अरविंद केजरीवाल की मां-बहन पर उतर आए कविवर कुमार विश्वास
जबकि कुमार विश्वास अक्सर भाषा की मर्यादा पर ज्ञान देते रहते हैं.
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बांई तरफ हैं कुमार विश्वास. दाहिनी तरफ उनका कारनामा. इनकी डिक्शनरी इतनी मामूली है कि आलोचना करने के लिए इन्हें बस मां-बहन टाइप गाली का ही सहारा बच गया.
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कुमार विश्वास कवि हैं. खुद के नाम में डॉक्टर जोड़ते हैं. पीएचडी वाला डॉक्टर. राजनीति में भी हैं. सभ्य समाज में उठते-बैठते हैं. इतनी पहचान पाकर भी जुबान शोहदों सी रद्दी है इनकी. इन्होंने अपने एक राजनैतिक विरोधी के लिए ट्वीट किया. उसको 'बौना' कहा. लिखा-

कुमार विश्वास के इस ट्वीट पर कई कमेंट हैं, जिसमें लोगों ने इस भाषा के लिए उनकी आलोचना की है. बावजूद इसके विश्वास ने न खेद जताया, न ट्वीट डिलीट ही किया. वैसे इस फोटो में जिन विवेक शर्मा का कमेंट दिख रहा है, वो भी गलत है. केजरीवाल को दिल खोलकर गाली दीजिए का क्या मतलब है. गाली-गलौच के लिए बैठे हैं क्या कुमार विश्वास वहां पर. मां-बहन को नहीं, तो केजरीवाल को ही सही.
नाम न भी लिया हो, तब भी सब पता लग रहा है
कुमार विश्वास ने नाम तो नहीं लिखा सीधे-सीधे. मगर दुनिया इतनी बेवकूफ तो है नहीं कि समझ न सके. ट्वीट पढ़कर साफ लगता है कि ये सब अरविंद केजरीवाल के बारे में लिखा गया है. केजरीवाल लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहते थे. कांग्रेस ने नहीं किया. इससे केजरीवाल नाराज़ हुए. उन्होंने कांग्रेस पर बीजेपी के साथ मिले होने का आरोप लगाना शुरू कर दिया. एक तरफ वो कांग्रेस की आलोचना कर रहे थे, दूसरी तरफ बार-बार ये रिग्रेट भी जता रहे थे कि गठबंधन क्यों नहीं हुआ. 13 मार्च को फिर से केजरीवाल का ट्वीट आया. लिखा कि हरियाणा में अगर जन नायक जनता पार्टी (JJP), आम आदमी पार्टी और कांग्रेस साथ मिलकर चुनाव लड़ें, तो राज्य की दसों सीटों पर बीजेपी हार जाएगी. उन्होंने राहुल गांधी से इस बारे में सोचने की अपील भी की.

ये कुछ दिनों पहले का ट्वीट है जनाब का. इसमें भी 'बौना' लिखा है. क्या ये भी अरविंद केजरीवाल को टारगेट करके लिखा गया है? शायद हां.
पब्लिक में ये सब लिख रहे हैं, प्राइवेट लाइफ में क्या करते होंगे!
कुमार विश्वास का ट्वीट पढ़कर लगता है कि वो केजरीवाल की इन्हीं सब बातों को टारगेट कर रहे थे. मगर किस तरह? मां-बहन करवा रहा था! लगे हाथों ये भी एक्सप्लेन कर देते कि कैसे करवाते हैं मां-बहन. ये कितनी स्तरहीन भाषा है. लगता है कोई ट्रोल आदमी बोल रहा हो. आलोचना के लिए और कोई एक्सप्रेशन नहीं मिला! दुनिया के सारे शब्द जल गए थे! कुमार विश्वास की डिक्शनरी इतनी मामूली है कि उसमें विरोधी की आलोचना के लिए बस ये अंदाज बचा था! फिर काहे के पढ़े-लिखे हुए आप? जब पब्लिक मंच पर आदमी ये सब लिख सकता है, तो प्राइवेट में तो और बदतमीजी दिखाता होगा. इम्प्रेशन तो यही छोड़ा है उन्होंने.
बस मां-बहन का वो शब्द नहीं है, जिस पर मुझे गुस्सा आ रहा है. कुमार विश्वास ने 'बौना' और 'लिलिपुट' भी तो लिखा है. जैसे कम कद का होना कोई गाली हो. शर्मिंदगी की बात हो. कुमार विश्वास बताएं. अपनी कदकाठी के लिए कहीं कोई योग्यता परीक्षा देकर आए थे क्या. उन्होंने चुना कि उन्हें कितना लंबा होना है और कैसा दिखना है? इंसान के बस में ये सब नहीं होता. मगर अपनी तमीज़ अपने हाथ होती है. इस पर तो आंका जाना चाहिए उसको. ये ट्वीट अगर स्केल हो, तो कुमार विश्वास यहां फेल होते हैं. वैसे कुमार विश्वास खुद गाली-गलौच करने और भाषा की सभ्यता को लेकर क्या कहते रहे हैं, ये जानने के लिए हमने उनका ट्विटर हैंडल खंगाला. उनके कुछ ट्वीट्स मिले पुराने. आप भी देखिए और हो सके तो कुमार विश्वास को भी दिखाइए-

