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'ये कंपनियां गुलाम बनाना चाहती हैं... ' 14 घंटे काम वाले प्रस्ताव पर IT कर्मचारियों ने खूब खरी-खरी सुनाई है

कर्नाटक स्टेट आईटी एम्प्लॉयी यूनियन (KITU) ने सिद्दारमैया सरकार से IT/ITeS/BPO सेक्टर में काम के घंटे बढ़ाने के प्रस्ताव पर फिर से विचार करने की बात कही. KITU ने कंपनियों को इस प्रस्ताव के लिए बुरी तरह सुनाया भी है.

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22 जुलाई 2024 (पब्लिश्ड: 12:28 PM IST)
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यूनियन ने कर्मचारियों की मेंटल हेल्थ पर भी चिंता जताई है (सांकेतिक तस्वीर)
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बात तब की है जब भारत पर विदेशी हुकूमत का शासन था. देश में बड़ा मजदूर वर्ग हफ्ते में सातों दिन काम करता था. कुछ को लंच करने का समय भी नहीं मिल पाता था. फिर बड़ी मशक्कत के बाद, कहीं जाकर उन्हें रविवार की छुट्टी मिली. फिर बड़े संघर्ष के बाद काम के घंटों को भी कम किया गया. वो इसलिए क्योंकि इंसानी शरीर की भी एक सीमा है. अब खबर है कि कर्नाटक में IT कंपनियों में काम के घंटे बढ़ाने की बात चल रही है. जिसे कर्मचारियों की यूनियन (KITU) ने गुलाम बनाने का कदम बताया है.

कर्नाटक स्टेट आईटी एम्प्लॉयी यूनियन (KITU) ने सिद्दारमैया सरकार से IT/ITeS/BPO सेक्टर में काम के घंटे बढ़ाने के प्रस्ताव पर फिर से विचार करने की बात कही है. कथित तौर पर कहा जा रहा है कि कर्नाटक सरकार इन सेक्टर में 14 घंटे काम करने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के बारे में सोच रही है.

ये भी पढ़ें: तो अब IT वालों को 14 घंटे काम करना पड़ेगा? कंपनियों ने सरकार से मांग की, कर्मचारी परेशान!

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, राज्य के श्रम मंत्री संतोष एस लाड ने हाल ही में लेबर और IT-BT डिपार्टमेंट के लोगों के साथ काम के घंटों को बढ़ाने को लेकर एक मीटिंग की थी. जिसके बाद KITU का यह बयान आया है.

गुलाम बनाने वाला कदम!

बकौल KITU देश का कानून, ज्यादा से ज्यादा 10 घंटे काम करने की इजाजत देता है. वो भी ओवर टाइम मिला कर. जिसे बढ़ाने की मांग कंपनियों ने की है. यूनियन का ये भी कहना है कि काम के घंटे बढ़ाने की वजह से तीन शिफ्ट की जगह कंपनियां दो शिफ्ट में काम करेंगी. जिसकी वजह से एक-तिहाई कर्मचारियों की नौकरियों पर भी असर पड़ सकता है. 

इस पर कर्मचारियों की मेंटल हेल्थ और डिप्रेशन पर पड़ने वाले असर की बात भी की गई. कुछ रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए KITU ने कहा है कि IT सेक्टर में काम करने वाले 45 फीसदी कर्मचारी मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याओं का सामना करते हैं. वहीं 55 फीसदी डिप्रेशन और शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं का सामना करते हैं. कहा कि काम के घंटे बढ़ाने से यह समस्या और बढ़ेगी ही. 

KITU ने तंज कसते हुए कहा है कि शायद कंपनियां कर्मचारियों के स्वास्थ्य के बारे में ही सोच रही होंगी, जिससे 14 घंटा काम करने के बाद मेंटल हेल्थ के बारे में सोचने का टाइम ही न मिले. KITU ने सभी कर्मचारियों से इस प्रस्ताव का विरोध करने की अपील की है.

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