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नोटबंदी के विरोध में इस शख्स ने 23 हजार के नोट जला दिये और एक अजीब प्रतिज्ञा ले ली

एक तरफ सपोर्ट है, दूसरी तरफ विरोध है.

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लल्लनटॉप
29 नवंबर 2016 (Updated: 29 नवंबर 2016, 06:42 AM IST)
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एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी के नोटबंदी के फैसले को सपोर्ट मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ बहुत से लोग अलग-अलग तरीकों से अपना विरोध जता रहे हैं. लाइन में लगे लोग नाराज चल रहे हैं. भारत बंद की असफल कोशिश भी की गई. सरकार का दावा है, स्थिति कुछ दिनों में सुधर जाएगी.
ऐसे में केरल के एक शख्स ने इस फैसले के विरोध में अपना आधा सर मुंडवा लिया है और अपनी बचत के 23,000 रुपए जला डाले. उसका कहना है कि वो मोदी के सत्ता से हटने तक ऐसे ही रहेगा. इस शख्स का नाम है याहिया. याहिया सत्तर साल के हैं. इन्हें याही कक्का भी कहा जाता है. केरल के कोल्लम में एक छोटा सा होटल और चाय की दुकान चलाते हैं.
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केरल यूनिवर्सिटी के प्रोफ़ेसर डॉक्टर अशरफ ने फेसबुक पर याहिया की कहानी शेयर की है.
''मेरा नाम याहिया है. लोग मुझे याही भी कहते हैं. मैं 70 साल का बूढ़ा हूं. कोल्लम जिले के कडक्कल मुक्कुन्नम का रहने वाला हूं. जब मुझे लगा कि मैं नारियल के पेड़ों में चढ़कर और खेतों में काम करके अपनी लड़कियों की शादी नहीं कर पाऊंगा तो मैं खाड़ी की तरफ चला गया. लेकिन एक गरीब, अनपढ़ आदमी के लिए वहां भी कोई जगह नहीं थी. जो भी थोड़ा बहुत मैंने कमाया था उसे लेकर मैं वापस आ गया. मैंने कडक्कल को-ऑपरेटिव बैंक से कर्ज लिया और अपनी बेटी की शादी की.
मैंने खुद के लिए और परिवार के लिए ये छोटा सा फ़ूड-पॉइंट खोला. पूरा होटल मैं अकेले संभालता हूं. खाना बनाने से लेकर उन्हें परोसने और फिर साफ़-सफाई तक. इसीलिए मैं हमेशा नाइटी पहने रहता हूं. लोगों को मेरे हाथ का बीफ और चिकेन फ्राई खाना पसंद है. मैं सुबह पांच बजे से आधी रात तक होटल चलाता हूं. अगर मैं ये होटल गुजरात या मध्य प्रदेश में चलाता तो मुझे टांग दिया जाता.
अचानक एक दिन प्रधानमंत्री ने नोटबंदी की घोषणा कर दी. मेरे पास कैश में 23,000 रूपए कैश में थे. मैंने उन्हें एक्सचेंज कराने के तमाम प्रयास किए. दो दिनों तक लाइन में खड़ा रहा. दूसरे दिन मेरा शुगर लेवल गिर गया और मैं बेहोश हो गया.
किसी ने मुझे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया. लोन अकाउंट के अलावा मेरे पास कोई बैंक अकाउंट नहीं है. को-ऑपरेटिव बैंक में सारे ट्रांजैक्शन रोक दिए गए थे. मुझे लगा अब मैं इन्हें कहीं डिपॉजिट नहीं कर पाऊंगा. मुझे अपनी मेहनत की कमाई के पैसे बैंक में जमा करवाने के लिए और कितने दिन लाइन में लगना होगा.
जब मैं हॉस्पिटल से घर आया तो मैंने चूल्हे में अपने सारे पैसे जला दिए. मैं बार्बर की दुकान में गया और अपना आधा सिर मुंडवा लिया. मैं इन्हें फिर से तभी रखूंगा, जब मोदी सत्ता से बाहर जाएंगे. ये मेरी कसम और मेरा विरोध दोनों है.''
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कडक्कल की फेसबुक पोस्ट

इंडिया टुडे से बात करते हुए डॉक्टर अशरफ ने कहा, ''याही कक्का रोज न्यूज़ पेपर पढ़ते हैं. उनका हर चीज पर अपना एक स्टैंड है. व्यंग्य करते हैं. हंसमुख हैं. वो नाइटी इसलिए पहनते हैं क्योंकि उन्हें इसमें आराम मिलता है. उनके पास को-ऑपरेटिव बैंक के अलावा किसी बैंक में अकाउंट नहीं है. अपने पैसों को एक्सचेंज न करवा पाने पर उन्होंने अपने पैसे जला डाले और अपना सिर आधा मुंडवा लिया है.''

ये स्टोरी निशान्त ने की है.

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