लड़ाई के लिए हम तैयार हैं. वॉर हुई तो दुश्मन को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी, जिसे वोकतई चुका नहीं पाएगा: राहिल शरीफ, आर्मी चीफ पाकिस्तान राफिल को पाकिस्तान के अंदररसगुल्ला खाना है उनको बोलने दो जो बोलते हैं. कई लोगों को फालतू बात करने की आदतहोती है, भारत जवाब देने में सक्षम: पूर्व जनरल वीके सिंह, विदेश राज्य मंत्री,भारत सरहदों के बीच कड़वाहट हो, तो 'न्यूज चायनलों' की जुबां में इसे करारा जवाबकहते हैं. पहले बयान ने भारत और दूसरे ने पाकिस्तान में लोगों को गुस्से और गर्व सेबारी-बारी भर दिया था. ये बयान तब के हैं, जब उड़ी हमला नहीं हुआ था. जब इंडिया केस्पेशल कमांडो ने Pok में सर्जिकल स्ट्राइक नहीं की थी. ये वक्त था तब का, जब 1965युद्ध के 50 साल पूरे हुए थे. दोनों मुल्कों के बीच बयानबाजी तेज हो गई थी.पाकिस्तानी आवाम और सियासत के बीच तब से लेकर अब तक एक बंदा जो उस पार का एक बड़ा'हीरो' है. वो हैं 59 साल के पाकिस्तानी आर्मी चीफ राहिल शरीफ. अब जब न्यूज चैनलोंऔर सोशल मीडिया पर इंडो-पाक जंग के हालात बने हुए हैं, तो आइए आपको बताते हैं कौनऔर कहां से आए हैं ये राहिल शरीफ...फैमिली बैकग्राउंड1. राहिल शरीफ का आर्मी बैकग्राउंड है. परिवार में फौजी ही फौजी. पिता, मामा, भाईसब आला दर्जे के शूरवीर कहलाए. 2. 'निशां-ए-हैदर' पाकिस्तान का सबसे ऊंचा मिलिट्रीअवॉर्ड है. 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में राहिल के भाई शब्बीर शरीफ शहीद हो गएथे. शब्बीर शरीफ को इसी अवॉर्ड से नवाजा गया. 3. बहादुरी के चलते राहिल के भाईकैप्टन मुमताज शरीफ को 'सितारा-ए-बसलत' सम्मान से नवाजा गया. 4. 1965 युद्ध में रजाअजीज भट्टी शहीद हुए थे. रजा अजीज को भी निशां-ए-हैदर सम्मान दिया गया. रजा राहिलशरीफ के मामा थे.पाक में लोकप्रियता की वजह1. हमारे यहां जिस तरह शहीद विक्रम बत्रा या सैम मानिक शॉ की बहादुरी के किस्से चावसे सुने जाते हैं. ठीक उसी तरह पाकिस्तान में राहिल शरीफ के परिवार की काफी इज्जतहै. राहिल के बयान इसकी एक बड़ी वजह है. 2. आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान. पाकिस्तानमें पला पनपा. तहरीक-ए-तालिबान या किसी आतंकी संगठन के लिए मुल्क के नजरिए बदलने कोलेकर राहिल का नजरिया पुराने सेना प्रमुखों से बेहतर रहा. 3. पाकिस्तानी मिलिट्रीअकेडमी में सुरक्षाबलों को आतंकियों को मुंहतोड़ जवाब देने की ट्रेनिंग देने का कामभी राहिल बतौर इंस्पेक्टर जनरल कर चुके हैं. 4. पाकिस्तान में आतंकियों के सफाये याबलूचिस्तान हिंसा को रोकने को लेकर सैनिक कार्रवाई. सब में राहिल शरीफ का रोल अहमरहा. 5. भारत पाकिस्तान दोनों मुल्कों में एक कॉमन बात है. दूसरे मुल्क के खिलाफअगर कोई जहर उगलता है तो कट्टर 'देशभक्तों' की नजरों में हीरो बन ही जाता है. तो इसलिहाज से पाकिस्तान में होने वाली हर घटना के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने औरकरारा जवाब देने का काम राहिल करते हैं. लिहाजा आवाम से मिलती है मुहब्बत.अंध देशभक्त उधर भी इधर भी, कैसे निपटोगे राहिल शरीफ?फोटोशॉप कर वीरता के किस्से रचने में इंडिया के फेसबुकिया या सोशल मीडिया केउत्पाती ही आगे नहीं हैं. पाकिस्तान में भी अंध देशभक्त हैं. राहिल शरीफ के फैन्सकी दीवानगी का आलम कुछ यूं है कि 1965 युद्ध के दौरान जब राहिल 10 साल के थे. सोशलमीडिया के 'भक्त' 65 युद्ध में एक बहादुरी पोज में खड़े एक सैनिक को राफिल बतातेनहीं थकते. जबकि ये तस्वीर राहिल की नहीं, उनके मामू जान रजा अजीज भट्टी की थी. 1.राहिल शरीफ ने 1976 में अपना पहला कमीशन पाया था. पर इसे भी पाकिस्तानी हुक्मरानोंका ढीलापन ही कहेंगे कि राहिल के मामू और निशां-ए-हैदर रजा के नाम पर एक लैंडमार्कनहीं है.सियासत में रौला1.परवेज मुशर्रफ राहिल शरीफ के भाई के क्लासमेट थे. मुशर्रफ से राहिल शरीफ और उनकेविरोधी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से करीबियां जगजाहिर हैं. दोनोंविरोधियों के बीच पुल बनने का काम भी राहिल ने किया. कहते हैं नवाज शरीफ परवेजमुशर्रफ से जुड़े केसों में नवाज शरीफ राहिल की वजह से ही कुछ ढीले हुए थे. 2. साल2013. रैंक के लिहाज से ऊंचे पदों पर बैठे कई सीनियर्स को पीछे छोड़ते हुए राहिलपाकिस्तानी आमी के चीफ बन गए. रिटायर होंगे नवंबर 2016 में. पाकिस्तान के'निशां-ए-इम्तियाज' हैं राहिल. परवेज मुशर्रफ ने काफी वक्त पहले राहिल शरीफ काकार्यकाल पांच साल बढ़ाने की मांग कर की. बोले- बहुत अच्छा काम कर रहे हैं राहिल.एक फैक्ट ये भी है कि परवेज ने बतौर सेनाप्रमुख अपना कार्यकाल पांच साल बढ़वाया था.--------------------------------------------------------------------------------ये जवाब देकर पाकिस्तानी आर्मी से लड़िए क्विज जंग