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केदारनाथ धाम के कपाट खुले, इन पॉइंट्स को ध्यान में रखकर ही यात्रा करें

केदारनाथ यात्रा का 'अ से ज्ञ'.

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25 अप्रैल 2023 (अपडेटेड: 25 अप्रैल 2023, 05:00 PM IST)
Kedarnath Dham portals opened for devotees, know everything about the Yatra
खुल गए बाबा केदारनाथ के कपाट. (फोटो- आजतक)
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उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ों पर बसे बाबा केदारनाथ के मंदिर के कपाट आज पूरे विधि विधान से खोल दिए गए (Kedarnath Opens for Pilgrims). इस मौके पर रावल और पुरोहितों ने पूजन अर्चन किया. खुद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी केदारनाथ धाम में मौजूद थे. अब करीब 6 महीने तक केदारनाथ के भक्त उनके दर्शन कर सकेंगे. इस साल यात्रा के लिए अब तक 17 लाख रजिस्ट्रेशन कराए जा चुके हैं. आगे भी यात्रियों के रजिस्ट्रेशन होंगे.

खुल केदारनाथ के कपाट

मंगलवार, 25 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर विशेष पूजन के साथ केदारनाथ के कपाट खोले गए. मंदिर के मुख्य पुजारी जगद्गुरु रावल भीम शंकर लिंग शिवाचार्य ने केदारनाथ धाम के कपाट खोले. खबर है कि मंदिर को 35 क्विंटल फूलों से सजाया गया है.

कहा जा रहा है कि इस साल दर्शनार्थियों की यात्रा के अब तक के सारे रिकॉर्ड्स टूट सकते हैं. पिछले साल 15 लाख से ज़्यादा यात्रियों ने अपने आराध्य बाबा केदारनाथ के दर्शन किए थे.

केदारनाथ मंदिर समुद्र तल से 3,583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. इसे हिंदुओं के सबसे पवित्र स्थलों में से एक माना जाता है. ये मंदिर भगवान शिव को समर्पित है.

कैसे करें केदारनाथ की यात्रा?

केदारनाथ यात्रा काफी दुर्गम मानी जाती है. इसलिए सरकार ने हर यात्री के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी कर दिया है. रजिस्ट्रेशन कराने के लिए badrinath-kedarnath.gov.in पर जाकर अपनी यात्रा की प्री बुकिंग कर सकते हैं.

बता दें, क्षेत्र में बर्फबारी और बारिश की भविष्यवाणी करते हुए मौसम विभाग ने 29 अप्रैल तक चेतावनी जारी की है. इसके चलते उत्तराखंड सरकार ने 30 अप्रैल तक केदारनाथ के लिए तीर्थयात्रियों के नए रजिस्ट्रेशन बंद कर दिए हैं.

किन बातों का ध्यान रखें?

- केदारनाथ मंदिर तक अब भी गाड़ियां नहीं पहुंच सकतीं. ऐसे में अगर आप यात्रा कर रहे हैं तो आपको विशेष तैयारी से जाना होगा.

- अगर आप दिल्ली से यात्रा कर रहे हैं तो आपको हरिद्वार-श्रीनगर-सोनप्रयाग के रास्ते गौरीकुंड पहुंचना होगा. इसके लिए आप अपनी गाड़ी या बस से गौरीकुंड जा सकते हैं.

- गौरीकुंड से आगे गाड़ियां नहीं जा सकतीं. ऐसे में मंदिर तक पहुंचने के लिए आपके पास तीन विकल्प हैं. पहला हेलीकॉप्टर से, दूसरा घोड़े-खच्चर से और तीसरा विकल्प पैदल यात्रा का है. पैदल चलने वाले यात्रियों को गौरीकुंड से 16 किलोमीटर की दुर्गम चढ़ाई करनी होती है.

हेलीकॉप्टर का कितना खर्च आएगा?

