जानिए, किसान आंदोलन में क्यों दिखीं उमर खालिद और शरजील इमाम की तस्वीरें
तस्वीरें वायरल हो रही हैं
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दिल्ली के तिकरी बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन यूनियन (उगराहां) ने मानवाधिकार दिवस मनाया और जेल में बंद एक्टिविस्टों को रिहा करने की मांग की.
किसान आंदोलन से तकरीबन रोज ही ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं, जो सोशल मीडिया पर दिखाई देती हैं. लेकिन आज 10 दिसंबर को एक खास तस्वीर वायरल हो रही है. इसे बीजेपी के नेता भी खूब शेयर कर रहे हैं. आखिर क्या है इस तस्वीर में और इसे क्यों शेयर किया जा रहा है, आइए बताते हैं.
बीजेपी नेता ने ट्वीट की तस्वीर
किसान आंदोलन की जो तस्वीर ट्विटर पर बीजेपी और उनके समर्थक शेयर कर रहे हैं, उसमें उमर खालिद, शरजील इमाम, गौतम नवलखा, सुधा भारद्वाज, वरवरा राव और आनंद तेलतुंबडे जैसे एक्टिविस्ट नजर आ रहे हैं. बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने भी ऐसी ही फोटो शेयर करते हुए लिखा,
कब की और कहां की है ये तस्वीर?
ये तस्वीर 10 दिसंबर यानी गुरुवार दोपहर दिल्ली के तिकरी बॉर्डर की है. यहां किसानों के संगठन भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) ने एक कार्यक्रम किया था. 10 दिसंबर को पड़ने वाला मानवाधिकार दिवस मनाने के लिए. इस मौके पर जेल में बंद लोगों के परिवारों ने मंच पर अपने अनुभव बताए. सरकार के रवैये पर विचार सामने रखे. इनमें प्रमुख थे जेल में बंद एक्टिविस्ट नताशा नरवाल के पिता. कार्यक्रम में अलग-अलग आरोपों में NSA और UAPA के तहत जेल भेजे गए लोगों को रिहा करने की मांग की गई. कार्यक्रम का पूरा वीडियो यहां देखा जा सकता है-
किसान आंदोलन में ये मांग कब से होने लगी?
ये किसान आंदोलन में उठाई गई कोई नई मांग नहीं है. किसानों ने जब आंदोलन शुरू किया, तो 30 किसान संगठनों ने मिलकर सरकार के सामने चार बड़ी मांगें रखी थीं. देखिए-
# मोदी सरकार अपने लाए तीनों किसान कानून रद्द कर दे.
# नया बिजली अध्यादेश लागू न हो, और 2020 के बिजली बिल माफ हों.
# सरकार का प्रदूषण को कम करने के लिए लाया गया एकतरफा कानून रद्द किया जाए, जिसमें पराली जलाने को लेकर बड़े जुर्माने का नियम बनाया गया है.
# उन किसान नेताओं, स्टूडेंट लीडर, एनआरसी का विरोध करने वालों और एक्टिविस्टों को रिहा किया जाए, जो झूठे केसों में फंसाकर जेल में बंद कर दिए गए हैं.
ऐसे में सरकार और किसानों के बीच बातचीत में यह मुद्दा पहले से शामिल है. हालांकि सरकार से किसानों को जो प्रस्ताव मिला, उसमें इस मांग के बारे में कुछ साफ आश्वासन नहीं दिया गया.

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