जब से बुरहान वानी को इंडियन आर्मी ने मारा है, तब से कश्मीर बंद है. पहले 60 दिनलगातार कर्फ्यू रहा, फिर हुर्रियत ने बंद करवाया. बाजार, दुकानों के साथस्कूल-कॉलेज भी बंद हैं. सिर्फ एक स्कूल को छोड़कर. सिर्फ एक स्कूल में एग्जाम होसके. वो इसलिए क्योंकि इस स्कूल में हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी की पोतीपढ़ती है. गिलानी ही आज-कल कश्मीर को बंद और खुला रखने का फैसला ले रहे हैं औरसरकार के समांतर उनकी सत्ता चल रही है. उन्होंने सारे स्कूल बंद करवाए, लेकिनएग्जाम के दिन सिर्फ उस स्कूल को खुलवाए रखा, जिसमें उनकी पोती पढ़ती है. अंग्रेजीअखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' के मुताबिक, श्रीनगर के दिल्ली पब्लिक स्कूल यानी DPS में573 बच्चों ने परीक्षा दी. अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की पोती भी इसीस्कूल में 10वीं क्लास की स्टूडेंट है. जानकारी के अनुसार स्कूल ने हाई सिक्योरिटीके बीच 1 से 5 अक्टूबर तक अपने इंटरनल इग्जाम करवाए. वो भी एक इंडोर स्टेडियम में.बाहर आर्मी बच्चों की सिक्योरिटी में तैनात थी, 8 जुलाई को वानी की मौत हुई थी. तबसे घाटी के सारे सरकारी और प्राइवेट स्कूल लगातार 111 दिन तक बंद रहे. हुर्रियतप्रोटेस्ट इसका एक रीजन था तो करीब दो महीनों के लिए सरकारी कर्फ्यू भी लगा रहा. इसस्कूल को खोलने के पीछे का रीजन पता किया गया तो अथॉरिटी ने कहा कि कर्फ्यू तोड़नेऔर बच्चों को स्कूल में वापस लाने के एक कदम के रूप में ये काम किया गया. यानी वादाथा कि स्कूल खुलेंगे और सारे स्टूडेंट्स के इग्जाम राइट टाइम से होंगे. हालांकि कुछबच्चों और पेरेंट्स ने इस बात का विरोध किया और कहा कि घाटी में जो सिचुएशन पिछलेदिनों रही हैं, उनके चलते कुछ दिन का वक्त तैयारी के लिए दिया जाना चाहिए. वैसेपिछले तीन हफ्तों में कश्मीर के कई सरकारी स्कूलों में आग लगा दी गई है. किसनेलगाई, पता भी नहीं चला. हालांकि हुर्रियत नेता के बेटे नईम तहरीक-ए-हुर्रियतकश्मीर के मेंबर नहीं हैं. और वो गिलानी से अलग ही रहते हैं. श्रीनगर में. नईम नेइंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कंफर्म किया कि मेरी बेटी DPS के इग्जाम में शामिलहुई. और किसने कहा कि हम स्टूडेंट्स के परीक्षा में शामिल होने या स्कूल जाने केखिलाफ हैं? हम कभी इग्जाम कराने और स्टूडेंट्स के पढ़ने के खिलाफ नहीं रहे हैं. एकबार स्कूल ने इग्जाम कराने का फैसला ले लिया तो ये मेरी बेटी पर भी लागू होता है.जैसा कि दूसरे स्टूडेंट्स पर. 70 फीसदी नंबर इंटर्नल इग्जाम से आते हैं. और अगरमेरी बेटी ने ये इग्जाम पास न किए तो अगले मार्च में होने वाले फाइनल इग्जाम मेंइसको बैठने नहीं दिया जाएगा. प्रिंसिपल विजय धर ने कहा, अलगाववादियों ने जो बंद केदौरान रिलेक्शेसन टाइम दिया था, उसमें स्कूल मैनेजमेंट ने किसी दूसरी जगह पर इग्जामकराने का डिसीजन लिया. फिर आखिर में वेन्यू के तौर पर इंडोर स्टेडियम को चुना गया.9वीं और 10वीं क्लास में कुल मिलाकर 580 स्टूडेंट हैं. वैसे विजय धर, DP धर के बेटेहैं. DP धर एक डिप्लोमेट थे. और उनके गांधी-नेहरू परिवार से बहुत ही गहरे संबंध थे.धर ने बताया, छोटी क्लास के स्टूडेंट्स को क्वेश्चन पेपर भेजा गया और स्टूडेंट्स केपेरेंट्स से कहा गया कि वो घर पर ही इग्जाम ले लें. ये ही सबसे सही मौजूद विकल्पथा. इसके बाद पेरेंट्स ने जो कॉपी चेक करके भेजी थी, बाद में उसे टीचर्स ने भीजांचा. इंडोर स्टेडियम को चुने जाने के पीछे रीजन ये था कि ये कश्मीर के बीचों-बीचपड़ता है और किसी बुरी खबर के आने पर पेरेंट्स और बच्चे बिना किसी ट्रांस्पोर्टऑप्शन के भी आसानी से घर पहुंच सकते हैं. वैसे DPS ही एकमात्र ऐसा स्कूल है जो ऐसेइग्जाम करवा रहा है. इसके अलाावा हाल ही में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ने भी फाइनलइग्जाम के इंटर्नल टेस्ट करवाए थे. सेंट्रल यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने बताया किकई घायल हुए स्टूडेंट्स को तो हम एंबुलेंस में भी लेकर आए थे कि उनका एक साल जाया नजाए. ये सेंट्रल यूनिवर्सिटी साइंस और टेक्नोलॉजी की है, जो कि साउथ कश्मीर में है.यूनिवर्सिटी में ही काम करने वाले एक शख्स ने बताया कि टेस्ट स्टूडेंट्स की मांग केबाद कराए गए थे.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें -मिलिए पाकिस्तान के सबसे बड़े देशद्रोही से!'भाई की शहादत का बदला लूंगा पाकिस्तान से'POK दहल उठा था और मारे गए 87 हजार से भी ज्यादा लोगकश्मीर में मुसलमानों ने मिलकर कराई एक पंडित की शादीरोग नेशन: पाकिस्तान की वो कहानी, जो पूरी सुनाई नहीं जातीउमर अब्दुल्ला को अमेरिकी एअरपोर्ट पर रोका, उन्होंने चुटकुला सुना दिया