कश्मीर में ही सारा बवाल मचा हुआ है. पाकिस्तान और भारत का बैटल ग्राउंड बने कश्मीरसे आने वाली हर खबर पर लगता है कि ये जरूर किसी आतंकी हमले या इंडिया के डिफेंसऑपरेशन की कोई खबर होगी. पर ये एक ऐसी खबर है जिसे पढ़कर दिल तो खुश हो ही जाता है,ये भी समझ आता है कि कश्मीरियत एक ऐसा लफ्ज है जो जितना खूबसूरत है, उतना हीमोहब्बत से भरा हुआ भी. और इतनी सारी परेशानियों के बीच भी कश्मीरियों ने उसे अपनेमिजाज में बनाए रखा है.दरअसल साउथ कश्मीर में लोसवानी नाम की जगह पर लोकल मुस्लिमों ने मिलकर एक हिंदूपंडित की शादी करवाई. सारा इंतजाम किया. टेंट गाड़े. पंडित परिवार के मेहमानों कास्वागत किया. और शादी में उन्हें खाना भी परोसा.कश्मीर में चल रहे सारे बवाल के बीच ये रेयर कश्मीरियत और मोहब्बत वाला माहौल देखनेको मिला है. ये किस्सा है दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के गांव तहाब के आशू टिकूऔर लासवानी गांव की नीशू पंडित की शादी की.ये बात तब सामने आई है, जब कश्मीर बड़े ही खराब माहौल से गुजर रहा है. 98 दिन वहांकर्फ्यू लगे हो चुके हैं. पत्थरबाजी, विरोध प्रदर्शन और पैलेट गन से चोट खाए लोगोंके जख्मों वाले कश्मीर से पिछले तीन महीनों से रोज ही कोई न कोई खराब खबर आ रही है.शादी में पहचानना मुश्किल था कि कौन हिंदू है, कौन मुस्लिम. पारंपरिक तरीके सेदूल्हा दुल्हन के घर करीब सवेरे 11 बजे पहुंचा. और शाम को 8 बजे वापस आया. शादी केदौरान दुल्हन के घर में मौजूद सारे ही लोग इंडियन थे, उनमें न तो कोई हिंदू था और नही मुसलमान. ऐसा इसलिए क्योंकि सारे इतने घुले-मिले थे कि उनकी पहचान अलग कर पानाअलग था.आशू और नीशू की शादी का सारा इंतजाम आस-पास के रहने वाले मुसलमानों ने किया.इन्होंने सारे कामों में हाथ बंटाया. मुसलमानों ने ही सारे टेंट-वेंट लगवाए.साफ-सफाई भी इन्होंने ही की. सारी घर की सजावट और आस-पास की सजावट भी इन्होंने हीकी.फोटो - अशरफ वानीकश्मीरी गानों से गूंज गई हवाये दिल को खुश कर देने वाला माहौल था. कश्मीरी गाने गाए जा रहे थे और लोग नाच रहेथे. ऐसे ही ये नाच-गाना दिन भर चला. इसमें शामिल होने के लिए कई औरतें जम्मू से आईथीं. दुल्हन का गांव लोसवानी इस सारे फंक्शन के लिए बड़ा एक्साइटेड था. मुस्लिम औरसिख कम्युनिटी के लोगों ने भी इस शादी में हिस्सा लिया. वो दूल्हे के लिए तैयारियांकरने में भी जुटे हुए थे.आदमी और औरतें के खाने का इंतजाम, टेंट का इंतजाम, लोगों का वेलकम करने का इंतजामऔर सजावट का सारा काम ये लोग ही कर रहे थे. पंडित परिवार के लोगों का स्वागत करतेभी ये लोग दिखे.पुराना भाईचारा आज भी जिंदादोनों ही जगहों पर मेंहदी की रात से पहले दोनों ही मजहबों की औरतों ने पूरी रात साथगाने गाते गुजारी. रात भर कश्मीरी गाने गाए गए. यहां तक कि पंडितों के जो गेस्ट थेवो भी जम्मू जैसे दूर के इलाकों से आए थे. और इस भाईचारे भरे फिजा में वक्त गुजारनेके बाद उन दूर से आए रिश्तेदारों ने अपने सरप्राइज एक्सपीरियेंस के बारे में बताया.ऊषा कुमारी जो जम्मू से आई थीं, उन्होंने कहा, मैं इस बात को देखकर चौंक गई थी किमुस्लिम औरतें हमारे साथ गाने गा रही थीं. मुस्लिम आदमियों ने ही ज्यादातर इंतजामकिया था. खाना खिलाने, टेंट लगाने का काम भी वही लोग कर रहे थे. मुझे ये देखकर यकीननहीं हो रहा था कि भाईचारे का पुराना ट्रेडिशन आज भी जिंदा है.यहां के पंडित और सिख भी हमारे ही भाई हैं'हम कभी इस बात को महसूस नहीं करते हैं कि वो दूसरे मजहब के हैं. ये लोग हमारे अपनेही आदमी हैं. हम यहां सदियों से साथ रह रहे हैं. इसलिए हम उनकी मदद करना जारीरखेंगे. इससे अलग मजहब से अलग हमारा प्यार इस बात की ताकीद करता है कि हम अपना फर्जनिभाएं और उनकी मदद करें.,' ये बात गुलाम मोहम्मद ने कही. जो कि वहीं के रहवासीमुस्लिम हैं.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें -पाकिस्तान ने माना, उसके कब्जे में हैं चंदू बाबूलाल चौहानPOK दहल उठा था और मारे गए 87 हजार से भी ज्यादा लोगकश्मीरी लड़कों ने बचाई जवान की जान, अमन जिंदाबाद!पता चल गया, नवाज शरीफ को बुरहान वानी की याद इत्ता क्यों सता रही हैभारत-पाक टेंशन में ये बुजुर्ग शायर जो खोज रहा है, उसे आप भी खोजने निकल पड़ेंगे