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LGBTQ 8: LGBT फैशन शो से महोत्सव की 'मर्यादा' तार-तार हुई?

'प्राइड रेनबो' में दुनिया भर के समलैंगिक और ट्रांसजेंडर लोगों ने खुल कर अपनी पहचान की नुमाइश की.

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25 फ़रवरी 2016 (अपडेटेड: 25 अप्रैल 2017, 10:44 AM IST)
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आगरा का सदर बाजार, मानो दिल्ली का कनॉट प्लेस. शाम का समय है. शहर में हजारों लोग सड़कों पर घूम रहे हैं. ताज महोत्सव का टाइम है. बाजार के ओपन एयर स्टेज पर कुछ चल रहा है. पर लोग अपनी धुन में मस्त हैं. चाट-पकौड़ी खा रहे हैं. तभी स्टेज पर अनाउंस होता है कि एक फैशन शो होने वाला है जिसमें उतरेंगे गे, लेस्बियन, ट्रांसजेंडर और क्वियर. वो लोग जिन्हें आप कभी सेक्स के मरीज, कभी छक्का और कभी हिजड़ा बोल के कट लेते हैं. क्या, हिजड़े रैंप वॉक करेंगे? और कौतूहल से लोग स्टेज की तरफ बढ़ते हैं. थोड़ी ही देर में सैकड़ों लोग स्टेज को घेर कर खड़े हो जाते हैं. सब कुछ शांत हो जाता है. right to love फिर अचानक हाई पिच पर म्यूजिक बजता है और स्टेज पर उतरते हैं सतरंगी लिबास में LGBTQ समुदाय के लोग. चाल में आत्मविश्वास और हाथों में पोस्टर. अपने अधिकारों की मांग करते हुए. आगरे वालों ने फटी आंखो से देखा इन्हें. और लोकल अखबार ने अगले दिन छापा: 'ताज महोत्सव की मर्यादा हुई तार तार'. 12782212_960972797311988_1503780976_n अखबार वाले सन्न थे. ये देखकर कि कैसे इन्हें दुनिया की फ़िक्र नहीं. कैसे ये कह रहे हैं कि हमारे बेडरूम में मत झांकिए. उन्हें ये भी समस्या थी कि समलैंगिकों को नायकों की तरह पेश किया जा रहा था. 'प्राइड रेनबो' नाम के इस फैशन शो में दुनिया भर के समलैंगिक और ट्रांसजेंडर लोगों ने खुल के अपनी पहचान की नुमाइश की. प्रेम की मिसाल ताज के नाम पर होने वाले इस महोत्सव में प्रेम को नए मायने मिले, जब समलैंगिक शादी करने वाले बलवीर और माइकल, जो अब अमेरिका में सेटल हैं, स्टेज पर साथ उतरे. LGBT-1
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"रैंप पर वॉक करना कोई गलत बता नहीं है. मंच पर सिर्फ साधारण फैशन शो हुआ है. क्या LGBTQ समुदाय को इतना भी अधिकार नहीं है? हमें भी दुनिय अमें रहने और जीने का हक़ है. हमें कोई बुरी नजर से न देखे, इस फैशन शो के जरिए हम यही संदेश देना चाहते हैं." - अतुल कुमार, आयोजक और गे एक्टिविस्ट

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फैशन शो के जरिए हम आगरा जैसे शहर में अपनी बात रख पाए हैं. लोग LGBT को सिर्फ किन्नर के तौर पर देखते हैं. और समाज के लिए गलत तत्व मानते हैं. मेरा मानना है कि ऐसे शो और होने चाहिए जिससे समाज L G B और T को समझ सके. हम अपनी लड़ाई तब तक जरी रखेंगे जब तक हमें समाज में सम्मान नहीं मिल जाता." -स्नेहा, ट्रांसजेंडर

 

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