The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • legitimacy of Shinde government in question

राज्यपाल को बिना बताए महाराष्ट्र में शिंदे की सरकार बन गई थी? पूरा मामला जानिए

एक RTI से बड़ा खुलासा हुआ है

Advertisement
pic
27 जनवरी 2023 (अपडेटेड: 27 जनवरी 2023, 07:56 PM IST)
Left to Right: CM Eknath Shinde, Governor Bhagat Singh Koshyari and Deputy CM Devendra Fadnavis during the oath taking ceremony
बाएं से दाएं: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस शपथ ग्रहण समारोह में (फोटो: इंडिया टुडे)
Quick AI Highlights
Click here to view more

महाराष्ट्र में पिछले साल ड्रैमैटिक तरीक़े से हुए सत्ता परिवर्तन का आधार क्या था? इस बात पर विवाद उठ खड़ा हुआ है और सत्ता परिवर्तन की पूरी प्रक्रिया को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया गया है. आपको याद होगा कि पिछले साल कई दिनों तक मुंबई से गुवाहाटी तक फैली राजनीतिक हलचल के बाद उद्धव ठाकरे की सरकार चली गई थी. 30 जून 2022 को एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. लेकिन सवाल ये है कि क्या राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने शिंदे को वो ज़रूरी चिट्ठी दी थी, जिसके बिना सरकार बनना संभव नहीं होता?

RTI ने खड़े किए सवाल

ये सवाल तब पैदा हुआ, जब एक RTI एक्टिविस्ट ने सत्ता परिवर्तन संबंधी काग़ज़ात मांग लिए. इसके बाद ही पूरा विवाद शुरु हुआ. दरअसल, महाराष्ट्र में शिवसेना, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस की महाअघाड़ी सरकार थी. महाअघाड़ी सरकार में शहरी विकास मंत्री थे एकनाथ शिंदे. महाअघाड़ी सरकार का अभी आधा कार्यकाल ही पूरा हुआ था कि शिंदे ने शिवसेना में बगावत कर दी. शिवसेना के 39 विधायकों को लेकर शिंदे पहले गुवाहटी पहुंचे और फिर गोवा. 

इधर उद्धव ने बागी विधायकों को मनाने की कोशिश की लेकिन बागी विधायक बीजेपी के साथ सरकार बनाना चाहते थे. बात नहीं बनी और फ्लोर टेस्ट से ठीक एक दिन पहले 29 जून की रात उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. अगले दिन, यानी 30 जून को एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मिले और सरकार बनाने का दावा पेश किया.

सरकार बनाने के न्योते का कोई रिकॉर्ड नहीं

अब इस खबर में नया क्या है? नई बात है एक RTI. यानी सूचना के अधिकार से मिली वो जानकारी, जिसने महाराष्ट्र में शिंदे सरकार बनने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं. दरअसल RTI कार्यकर्ता संतोष जाधव ने महाराष्ट्र राजभवन से एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस को सरकार बनाने का न्योता दिए जाने के पत्र की तारीख और उसके डिस्पैच नंबर की जानकारी मांगी थी. इसके जवाब में राज्यपाल के सचिवालय ने कहा कि इस तरह के किसी पत्र का कोई रिकॉर्ड नहीं है और इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी जा सकती.

विपक्ष ने उठाए सवाल

इस जवाब के बाद विपक्षी NCP के प्रवक्ता महेश भारत तापसे ने कई सवाल पूछे हैं. पहला सवाल था कि राज्यपाल का न्योता न होने के बावजूद सरकार कैसे बनी? दूसरा, सरकार की स्थापना किसके आदेश पर हुई? तीसरा सवाल था कि मुख्यमंत्री की शपथ कैसे हुई और क्या इस तरह अस्तित्व में आई सरकार का क्या कोई संवैधानिक दर्जा है? NCP के इन सवालों के बीच ये जानना जरूरी है कि क्या राज्यपाल के न्योते के बिना किसी राज्य में सरकार बनाई जा सकती है? तो इसका जवाब है नहीं. 

राज्यपाल के न्योते के बिना सरकार नहीं बनाई जा सकती है. राजनीतिक विश्लेषक अभय दुबे से हमने जानना चाहा कि सरकार बनाने की प्रक्रिया क्या होती है. उन्होंने बताया कि सबसे पहले बहुमत के साथ पार्टी या पार्टियों के गठजोड़ राज्यपाल से मिलते हैं. बहुमत का दावा पेश करते हैं. दावे से संतुष्ट होने के बाद राज्यपाल सरकार बनाने के लिए बुलाते हैं. राज्यपाल का संतुष्ट होना अनिवार्य है. अगर राज्यपाल संतुष्ट नहीं हैं कि अमुक दल के पास बहुमत है, तो सरकार नहीं बन सकती. विश्वास मत हासिल करने के लिए दिन तय होता है. ये निमंत्रण मुंह ज़बानी नहीं दिया जाता. ये प्रक्रिया लिखित रूप में होती है. साफ है कि सरकार बनाने के लिए राज्यपाल का लिखित आमंत्रण अनिवार्य है. ऐसे में सवाल ये है कि राज्यपाल के सचिवालय ने RTI के जवाब में लिखित पत्र की जानकारी क्यों नहीं दी?

राजनैतिक विशेषज्ञ की राय

अभय दुबे मानते हैं कि जवाब ना देने का कारण कुछ और रहा होगा. उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं हो सकता है कि बीजेपी और शिंदे गुट को सरकार बनाने के लिए राज्यपाल ने कोई सूचना न दी हो. उन्होंने बताया कि किसी तकनीकी पहलू को ध्यान में रखकर शायद सरकार ने राज्यपाल के पत्र की जानकारी नहीं दी है. इधर महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस का पूरे विवाद पर जवाब आ गया है. 


फडणवीस ने बताया कि राज्यपाल से लिखित निमंत्रण मिला था. हालांकि, वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में सरकार से संबंधित एक अदालती मामला चल रहा है और कई दस्तावेज उसके पास हैं. RTI के जवाब में सिर्फ इतना कहा गया कि ऐसा पत्र राज्यपाल के कार्यालय के पास नहीं है. फडणवीस ने कहा कि उन्हें लगता है कि पत्र राज्यपाल के पास है. 

इस विवाद से इतर एक और दिलचस्प बात ये है कि कुछ दिन पहले महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने खुद पदमुक्त होने की इच्छा भी जताई है. भगत सिंह कोश्यारी ने एक ट्वीट किया था. उन्होंने बताया था कि इस बारे में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बात की है. वहीं, महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन हुए आधे बरस से ज़्यादा समय गुज़र चुका है लेकिन सरकार गठन को लेकर विवाद का चैप्टर अब भी ख़त्म नहीं हुआ है. 

वीडियो: क्या एकनाथ शिंदे वापस उद्धव ठाकरे के साथ आएंगे?

Advertisement

Advertisement

()