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एक परेशान तेंदुए को पगलाई भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला

ये तस्वीरें विचलित करने वाली हैं.

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फोटो - thelallantop
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प्रतीक्षा पीपी
25 नवंबर 2016 (Updated: 25 नवंबर 2016, 11:47 AM IST)
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गुरुग्राम के एक गांव में एक तेंदुआ देखा गया. उसके दिखने की देर थी कि लोगों ने उसे घेर लिया. डंडे से पीट-पीटकर उसे मार डाला. और मार डालने के बाद उसके मरे हुए शरीर के साथ जुलूस निकाला. जैसे ये कोई विक्ट्री परेड हो. इस समय वाइल्डलाइफ डिपार्टमेंट के लोगों को भीड़ ने किनारे कर दिया. ये सोहना तहसील के मंडावर गांव में हुआ. तेंदुआ तीन साल का था. बेचारा भटकते हुए लोगों के बीच आ गया. तीन घंटे से तेंदुआ गांव से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था. तेंदुए को सुबह 8 बजे एक छोटे से फार्महाउस में देखा गया था. देखते ही वाइल्डलाइफ डिपार्टमेंट को सूचना दी गई थी. लेकिन जब तक वो लोग आते, तेंदुए ने 12 लोगों को घायल कर दिया था. इसी वजह से लोग बौखला गए. और धीरे-धीरे बात को इतना फैला दिया गया कि उसको मारने के लिए 800 लोग जमा हो गए थे. कुछ लड़कों ने तेंदुए को घेरा और उस पर डंडों और कुल्हाड़ियों से हमला कर दिया. leopard 2 तेंदुआ लगभग डेढ़ घंटे तक चारे की गाड़ी में फंसे रहने से बेहाल हो गया था. बड़ी मुश्किल से बाहर आया, फिर उसने गार्ड पर हमला किया. इसके बाद वो एक टॉयलेट में छिप गया. लोगों ने उसे टॉयलेट से बाहर निकाला और पीटना शुरू कर दिया. पुलिस बेहोश करने वाली बन्दूक के साथ आई थी. पर लोगों का गुस्सा इतना ज्यादा था कि पुलिस कुछ भी नहीं कर पाई. leopard 3 पुलिस ने आकर गांव वालों को शांत कराने की कोशिश की. पर लोगों के सर पर खून सवार था. क्योंकि उन्हें डर था कि तेंदुआ और लोगों को मार सकता है. तेंदुए को कई चोटें आईं और वो मौके पे मर गया. एक अफसर का कहना है कि पुलिस की संख्या बहुत कम थी. फिलहाल कई अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR की गई है. लेकिन एक बेजुबान जानवर मर गया है. जिन लोगों का ये मानना था कि तेंदुआ उनकी जान को नुकसान पहुंचा सकता है, उन्हें मालूम होना चाहिए कि जानवर तभी हमला करते हैं जब उन्हें खुद अपनी जान का खतरा महसूस होता है. राष्ट्रीय पार्कों और वाइल्डलाइफ सैंक्चुरीज का जाने ये कैसा मैनेजमेंट है कि आए दिन जानवर गायब हो जाते हैं. और पास के गांवों में चले जाते हैं. leopard 4 ये मसला सिर्फ एक तेंदुए का नहीं, किसी घर में कोई चोर भी पकड़ा जाता है तो लोग दिन भर का गुस्सा उस पर निकाल देते हैं. अगर भीड़ ही न्याय करने में सक्षम होती, तो हमने इतने कोर्ट-कचहरी क्यों बना रखे हैं?

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