...तो माफ नहीं किया गया है माल्या का कर्ज?
माल्या की कर्ज माफी के मसले पर खुद अरुण जेटली ने सफाई दी है.

SBI ने अपने 7016 करोड़ रुपए के NPA (नॉन परफॉर्मिंग असेट्स) को राइट ऑफ कर दिया है. ये वो पैसा है, जो बड़ी-बड़ी कंपनियों को कर्ज के तौर पर दिया गया था और इसमें किंगफिशर एयरलाइंस के नाम पर विजय माल्या को दिया हुआ 1201 करोड़ रुपए का लोन भी शामिल है. राइट ऑफ का मतलब है कि SBI ने ये मान लिया कि अब इस लोन की रिकवरी नहीं हो पाएगी. बुधवार को पूरे दिन मार्केट में यही खबर घूमती रही कि SBI ने माल्या का कर्ज माफ कर दिया है, लेकिन वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि माल्या का कर्ज माफ नहीं किया गया है. जेटली के मुताबिक राइट ऑफ का मतलब है कि इसे NPA में बदल दिया गया है.
जहां तक विजय माल्या की बात है, तो 2 मार्च से भारत छोड़कर लंदन में रह रहे माल्या SBI के नेतृत्व वाले 17 बैंकों के कंसोर्टियम के 9 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के डिफॉल्टर हैं.
राज्यसभा में सीताराम येचुरी के माल्या का कर्ज माफ करने का मुद्दा उठाने के बाद जेटली ने कहा था, 'माल्या का कर्ज माफ नहीं किया गया है, बल्कि राइट ऑफ किया गया है. राइट ऑफ का मतलब माफ करना नहीं बल्कि नॉन परफॉर्मिंग असेट्स करार देना होता है. हमारे बैंक बैड लोन्स की दिशा में कोई नया कदम उठाने नहीं जा रहे हैं. वैसे मौजूदा सरकार को बैड लोन्स की समस्या पिछली सरकार से विरासत में मिली है.'
अरुण जेटली और SBI के सफाई देने से पहले DNA की एक रिपोर्ट आई थी, जिसमें ये कहा गया था कि SBI ने 63 खातों पर लिए गए कर्ज को राइट ऑफ कर दिया है, 31 खातों से लिए गए कर्ज को आंशिक रूप से माफ कर दिया है और 6 खातों को NPA कैटिगरी में डाल दिया है. जो अमाउंट AUCA में डाली गई है, उसमें किंगफिशर एयरलाइंस का 1201 करोड़ रुपए का कर्ज भी शामिल है और ये कंपनी जानबूझकर कर्ज न चुकाने वाली लिस्ट में टॉप पर है. इस लिस्ट में केएस ऑयल (596 करोड़ रु.), सूर्या फार्मास्यूटिकल्स (526 करोड़ रु.), जीईटी पॉवर (400 करोड़ रु.) और साई इन्फो सिस्टम (376 करोड़ रु.) टॉप पर हैं.
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