हिजाब में आई छात्राओं को 'धूप में खड़ा रखा' था, अब सरकार ने बेस्ट प्रिंसिपल अवॉर्ड रोक लिया
रामकृष्ण पर आरोप है कि जब राज्य में हिजाब विवाद चरम पर था, तब उन्होंने हिजाब पहनी मुस्लिम छात्राओं को धूप में खड़े रहने के लिए कहा था.

कर्नाटक के उडुपी के कुंदापुर सरकारी इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल हैं, रामकृष्ण. राज्य सरकार उन्हें टीचर्स डे के दिन 'बेस्ट प्रिंसिपल' का अवॉर्ड देने वाली थी. लेकिन नहीं दिया. कारण? राज्य में ढाई साल पहले हुआ हिजाब विवाद. आरोप है कि उस दौरान रामकृष्ण ने कॉलेज में हिजाब पहन कर आई छात्राओं को धूप में खड़ा कर दिया था.
हिजाब विवाद से अवॉर्ड का क्या नाता?कर्नाटक सरकार ने सरकारी स्कूलों और प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों के 41 शिक्षकों, प्रिंसिपल्स और लेक्चरर्स की लिस्ट बनाई थी, कि शिक्षक दिवस (5 सितंबर) के मौक़े पर उन्हें अवॉर्ड दिए जाएंगे. मैसूर ज़िले के हुनसुर पीयू कॉलेज के प्रिंसिपल रामकृष्ण और ए रामे गौड़ा को 'बेस्ट प्रिंसिपल' पुरस्कार के लिए चुना गया था.
लेकिन रामकृष्ण पर आरोप है कि जब राज्य में हिजाब विवाद चरम पर था, तब उन्होंने हिजाब पहनी मुस्लिम छात्राओं को ‘धूप में खड़े’ रहने के लिए कहा था.
संदर्भ: दिसंबर, 2021 में उडुपी शहर के एक सरकारी स्कूल में कुछ मुसलमान छात्राओं को हिजाब पहनने की वजह से स्कूल में बैठने की इजाज़त नहीं दी गई. इस दलील के साथ कि धार्मिक पोशाक की वजह से एकरूपता कम होती है. इससे विवाद पैदा हुआ, जो बाद में पूरे सूबे में फैल गया. प्रदर्शन हुए; प्रदर्शन के विरोध में प्रदर्शन हुए. इसके बाद तत्कालीन बीजेपी सरकार ने स्कूलों में सभी धार्मिक परिधानों पर बैन लगा दिया. मामला अदालत में गया. कर्नाटक हाई कोर्ट ने बैन को बरक़रार रखा. लेकिन जैसे ही राज्य की सत्ता में कांग्रेस आई, तो 2023 के दिसंबर में इस बैन को हटा दिया गया.
इसी विवाद के बीच कथित तौर पर कुंदापुर पीयू कॉलेज में कम से कम 28 छात्राओं को क्लास में बैठने की अनुमति नहीं दी गई थी, क्योंकि उन्होंने हिजाब पहना हुआ था.
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इसलिए 'बेस्ट प्रिंसिपल' अवॉर्ड के लिए रामकृष्ण को चुने जाने की कई लोगों ने आलोचना की. सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) ने रामकृष्ण के चयन पर कड़ी आपत्ति जताई. कहा कि एक प्रिंसिपल, जिसने मुस्लिम छात्रों को हिजाब के ऊपर धूप में खड़े रहने के लिए मजबूर किया, उसे ऐसा पुरस्कार पाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है.
कहा जा रहा है कि इन आपत्तियों के बाद सरकार ने अपना फ़ैसला वापस ले लिया है. हालांकि, रामकृष्ण ने बताया कि पुरस्कार वापस नहीं लिया गया है; तकनीकी समस्याओं के चलते देरी हो रही है. उन्होंने ये भी कहा कि शिक्षा विभाग ने पुरस्कार को रोकने की सही वजह नहीं बताई.
उधर, शिक्षा मंत्री मधु बंगरप्पा का कहना है कि इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए. उन्होंने मीडिया से कहा कि मामले का पता चलने के बाद, उन्होंने अस्थायी रूप से पुरस्कार को रोक दिया है. वो पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं. साथ ही कहा, “चिंता का विषय ये है कि उन्होंने बच्चों के साथ कैसा व्यवहार किया.”
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