उन्नाव रेप केस: कुलदीप सेंगर के लिए SC का दरवाजा फिलहाल बंद, निचली अदालत को क्या आदेश दिया?
19 जनवरी को हाई कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर की सजा पर रोक लगाने और जमानत देने की मांग ठुकराई थी. इसके बाद सेंगर ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप केस के दोषी कुलदीप सिंह सेंगर को राहत देने से इनकार कर दिया. कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें सेंगर को रेप पीड़िता के पिता की मौत केस में जमानत देने से इनकार किया गया था.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने कहा कि सेंगर की सजा के खिलाफ अपील पहले से ही दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट से कहा कि इस अपील को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाए. सुनवाई के दौरान यह बताया गया कि सेंगर लगभग नौ साल सात महीने जेल में बिता चुका है.
यह मामला सेंगर की उस अपील से जुड़ा था, जिसमें उसने 19 जनवरी के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी. हाई कोर्ट ने उसकी सजा पर रोक लगाने और जमानत देने की मांग ठुकरा दी थी.
पीठ में जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस एन वी अंजारिया भी शामिल थे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीड़िता द्वारा दायर अपील के साथ सेंगर की अपील भी सुनी जा सकती है. कोर्ट ने निर्देश दिया कि दिल्ली हाई कोर्ट एक हफ्ते के भीतर मामले को सूचीबद्ध करे. अगर जरूरी हो तो बेंच में बदलाव भी किया जा सकता है.
सेंगर की ओर से वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि उनके मुवक्किल ने 10 साल की सजा में से नौ साल सात महीने पूरे कर लिए हैं, लेकिन हाई कोर्ट ने इसे महत्वपूर्ण नहीं माना.
CBI की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सेंगर की सजा के खिलाफ अपील 11 फरवरी को सुनवाई के लिए तय है. उन्होंने सुझाव दिया कि ट्रायल कोर्ट से इस मामले को “आउट ऑफ टर्न” यानी प्राथमिकता के आधार पर सुनने को कहा जाए. LiveLaw की रिपोर्ट के मुताबिक इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस अपील का निपटारा तीन महीने के भीतर किया जाना चाहिए.
वीडियो: उन्नाव रेप केस: कुलदीप सेंगर की बेटी ऐश्वर्या सेंगर ने केस के बारे में क्या बताया?

.webp?width=60)