हेलीकॉप्टर सेवा के लिए 5-6 एविएशन कंपनियां हेलीकॉप्टर चलाती हैं. सोनप्रयाग के आसपास स्थित सिरसी, फाटा और सीतापुर क्षेत्र में बने हेलीपैड से हवाई यात्रा की जा सकती है. मंदिर जाने और आने, यानी दोनों तरफ की यात्रा के लिए आपको क़रीब 5500 रुपये प्रति यात्री किराया देना होता है. हेलीपैड से मंदिर तक कि दूरी मात्र 6-7 मिनट में तय की जा सकती है. भीड़ की वजह से हेलीकॉप्टर सेवा में दिक्कतें आती हैं. खराब मौसम हेलीकॉप्टर संचालन में बाधा बन सकता है. हेलीकॉप्टर बुकिंग के लिए heliservices.uk.gov.in पर लॉगिन करके टिकट बुक किए जा सकते हैं.

घोड़े-खच्चर भी बेहतर विकल्प

केदारनाथ यात्रा पर जाने वाले ज्यादातर यात्री घोड़े खच्चर से मंदिर जाते हैं. गौरीकुंड से मंदिर तक की एक तरफ की यात्रा के लिए क़रीब ढाई हजार रुपये खर्च करने होते हैं. मंदिर से नीचे गौरीकुंड आने का खर्च 1800 से 2000 रुपये तक आता है. घोड़े खच्चर की बुकिंग गौरीकुंड में बने घोड़ा टिकट काउंटर से होती है. टिकट लेने के बाद गौरीकुंड से आधा किलोमीटर आगे घोड़ा पड़ाव तक पैदल जाकर घोड़े या खच्चर से मंदिर तक जा सकते हैं. घोड़े से मंदिर तक जाने में करीब 4 से साढ़े 4 घंटे का समय लगता है. मंदिर से वापस गौरीकुंड तक की यात्रा 3 घंटे में आसानी से हो जाती है.

पैदल यात्री कैसे जा सकते हैं?

अगर आप केदारनाथ मंदिर पैदल जाना चाहते हैं तो पहले आप अपना फिजिकल चेक अप करा लें. स्वास्थ्य ठीक होने पर ही पैदल यात्रा का फैसला लें. गौरीकुंड से भीमबली, रामबाड़ा, लिंचोली, घोड़ा पड़ाव के रास्ते आप मंदिर तक जाएंगे. रास्ते में कई जगह ऑक्सीजन लेवल कम होता है जिससे सांस लेने में दिक्कत शुरू हो जाती है. कई लोगों की तबियत भी दुर्गम चढ़ाई की वजह से खराब हो जाती है. बारिश और ठंड से भी पैदल यात्रियों को बहुत सी दिक्कतें आती हैं. हालांकि बड़ी संख्या में यात्री पैदल मंदिर तक जाते हैं.

यात्रा में रुक-रुक कर लोग 16 किलोमीटर की चढ़ाई कर लेते हैं. पैदल चलने वाले यात्रियों को गौरीकुंड से मंदिर तक जाने में औसतन 6-7 घंटे लगते हैं. बाक़ी चढ़ने वाले की क्षमता पर है कि वो कितनी जल्दी या कितनी देर में चढ़ाई पुरी कर ले.

क्या-क्या सावधानियां बरतें?

- ऊंचे पहाड़ों पर स्थित केदारनाथ मंदिर साल के 6 महीने बर्फ से ढंका रहता है. बर्फ हटने के बाद भी केदारनाथ घाटी में ठंड बहुत ज्यादा होती है. ऐसे में आप चाहे किसी भी महीने में जाएं, ठंड से बचने के उपाय साथ जरूर ले जाएं.

- यात्रा में बारिश कभी भी हो सकती है, ऐसे में रेनकोट और बेहतर किस्म के जूते साथ रखना जरूरी है.

- रास्ते में भी और मंदिर परिसर के पास भी कई बार ऑक्सिजन लेवल कम हो जाता है. इसलिए अगर आपको सांस लेने में तकलीफ है तो आप यात्रा पर जाने से पहले डॉक्टर से सम्पर्क जरूर कर लें.

- मंदिर परिसर के पास और गौरीकुंड से मंदिर मार्ग पर भी जगह-जगह मेडिकल कैंप्स बनाए जाते हैं. दिक्कत आने पर डॉक्टर को अपनी दिक्कत ज़रूर बताएं वरना आपकी परेशानी बढ़ सकती है.

वीडियो: केदारनाथ मंदिर को कितना सोना दान मिला जो पहली बार 30 ITBP जवान करेंगे ठंड में रक्षा?

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