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शेख हसीना अकेली नहीं हैं, इन नेताओं को भी देश छोड़कर भागना पड़ा

बांग्लादेश में Sheikh Hasina को देश छोड़कर भागना पड़ा. उनसे पहले श्रीलंका और अफ़ग़ानिस्तान से भी कुछ ऐसी ही तस्वीरें सामने आईं थीं

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7 अगस्त 2024 (अपडेटेड: 7 अगस्त 2024, 12:27 PM IST)
leaders who flee from their country amid turmoil sheikh hasina bangladesh
शेख हसीना अब भी भारत में हैं (फोटो-इंडिया टुडे)
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बांग्लादेश में 5 जून से शुरू हुई हिंसा, आगजनी और उसके बाद प्रधानमंत्री का देश छोड़कर भागना. फिर सेना का अपने हाथों में कंट्रोल लेना. अगर संक्षेप में देखें तो ये बांग्लादेश में 2 महीने की टाइमलाइन है. हिंसा में अबतक 300 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. 2009 से शुरू हुए उनके कार्यकाल को लोग एक दमनकारी कार्यकाल मानते हैं. वहीं, शेख हसीना देश के हालात के लिए विपक्षी पार्टियों मसलन बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात ए इस्लामी को ज़िम्मेदार ठहरा रही हैं. कुल मिलाकर बांग्लादेश से जिस तरह की तस्वीरें सामने आ रही हैं. उससे अब भी देश का भविष्य अनिश्चित लग रहा है.

श्रीलंका

कई सालों से चली आ रही अव्यवस्था और उसका नतीजा देश को एक भारी आर्थिक झटका. शासन व्यवस्था चरमराने लगी. देश के पास मौजूद फॉरेन करेंसी ख़त्म होने लगी.  फॉरेन करेंसी ख़त्म माने बेसिक ज़रूरतें पूरी करने वाली चीज़ें जैसे तेल की खरीद मुमकिन नहीं. लंबे समय तक बिजली कटने लगी. रोज़मर्रा की चीज़ें और खाने-पीने के सामान महंगे होने लगे. इस दौरान एक शब्द खूब चला, अरागलय. सिन्हाली में इसका मतलब होता है 'संघर्ष'.

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श्रीलंका राष्ट्रपति भवन में  मौजूद स्विमिंग पूल में नहाते हुए लोग (फोटो-एएफपी/गेट्टी)

जनता सड़कों पर उतर आई. मांग करने लगी कि राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे इस्तीफा दें. जैसी तस्वीरें आज बांग्लादेश से आ रही हैं, कुछ वैसा ही नज़ारा श्रीलंका में भी था. प्रोटेस्ट कर रही जनता राष्ट्रपति आवास में घुस गई. वहां मौजूद स्विमिंग पूल में नहाते हुए लोगों की तस्वीर सामने आई. साथ ही राष्ट्रपति भवन से जिसे जो मिला, उठा ले गया. इतनी भारी अशांति फैली की राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को देश छोड़कर भागना पड़ा. इस्तीफा देकर पहले वो मालदीव्स गए. फिर वहां से सिंगापुर. फिर इसके बाद वो कुछ समय के लिए थाईलैंड में भी रहे. फिर करीब 2 महीने बाद वो श्रीलंका वापस लौटे. तब तक पूर्व प्रधानमंत्री रनिल विक्रमसिंघे ने कार्यकारी राष्ट्रपति की हैसियत से 2022 में पद संभाला. फिर देश की संसद ने भी उन्हें राष्ट्रपति चुना. अगले 2 सालों तक विक्रमसिंघे ने कर्ज़ चुकाने, IMF से लोन सैंक्शन करवाने की दिशा में कदम उठाये. 2023 में विक्रमसिंघे के कार्यालय ने एक स्टेटमेंट जारी किया जिसमें लोगों से अपील की गई कि जो भी कलाकृतियां लोग ले गए थे वो वापस कर दें.

अफ़ग़ानिस्तान

साल 2021. 15 अगस्त को जब भारत अपनी आजादी का जश्न मना रहा था, उस समय अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल को तालिबान घेर चुका था. इससे पहले तालिबान अन्य कई शहरों पर कब्ज़ा कर चुके थे. अमरीका वहां 2 दशकों तक रहा, सरकार बनवाई, सेना को ट्रेनिंग दी. पर इस बीच तालिबान लगातार मज़बूत होता गया.  

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हेलीकॉप्टर में बैठकर भागते अशरफ गनी (फोटो-रॉयटर्स) 

राष्ट्रपति अशरफ गनी, जिन्हें प्रो-अमेरिका माना जाता था, एक हेलीकॉप्टर में बैठकर देश से भाग गए. उन्हें डर था कि अगर वो अफ़ग़ानिस्तान में रहे तो नजीबुल्लाह की तरह कहीं तालिबान उन्हें भी न मार दे. जैसे ही अशरफ गनी का हेलीकॉप्टर देश से बाहर गया, पूरे काबुल में अशांति रही. अशरफ गनी आजतक अफ़ग़ानिस्तान वापस नहीं लौटे हैं.

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