सोचता हूं कि वो कितने मासूम थे, क्या से क्या हो गए देखते-देखते.


गालियां देने वालों, भाषा खराब करने वालों पर कुमार विश्वास का एक पुराना ट्वीट. 2017 का ट्वीट है. अभी 2019 है. दो साल में आदमी इतना बदल जाता है क्या?

उफ्फ...

हम्म...
ये न तो अरविंद केजरीवाल का पक्ष लेना है, न बस कुमार विश्वास की बदतमीजी टारगेट करना. ये इस तरह के तमाम रेफरेंसेज़ पर अप्लाई होता है. किसी की भी आलोचना के सौ हेल्दी तरीके हो सकते हैं. बिना गाली दिए, बिना कीचड़ फेंके और बिना गंदगी फैलाए भी आप किसी को गलत कह सकते हैं. अपना विरोध जता सकते हैं. कुमार विश्वास जैसे पढ़े-लिखे, सार्वजनिक जीवन में ऐक्टिव लोगों को अगर इतनी सी अक्ल नहीं, तो बेकार है सारी पढ़ाई-लिखाई. इस भाषा के बूते उनमें और किसी इंटरनेट ट्रोल में फर्क कर पाना मुमकिन नहीं है.
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मां-बहन करवा रहा था.उनका पूरा ट्वीट यूं है-
दो दिन पहले आत्ममुग्ध बौना पूर्ण राज्य जैसे अप्रासंगिक विषय पर राहुल गांधी को कोस रहा था. कांग्रेस के दफ्तर पर मां-बहन करवा रहा था. आज हरियाणा के लिए फिर उसी द्वार पर ललायित है. बौने के ट्विटर लिलिपुट चिंटुओ, इस कायर मनोरोगी की सत्तालिप्सा के लिए क्यों रोज गालियां खाते हो?

कुमार विश्वास के इस ट्वीट पर कई कमेंट हैं, जिसमें लोगों ने इस भाषा के लिए उनकी आलोचना की है. बावजूद इसके विश्वास ने न खेद जताया, न ट्वीट डिलीट ही किया. वैसे इस फोटो में जिन विवेक शर्मा का कमेंट दिख रहा है, वो भी गलत है. केजरीवाल को दिल खोलकर गाली दीजिए का क्या मतलब है. गाली-गलौच के लिए बैठे हैं क्या कुमार विश्वास वहां पर. मां-बहन को नहीं, तो केजरीवाल को ही सही.
नाम न भी लिया हो, तब भी सब पता लग रहा है
कुमार विश्वास ने नाम तो नहीं लिखा सीधे-सीधे. मगर दुनिया इतनी बेवकूफ तो है नहीं कि समझ न सके. ट्वीट पढ़कर साफ लगता है कि ये सब अरविंद केजरीवाल के बारे में लिखा गया है. केजरीवाल लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहते थे. कांग्रेस ने नहीं किया. इससे केजरीवाल नाराज़ हुए. उन्होंने कांग्रेस पर बीजेपी के साथ मिले होने का आरोप लगाना शुरू कर दिया. एक तरफ वो कांग्रेस की आलोचना कर रहे थे, दूसरी तरफ बार-बार ये रिग्रेट भी जता रहे थे कि गठबंधन क्यों नहीं हुआ. 13 मार्च को फिर से केजरीवाल का ट्वीट आया. लिखा कि हरियाणा में अगर जन नायक जनता पार्टी (JJP), आम आदमी पार्टी और कांग्रेस साथ मिलकर चुनाव लड़ें, तो राज्य की दसों सीटों पर बीजेपी हार जाएगी. उन्होंने राहुल गांधी से इस बारे में सोचने की अपील भी की.

