केरल के 'बाला' के सिर पर बाल नहीं उगे तो कंपनी पर केस कर दिया और जीत भी गया
जिस एक्टर ने विज्ञापन किया, उस पर भी जुर्माना लग गया
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बाल गिरने से परेशान केरल के एक शख्स ने भी बाला फिल्म की तरह ऑयल इस्तेमाल करने का सोचा, लेकिन कंपनी का दावा गलत निकला. उन्होंने कंपनी के साथ विज्ञापन करने वाले एक्टर अनूप को भी कज्यूमर कोर्ट में खींच लिया.
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'बाला' फिल्म में बालों के लिए आयुष्मान खुराना के किरदार की जद्दोजहद दुनिया ने देखी. उसकी बात को जमकर सराहा भी. लेकिन इस फिल्म में कई नुस्खे आजमाने की बाद भी राहत न मिलने का किस्सा भी है. ऐसे ही कई नुस्खों के जरिए रोज लाखों ऐसे लोगों को भरमाया जा रहा है, जो घने बालों की चाहत रखते हैं. केरल के त्रिशूर में रहने वाले 60 साल के फ्रांसिस वडक्कन ने बाल उगाने के ऐसे ही दावों को गंभीरता से ले लिया. दावा झूठा निकला तो उन्होंने तेल बनाने वाली कंपनी को कंज्यूमर कोर्ट में घसीट लिया. उन्होंने न सिर्फ अपने दावे को सही साबित किया, बल्कि कंपनी के लिए विज्ञापन करने वाले एक्टर पर भी जुर्माना लगवा दिया.
फिल्म एक्टर को ठहराया गया जिम्मेदार
कंपनी ने अपने विज्ञापन में बाल बढ़ाने का दावा किया था. इस दावे के लिए कंपनी ने हेयर क्रीम प्रोडक्ट का फिल्म एक्टर से विज्ञापन कराया. फिल्म एक्टर अनूप मेनन ने इस प्रॉडक्ट के असर को जाने बिना ही एंडॉर्स कर दिया. फ्रांसिस वडक्कन ने ए-वन मेडिकल्स, धात्री आयुर्वेद प्राइवेट लिमिटेड और अनूप मेनन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. त्रिशूर के 'जिला उपभोक्ता फोरम' ने धात्री हेयर क्रीम (Dhathri Hair cream) बनाने वाली कंपनी और फिल्म एक्टर अनूप मेनन दोनों को दोषी पाया. दोनों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया. यही नहीं, उस दुकानदार को भी 3 हजार रुपए हर्जाना देने को कहा, जिसने यह तेल वडक्कन को बेचा था.
5 लाख रुपए का मुआवजा मांगा था
अपनी शिकायत में वडक्कन ने बताया कि उन्होंने पहली बार इस हेयर क्रीम को जनवरी 2012 में 376 रुपए में खरीदा था. एक विज्ञापन देखने के बाद उन्होंने इसे खरीदा था. इस विज्ञापन में अनूप मेनन कहते हैं कि अगर इस प्रॉडक्ट को 6 हफ्ते तक इस्तेमाल किया जाए तो बाल तेजी से बढ़ते हैं. बताए गए तरीके से क्रीम को इस्तेमाल किया. इसके बाद भी उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ. इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज कराई और 5 लाख रुपए मुआवजे की मांग की.
एक्टर ने माना, कभी प्रॉडक्ट यूज नहीं किया
एक्टर अनूप मेनन ने कंस्यूमर फोरम में माना कि उन्होंने कभी इस प्रॉडक्ट का इस्तेमाल नहीं किया. livelaw की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अनूप मेनन ने कहा कि मैं इस प्रोडक्ट का नहीं, बल्कि अपनी मां द्वारा तैयार किया गया हेयर ऑयल इस्तेमाल करता हूं. विज्ञापन में मैंने जो कहा, वो मैन्युफैक्चरर की स्टोरी थी. मुझे लगा कि यह प्रोडक्ट हेयर ग्रोथ नहीं बल्कि हेयर केयर के लिए है.

हेयर ऑयल कंपनी का विज्ञापन करने वाले एक्टर अनूप मेनन ने माना कि उन्होंने उस प्रोडक्ट का इस्तेमाल कभी नहीं किया, जिसका वो विज्ञापन करते हैं.
उपभोक्ता फोरम ने क्या कहा? कंस्यूमर फोरम ने अपने आदेश में कहा कि एक्टर के बयान से स्पष्ट है कि कंपनी के एंबेसडर ने इस प्रोडक्ट का इस्तेमाल नहीं किया है. विज्ञापन में किए गए वादे और प्रोडक्ट के इस्तेमाल करने पर रिजल्ट में अंतर है. प्रोडक्ट के साथ दी गई पर्ची में चेतावनी को इस प्रकार प्रिंट किया गया है कि उसे आराम से नहीं पढ़ा जा सकता. कोर्ट ने कहा कि इस शिकायत में आयुर्वेदिक दवा की प्रभावशीलता पर सवाल नहीं उठाया गया है. लेकिन असली सवाल यह है कि प्रोडक्ट इस्तेमाल करने के बाद विज्ञापन में किए गए दावे जैसा रिजल्ट मिला कि नहीं. इसी के साथ फोरम ने वडक्कन के फेवर में फैसला दिया.
बता दें कि भ्रामक विज्ञापन के लिए कोई भी कंस्यूमर कोर्ट में जाकर उसे चैलेंज कर सकता है. इसके लिए प्रोडक्ट को खरीदने की रसीद और सेवा में कमी का पूरा प्रूफ देना होता है. कंज्यूमर कोर्ट में केस लड़ने के लिए वकील लेने की जरूरत नहीं होती.

हेयर ऑयल कंपनी का विज्ञापन करने वाले एक्टर अनूप मेनन ने माना कि उन्होंने उस प्रोडक्ट का इस्तेमाल कभी नहीं किया, जिसका वो विज्ञापन करते हैं.
उपभोक्ता फोरम ने क्या कहा? कंस्यूमर फोरम ने अपने आदेश में कहा कि एक्टर के बयान से स्पष्ट है कि कंपनी के एंबेसडर ने इस प्रोडक्ट का इस्तेमाल नहीं किया है. विज्ञापन में किए गए वादे और प्रोडक्ट के इस्तेमाल करने पर रिजल्ट में अंतर है. प्रोडक्ट के साथ दी गई पर्ची में चेतावनी को इस प्रकार प्रिंट किया गया है कि उसे आराम से नहीं पढ़ा जा सकता. कोर्ट ने कहा कि इस शिकायत में आयुर्वेदिक दवा की प्रभावशीलता पर सवाल नहीं उठाया गया है. लेकिन असली सवाल यह है कि प्रोडक्ट इस्तेमाल करने के बाद विज्ञापन में किए गए दावे जैसा रिजल्ट मिला कि नहीं. इसी के साथ फोरम ने वडक्कन के फेवर में फैसला दिया.
बता दें कि भ्रामक विज्ञापन के लिए कोई भी कंस्यूमर कोर्ट में जाकर उसे चैलेंज कर सकता है. इसके लिए प्रोडक्ट को खरीदने की रसीद और सेवा में कमी का पूरा प्रूफ देना होता है. कंज्यूमर कोर्ट में केस लड़ने के लिए वकील लेने की जरूरत नहीं होती.

