'जब राम भक्तों के ही हाथों राम जी पीटे गए'
1.49 मिनट का ये वीडियो सबको देखना चाहिए.
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फोटो - thelallantop
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श्री राम अदालत में. ये कविता का शीर्षक है. ये कविता गौरव त्रिपाठी ने लिखी है. यूट्यूब पर इसका वीडियो 21 जून को अपलोड किया गया था. लोग इसकी जमकर तारीफ कर रहे हैं. काम है ही तारीफ के काबिल. जहां हिंदू मुसलमान करके सिर फुटौव्वल का खेल खेला जा रहा है वहां इन्हीं लोगों से उम्मीद बची है. भीड़ से अलग चलने वाले लोग. क्रिएटिव लोग. माफी चाहेंगे, इस पर नजर थोड़ी देर में गई. जितना ज्यादा ये कविता फैलनी चाहिए उतना नहीं फैली. लेकिन देर, कभी नहीं से बेहतर होती है.
पिछले साल एक मामला सामने आया था जिसमें एक आदमी ने कोर्ट में राम और लक्ष्मण के खिलाफ केस कर दिया था. जज साहब बड़े परेशान कि क्या करें. उन्होंने अर्जी खारिज कर दी. स्वीकार भी करते तो सम्मन कहां भेजते. उसी तरह का एक काल्पनिक केस इस कविता में बनाया गया है. पश्चिम बंगाल में दंगा भड़का हुआ है. अयोध्या में मंदिर बनने के लिए तीन ट्रक पत्थर फिर पहुंच गए हैं. माने पूरा माहौल बना हुआ है. ऐसे में ये कविता देखना सुनना ज्यादा जरूरी हो जाती है.
मेरे मंदिर के लिए जब तुम थे रथ पर चढ़ रहे देश के एक कोने में थे कश्मीरी पंडित मर रहे.
फिर मेरी ही सौगंध खाकर काम ऐसा कर गए, मेरे लिए दंगे हुए मेरे ही बच्चे मर गए.
खैर अब भी है समय तुम भूल अपनी पाट दो, जन्मभूमि पर घर बनाओ और बेघरों में बांट दो.
ऐसा करना हूं मैं कहता परम-पूज्य का काज है, न्याय-अहिंसा यही तो राम राज्य है.
तब बीच में बोला किसी ने जब वह उकता गया, कि रामचंद्र का भेष बनाकर यह कौन मुसलमान आ गया.
ऐसा कहना था कि भैया ऐसा हल्ला मच गया, जो ऐन टाइम पर कट लिया बस वो ही था जो बच लिया.
फिर राम भक्तों के ही हाथों राम जी पीटे गए, जो बहा था खून उसके दूर तक छींटे गए.
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