ये कुछ दिनों पहले का ट्वीट है जनाब का. इसमें भी 'बौना' लिखा है. क्या ये भी अरविंद केजरीवाल को टारगेट करके लिखा गया है? शायद हां.
पब्लिक में ये सब लिख रहे हैं, प्राइवेट लाइफ में क्या करते होंगे!
कुमार विश्वास का ट्वीट पढ़कर लगता है कि वो केजरीवाल की इन्हीं सब बातों को टारगेट कर रहे थे. मगर किस तरह? मां-बहन करवा रहा था! लगे हाथों ये भी एक्सप्लेन कर देते कि कैसे करवाते हैं मां-बहन. ये कितनी स्तरहीन भाषा है. लगता है कोई ट्रोल आदमी बोल रहा हो. आलोचना के लिए और कोई एक्सप्रेशन नहीं मिला! दुनिया के सारे शब्द जल गए थे! कुमार विश्वास की डिक्शनरी इतनी मामूली है कि उसमें विरोधी की आलोचना के लिए बस ये अंदाज बचा था! फिर काहे के पढ़े-लिखे हुए आप? जब पब्लिक मंच पर आदमी ये सब लिख सकता है, तो प्राइवेट में तो और बदतमीजी दिखाता होगा. इम्प्रेशन तो यही छोड़ा है उन्होंने.
कुमार विश्वास जी, आपने अपनी कदकाठी के लिए एग्जाम दिया था क्या?At a time when the whole country wants to defeat Modi- Shah duo, Cong is helping BJP by splitting anti-BJP vote. Rumours r that Cong has some secret understanding wid BJP. Delhi is ready to fight against Cong-BJP alliance. People will defeat this unholy alliance. https://t.co/JUsYMjxCxy
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) March 5, 2019
बस मां-बहन का वो शब्द नहीं है, जिस पर मुझे गुस्सा आ रहा है. कुमार विश्वास ने 'बौना' और 'लिलिपुट' भी तो लिखा है. जैसे कम कद का होना कोई गाली हो. शर्मिंदगी की बात हो. कुमार विश्वास बताएं. अपनी कदकाठी के लिए कहीं कोई योग्यता परीक्षा देकर आए थे क्या. उन्होंने चुना कि उन्हें कितना लंबा होना है और कैसा दिखना है? इंसान के बस में ये सब नहीं होता. मगर अपनी तमीज़ अपने हाथ होती है. इस पर तो आंका जाना चाहिए उसको. ये ट्वीट अगर स्केल हो, तो कुमार विश्वास यहां फेल होते हैं. वैसे कुमार विश्वास खुद गाली-गलौच करने और भाषा की सभ्यता को लेकर क्या कहते रहे हैं, ये जानने के लिए हमने उनका ट्विटर हैंडल खंगाला. उनके कुछ ट्वीट्स मिले पुराने. आप भी देखिए और हो सके तो कुमार विश्वास को भी दिखाइए-

सोचता हूं कि वो कितने मासूम थे, क्या से क्या हो गए देखते-देखते.


गालियां देने वालों, भाषा खराब करने वालों पर कुमार विश्वास का एक पुराना ट्वीट. 2017 का ट्वीट है. अभी 2019 है. दो साल में आदमी इतना बदल जाता है क्या?

उफ्फ...

हम्म...
ये न तो अरविंद केजरीवाल का पक्ष लेना है, न बस कुमार विश्वास की बदतमीजी टारगेट करना. ये इस तरह के तमाम रेफरेंसेज़ पर अप्लाई होता है. किसी की भी आलोचना के सौ हेल्दी तरीके हो सकते हैं. बिना गाली दिए, बिना कीचड़ फेंके और बिना गंदगी फैलाए भी आप किसी को गलत कह सकते हैं. अपना विरोध जता सकते हैं. कुमार विश्वास जैसे पढ़े-लिखे, सार्वजनिक जीवन में ऐक्टिव लोगों को अगर इतनी सी अक्ल नहीं, तो बेकार है सारी पढ़ाई-लिखाई. इस भाषा के बूते उनमें और किसी इंटरनेट ट्रोल में फर्क कर पाना मुमकिन नहीं है.
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