिखने पढ़ने की बात है तो यहां के किसी भी मंदिर पर चले जाओ. अंदरइतनी लिखापढ़ी मिलेगी कि लगेगा मंदिर नहीं, क्लर्क का दफ्तर है. ट्रेन के टॉयलेट सेहर दरोदीवार तमाम सूक्तियों से भरी मिलती है. यही हाल पार्क के पेड़ों का होता है.किसी का प्रेम तब तक सर्टिफाइड नहीं होता जब तक उनके सिग्नेचर किसी अच्छे पेड़ केतने पर न हों. कार के धूल चढ़े शीशों पर कलाकारी करने वाले कम डेयरिंग बाज नहींहोते.अपनी कार को कबाड़ बताना भी अमेरिकियों के बस का नहीं है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: डिजिटल इंडिया की इससे बेहतर तस्वीर न देखी होगी, देखते ही शेयर करें