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हाई कोर्ट ने अदालती सुनवाई के वीडियो शेयर करने पर रोक लगाई, लेकिन क्यों?

Karnataka High Court ने ये भी कहा कि कोर्ट प्रोसिडिंग्स की लाइव स्ट्रीमिंग रोकना, इसके दुरुपयोग की समस्या का समाधान नहीं है.

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24 सितंबर 2024 (अपडेटेड: 25 सितंबर 2024, 07:20 PM IST)
Karnataka High Court
कोर्ट ने ये अंतरिम आदेश एडवोकेट एसोसिएशन बेंगलुरु की एक याचिका पर दिया है. (फोटो: आजतक)
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कर्नाटक हाई कोर्ट ने कोर्ट प्रोसिडिंग्स यानी अदालती कार्यवाही के लाइव स्ट्रीम के वीडियो अनधिकृत रूप से शेयर करने पर रोक लगाई है. हाई कोर्ट ने मंगलवार, 24 सितंबर को ये प्रतिबंध सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और कुछ चैनलों पर लगाया है.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस हेमंत चंदनगौदर की सिंगल जज बेंच ने कहा,

"अगली तारीख तक रेस्पॉन्डेंट R6 से R8 (यूट्यूब, फेसबुक और X) को (कोर्ट प्रोसिडिंग्स के) लाइव स्ट्रीम किए गए वीडियो शेयर करने से रोका जाता है. रेस्पॉन्डेंट R9 से R13 (कुछ मीडिया एजेंसियों) को अपने चैनलों पर वीडियो दिखाने से रोका जाता है. यूट्यूब, फेसबुक और X को लाइव स्ट्रीम के उन वीडियोज को हटाने का निर्देश दिया जाता है, जिन्हें नियमों का उल्लंघन करते हुए पोस्ट किया गया."

कोर्ट ने ये अंतरिम आदेश एडवोकेट एसोसिएशन बेंगलुरु की एक याचिका पर दिया है. ये याचिका पब्लिक में, खासकर सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा कोर्ट प्रोसिडिंग्स की लाइव स्ट्रीम वीडियोज के इस्तेमाल के खिलाफ दायर की गई है.

ये याचिका कर्नाटक हाई कोर्ट के जज जस्टिस वी श्रीशानंद के दो वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर आने के बाद दायर की गई थी. एक वीडियो में जस्टिस वी श्रीशानंद बेंगलुरु के एक इलाके को 'पाकिस्तान' कहते नज़र आए थे. दूसरे वीडियो में वे एक महिला वकील के लिए कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते नज़र आए थे.

ये भी पढ़ें- बच्चों के पॉर्न वीडियो देखना, डाउनलोड करना अपराध... सुप्रीम कोर्ट ने पलटा मद्रास हाई कोर्ट का फैसला

इसके बाद एडवोकेट एसोसिएशन ने कोर्ट प्रोसिडिंग्स की लाइव स्ट्रीमिंग रोकने की मांग की थी. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक एसोसिएशन ने कर्नाटक हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को खत लिखा था. ये मांग की थी कि लाइव-स्ट्रीमिंग को कम से कम तब तक रोका जाना चाहिए, जब तक कि खुली अदालत में क्या कहा जा सकता है, इस पर अधिक जागरूकता और सहमति न बन जाए.

एसोसिएशन ने सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग से वीडियो एडिट कर या अवैध रूप से इनके इस्तेमाल पर रोक के लिए निर्देश मांगा था. ये भी मांग की गई थी कि YouTube, Facebook, X और दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कोर्ट प्रोसिडिंग्स के फुटेज हटाने का निर्देश दिया जाए.

रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस हेमंत चंदनगौदर ने फेसबुक, X और यूट्यूब को आदेश दिया है कि किसी को भी ऐसे वीडियो अपलोड करने की मंजूरी न दी जाए. हालांकि, कोर्ट ने ये भी कहा कि कोर्ट प्रोसिडिंग्स की लाइव स्ट्रीमिंग रोकना सुनवाई के वीडियो के दुरुपयोग का समाधान नहीं है. जस्टिस चंदनगौदर ने कहा कि किसी भी दुरुपयोग को जजों के संज्ञान में लाया जा सकता है.

वीडियो: चाइल्ड पोर्नोग्राफी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट का फैसला बदला, ये हैं नए नियम

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