करन जौहर, वरुण धवन को बधाई, वो आज महान जो बन गए हैं
खुद बोलें तो मजाक, कंगना रनोट बोलें तो बड़बोलापन. वाह!
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आईफा अवॉर्ड शो में कंगना का मज़ाक उड़ाया गया.
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धीमे बोलो, धीमे चलो, धीमे बरतन उठाओ, धीमे हंसो, रोओ भी धीमी आवाज़ में. और तो और पेशाब भी करो तो आवाज़ न आए. ये पाबंदियां तोड़ दीं. अच्छा! चलो ठीक है. बाहर जाओ. काम भी कर लो. लेकिन टीचर ही बनना. सेफ रहता है. अच्छा डॉक्टर, इंजीनियर बन जाओ. हंय?? एक्ट्रेस बनोगी? बनना तो सिर्फ काम से काम रखना. टीका-टिप्पणी करना तुम्हारा काम नहीं. काम क्या तुम्हें हक़ ही नहीं. समझी?
कंगना नहीं समझी. वो न टीचर बनीं न डॉक्टर. घरवालों से लड़कर मुंबई आईं. 'गैंगस्टर' जैसी बोल्ड फिल्म से शुरुआत की. 'क्वीन', 'तनु वेड्स मनु' जैसी फिल्मों से अपनी धाक जमाई. काम का लोहा भी मनवाया और टिप्पणी करने से भी 'बाज़' नहीं आतीं. इतनी 'हिमाकत' करने के बाद 'समाज' उन्हें माफ़ कैसे कर सकता है. वो कैसे किसी को कुछ कह सकती हैं. उनकी बोलती तो बंद करा ही देनी चाहिए. ठीक यही काम किया है करण जौहर ने. और जब लोगों ने सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल करना शुरू किया तो झट से माफी मांग ली.
करण ने एनडीटीवी से बात करते हुए कहा,
'मैं पूरी तरह इस बात पर विश्वास करता हूं कि परिवारवाद काम नहीं करता. अगर कुछ मायने रखता है तो वह है सिर्फ टैलेंट, मेहनत और समर्पण. जो हमने कहा था, वह सिर्फ मजाक था और मुझे लगता है वह गलत जगह पर, गलत तरीके से ले लिया गया. मुझे इसका दुख है.'इससे पहले वरुण ने ट्वीट कर माफी मांग ली थी,
'मेरी हरकत से किसी को भी दुख पहुंचा मैं उसके लिए माफी चाहता हूं.'


