एक कोरियाई प्रोफेसर ने हिंदी भाषा की पढ़ाई के लिए अपनी नौकरी दांव पर लगा दी
बुसान यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स ने अब पीएम मोदी से गुहार लगाई है
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बुसान यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेन स्टडीज़ में हिंदी भाषा की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सोन येओन वू हिंदी की पढ़ाई जारी रखने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही हैं. (तस्वीर साभार: एशियन कम्युनिटीज़)
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दक्षिण कोरिया में एक यूनिवर्सिटी है. बुसान यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेन स्टडीज़ (BUFS). यहां हिंदी भाषा की पढ़ाई होती रही है. पिछले 37 सालों से. लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब यह फैसला लिया है कि अगले सत्र से यूनिवर्सिटी में हिंदी की पढ़ाई बंद कर दी जाएगी. विश्वविद्यालय प्रशासन के इस फैसले का कई लोग विरोध कर रहे हैं. इसी कड़ी में इसी यूनिवर्सिटी में हिंदी भाषा की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सोन येओन वू भी इस फैसले के विरोध में सामने आई हैं.
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से हिंदी भाषा में एमए कर चुकीं डॉ. सोन येओन वू 2018 से बुसान यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेन स्टडीज़ में हिंदी पढ़ा रही हैं. उन्होंने विश्वविद्यालय के नए पाठ्यक्रम पर अपनी सहमति देने से इनकार कर दिया है. हिंदी भाषा विभाग के प्रमुख के रूप में डॉ. वू की सहमति न मिलने से बुसान यूनिवर्सिटी प्रशासन रिवाइज्ड सिलेबस लागू नहीं कर पाया. लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने डॉ. वू को नए पाठ्यक्रम पर साइन के लिए राज़ी करने की कोशिशें नहीं छोड़ी हैं.
इस मामले को लेकर डॉ. वू ने एशियन कम्युनिटीज़ वेबसाइट से बात की, उन्होंने बताया-
विश्वविद्यालय प्रशासन और विभागीय प्रमुख ने कई बार मुझसे रिवाइज्ड करिकुलम पर साइन करने को कहा, लेकिन मैंने इनकार कर दिया. मुझे हिंदी भाषा की पढ़ाई को हटाने के पीछे कोई वाज़िब वजह नहीं दिखती, वो भी तब जब भारत अपनी नई शिक्षा नीति में कोरियन भाषा को बढ़ावा दे रहा है.बुसान यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेन स्टडीज़ का प्लान ये है कि भारतीय भाषा, संस्कृति और भारतीय व्यावसायिक अध्ययन में से सिर्फ भारतीय व्यावसायिक अध्ययन को ही आगे ज़ारी रखा जाए. इसके पीछे विश्वविद्यालय का तर्क ये है कि कोरियन छात्रों को भारतीय अर्थव्यवस्था, इतिहास और अन्य चीजों के बारे में सीखना चाहिए. रही बात हिंदी की तो भारत में अंग्रेजी से भी काम चल जाता है. यूनिवर्सिटी के कई छात्रों ने विडियो बनाकर पीएम मोदी से अपील की है कि बुसान यूनिवर्सिटी में हिंदी की पढ़ाई ज़ारी रहनी चाहिए. विडियो देख सकते हैं. डॉ. वू ने 24 दिसंबर को अपने कुछ साथी प्रोफेसर और हिंदी डिपार्टमेंट के कुछ स्टूडेंट्स को साथ लेकर सिओल में भारतीय राजदूत से मुलाकात की. बातचीत के दौरान, कोरिया में भारतीय राजदूत श्रीप्रिया रंगनाथन ने मामले को संबंधित कोरियन मंत्रालय को भेजने की बात कही. विश्वविद्यालय की ओर से कड़ी कारवाई किए जाने की संभावना को लेकर सवाल पर डॉ. वू ने कहा कि जब यहां हिंदी भाषा की पढ़ाई ही नहीं होगी, तो नौकरी में रहने का क्या फायदा है. मैं मामले को लेकर आख़िर तक जाने को तैयार हूं. रिपोर्ट्स के मुताबिक़, बढ़ते मामले को देखते हुए दिल्ली में दक्षिण कोरिया के राजदूत शिन बोंग-किलो ने बुसान यूनिवर्सिटी के अधिकारियों को चिट्ठी लिखी है कि हिंदी की कक्षाओं को कम न किया जाए.

