सेंसर बोर्ड के मुखिया प्रसून जोशी पर भी पहलाज निहलानी का साया दिख रहा है
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सेंसर बोर्ड अध्यक्ष प्रसून जोशी.
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पहलाज निहलानी यानी पूर्व सेंसर बोर्ड चीफ, अभी अपनी फिल्म को लेकर चर्चा में हैं. नाम है 'जूली-2'. लेकिन सेंसर बोर्ड को हमेशा के लिए विवादित बनाकर चले गए हैं. इसी को आगे बढ़ाते दिख रहे हैं नए अध्यक्ष प्रसून जोशी. इन्होंने अपने नए नियम-कानून लागू करने शुरू कर दिए हैं. प्रसून जोशी ने सर्टिफिकेशन के मुद्दे पर सेंसर बोर्ड और फिल्म मेकर्स में लगातार हो रही तनातनी को कम करने के लिए एक नया नियम बनाया है.
हॉलीवुड मूवी 'इट' को इंडिया में रिलीज़ करना था. फिल्म सेंसर बोर्ड के पास भेजी गई. प्रसून ने फिल्म देखी और उसमें 12 कट्स लगाने का आदेश दे दिया. मेकर्स को दिक्कत थी, तो बातचीत हुई जिसके बाद फिल्म से कट्स हटा दिए गए. लेकिन फिर प्रसून का निहलानी जाग गया और उन्होंने फिल्म में 3 कट्स लगाने को बोल दिया.

इसी पिक्चर के चक्कर में सब कांड हुआ है.
क्या है कि प्रसून जोशी बेचारे लिखने का काम करते हैं. ज़्यादा ताम-झाम से पाला नहीं पड़ा है. लेकिन इस काम में तो खाली सिनेमा देखना है और विवाद संभालना है. तो इससे बचने के लिए उन्होंने ये नियम बना दिया. कहा कि फिल्म के बारे में आपको सारी जानकारी एक बार में ही मिलेगी. नहीं तो अगर पहले बता दिया जाएगा तो आप लोग फिल्म की पब्लिसिटी करने लगेंगे मीडिया बुलाके.
न बात, न संवाद
अब भारतीय फिल्ममेकर्स को समस्या ये है कि इस नियम के चक्कर में उनकी फिल्म का रिलीज़ गड़बड़ा जाएगा. क्या होता कि फिल्म रिलीज़ से कुछ ही दिन पहले उसे सर्टिफिकेशन के लिए सेंसर बोर्ड में भेजा जाता है. ऐसे में अगर सेंसर बोर्ड कोई कट या सर्टिफिकेट सुझाता है और फिल्म निर्माता उससे संतुष्ट नहीं है तो उसे ट्रिब्यूनल में अपील करना पड़ेगा. इस अपील-उपिल के चक्कर में फिल्म की रिलीज़ डेट आ जाएगी.

प्रसून जोशी.
अब ट्रिब्यूनल में ये तो कुछ पक्का नहीं है कि फिल्म कब तक पास होगी या प्रसून गलत ही होंगे. अगर प्रसून को फिल्म सर्टिफिकेट अपीलेंट ट्रिब्यूनल (FCAT) ने गलत नहीं माना और उनके सुझाव को जस का तस रहने दिया तो ऐसे में उन्हें कोर्ट-कचहरी का भी चक्कर पड़ सकता है. जब फिल्म टाइम पर पास नहीं हो पाएगी, तो टाइम पर रिलीज़ कैसे होगी! ऐसे में फिल्म की रिलीज़ डेट का काम बिगड़ जाएगा. अब इसको कैसे हैंडल करना है, ये तो फिल्म बनाने वाले समझें या सर्टिफिकेट देने वाले. हमारा काम था बताना, सो बता दिया. अब अपना-अपना देख लो.
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नियम है कि निहलानी के समय में फिल्म को सर्टिफिकेट देने से पहले उसके मेकर्स को अनऑफिशियली बता दिया जाता था कि आपकी फिल्म को कित्ते कट्स और कौन सा सर्टिफिकेट दिया गया है. मगर अब ऐसा नहीं होगा. मतलब अब फिल्ममेकर्स को सिर्फ एक बार फाइनल तौर पर बताया जाएगा कि फिल्म को कौन सा सर्टिफिकेट मिला है और कौन से सीन फिल्म से हटाने हैं.हॉलीवुड देखकर प्रसून का निहलानी जाग गया
सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी और पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी.
हॉलीवुड मूवी 'इट' को इंडिया में रिलीज़ करना था. फिल्म सेंसर बोर्ड के पास भेजी गई. प्रसून ने फिल्म देखी और उसमें 12 कट्स लगाने का आदेश दे दिया. मेकर्स को दिक्कत थी, तो बातचीत हुई जिसके बाद फिल्म से कट्स हटा दिए गए. लेकिन फिर प्रसून का निहलानी जाग गया और उन्होंने फिल्म में 3 कट्स लगाने को बोल दिया.

इसी पिक्चर के चक्कर में सब कांड हुआ है.
क्या है कि प्रसून जोशी बेचारे लिखने का काम करते हैं. ज़्यादा ताम-झाम से पाला नहीं पड़ा है. लेकिन इस काम में तो खाली सिनेमा देखना है और विवाद संभालना है. तो इससे बचने के लिए उन्होंने ये नियम बना दिया. कहा कि फिल्म के बारे में आपको सारी जानकारी एक बार में ही मिलेगी. नहीं तो अगर पहले बता दिया जाएगा तो आप लोग फिल्म की पब्लिसिटी करने लगेंगे मीडिया बुलाके.
न बात, न संवाद
अब भारतीय फिल्ममेकर्स को समस्या ये है कि इस नियम के चक्कर में उनकी फिल्म का रिलीज़ गड़बड़ा जाएगा. क्या होता कि फिल्म रिलीज़ से कुछ ही दिन पहले उसे सर्टिफिकेशन के लिए सेंसर बोर्ड में भेजा जाता है. ऐसे में अगर सेंसर बोर्ड कोई कट या सर्टिफिकेट सुझाता है और फिल्म निर्माता उससे संतुष्ट नहीं है तो उसे ट्रिब्यूनल में अपील करना पड़ेगा. इस अपील-उपिल के चक्कर में फिल्म की रिलीज़ डेट आ जाएगी.

प्रसून जोशी.
अब ट्रिब्यूनल में ये तो कुछ पक्का नहीं है कि फिल्म कब तक पास होगी या प्रसून गलत ही होंगे. अगर प्रसून को फिल्म सर्टिफिकेट अपीलेंट ट्रिब्यूनल (FCAT) ने गलत नहीं माना और उनके सुझाव को जस का तस रहने दिया तो ऐसे में उन्हें कोर्ट-कचहरी का भी चक्कर पड़ सकता है. जब फिल्म टाइम पर पास नहीं हो पाएगी, तो टाइम पर रिलीज़ कैसे होगी! ऐसे में फिल्म की रिलीज़ डेट का काम बिगड़ जाएगा. अब इसको कैसे हैंडल करना है, ये तो फिल्म बनाने वाले समझें या सर्टिफिकेट देने वाले. हमारा काम था बताना, सो बता दिया. अब अपना-अपना देख लो.
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