ये कैसी राष्ट्रभक्ति: बेकरी के नाम से कराची हटवाने वाले भूल गए कि ये भी हिंदुस्तानी है
बेकरी वाले को तिरंगा लगाकर जताना पड़ा कि वो दिल से हिंदुस्तानी है.
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बेंग्लुरू में है ये कराची बेकरी.
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14 फरवरी को श्रीनगर के पास पुलवामा में आतंकी हमला हुआ. 40 सीआरपीएफ जवानों की जान गई. देश भर में पाकिस्तान के विरोध में आवाजें उठने लगीं. पाकिस्तान से हर तरह के ताल्लुकात खत्म करने की बात बड़े स्तर पर होने लगी. पाकिस्तानी चीजों और लोगों का विरोध होने लगा. इसी कड़ी में एक मूर्खतापूर्ण चीज भी सामने आई है. मूर्खता ये कि देशभक्ति के नाम पर बेंग्लुरू की कराची बेकरी को बंद करने का दबाव बनाया जा रहा है.
द वीक में छपी एक खरब के मुताबिक हुआ ये कि 22 फरवरी को बेंग्लुरू के इंदिरानगर में कराची बेकरी में करीब 20 लोगों की भीड़ उमड़ी और सब लोग कराची बेकरी के कराची को एकटक लगाकर देखने लगे. उन्होंने इस बेकरी का नाम बदलने के लिए मालिक पर दबाव बनाना शुरू किया. यहां नारेबाजी भी हुई. अब भीड़ के गुस्से को देखते हुए बेकरी मालिक ने अपने जान माल की सुरक्षा के लिए कराची बेकरी के बोर्ड से कराची शब्द को ढक दिया. साथ में उन्होंने दुकान के बाहर तिरंगा भी लगा दिया. साथ में एक स्टेटमेंट भी बेकरी की तरफ से जारी की गई जिसमें उन्होंने इस बेकरी की पृष्ठभूमि के बारे में बताया है.
कहा ."ये बेकरी लो 1953 में पाकिस्तान के सिंध से हैदराबाद आकर बसे खानचंद रामनामी परिवार से स्थापित की थी. ये एक इंडियन ब्रैंड है और इसके प्रोडक्ट्स को इंडिया और विदेशों में पसंद किया जाता है. ये दिल से इंडियन है और हमेशा इंडियन रहेगी. हम किसी भी तरह की भ्रामक अफवाहों से बचने की गुजारिश करते हैं. "
ये बेकरी आइटम्स के लिए काफी फेमस है. अब जब सोशल मीडिया पर ये खबर फैली तो लोग कराची बेकरी के बारे में अपनी अपनी राय देने लगे. ऐसे ही एक ट्विटर यूजर अनुराग सक्सेना ने ट्वीट करके लिखा कि मेरा परिवार सौ फीसदी शाकाहारी है और यहां तक कि हम लोग प्याज और लहसुन भी नहीं खाते हैं, मगर हम लोग केक और कुकीज के लिए हमेशा कराची बेकरी ही जाते हैं. बेकरी के मालिक सिंधी हैं जो बंटवारे के वक्त इंडिया आ गए थे. इसलिए देशभक्तों को अपना गुस्सा सही जगह निकालने की जरूरत है. वहीं कई दूसरे लोगों ने कहा कि कराची शहर कभी इंडिया का हिस्सा था. वहां बसने वाले हिंदू सिंधी पार्टिशन के वक्त इंडिया आ गए और साथ में वहां का कल्चर और बोलचाल लेकर आए. कभी उनका घर रहे उस शहर के नाम पर अपनी बेकरी का नाम रखना कोई गलत नहीं है.
अगर पाकिस्तान का विरोध इन्हीं छिछली और हल्की चीजों पर करना है तो फिर आगे आने वाले वक्त में कहीं लाहौरी चिकन, मुल्तानी मिट्टी और पाकिस्तानी के पंजाब से आने वाले सेंधा नमक के नाम भी बदलने पड़ेंगे. कहने का मतलब यही है कि ये कहीं जाकर नहीं रुकेगा. इन चीजों पर होने वाला विरोध खोखला है और इनसे इंडिया के लोगों को बचना चाहिए.
कहा ."ये बेकरी लो 1953 में पाकिस्तान के सिंध से हैदराबाद आकर बसे खानचंद रामनामी परिवार से स्थापित की थी. ये एक इंडियन ब्रैंड है और इसके प्रोडक्ट्स को इंडिया और विदेशों में पसंद किया जाता है. ये दिल से इंडियन है और हमेशा इंडियन रहेगी. हम किसी भी तरह की भ्रामक अफवाहों से बचने की गुजारिश करते हैं. "
ये बेकरी आइटम्स के लिए काफी फेमस है. अब जब सोशल मीडिया पर ये खबर फैली तो लोग कराची बेकरी के बारे में अपनी अपनी राय देने लगे. ऐसे ही एक ट्विटर यूजर अनुराग सक्सेना ने ट्वीट करके लिखा कि मेरा परिवार सौ फीसदी शाकाहारी है और यहां तक कि हम लोग प्याज और लहसुन भी नहीं खाते हैं, मगर हम लोग केक और कुकीज के लिए हमेशा कराची बेकरी ही जाते हैं. बेकरी के मालिक सिंधी हैं जो बंटवारे के वक्त इंडिया आ गए थे. इसलिए देशभक्तों को अपना गुस्सा सही जगह निकालने की जरूरत है. वहीं कई दूसरे लोगों ने कहा कि कराची शहर कभी इंडिया का हिस्सा था. वहां बसने वाले हिंदू सिंधी पार्टिशन के वक्त इंडिया आ गए और साथ में वहां का कल्चर और बोलचाल लेकर आए. कभी उनका घर रहे उस शहर के नाम पर अपनी बेकरी का नाम रखना कोई गलत नहीं है.
अगर पाकिस्तान का विरोध इन्हीं छिछली और हल्की चीजों पर करना है तो फिर आगे आने वाले वक्त में कहीं लाहौरी चिकन, मुल्तानी मिट्टी और पाकिस्तानी के पंजाब से आने वाले सेंधा नमक के नाम भी बदलने पड़ेंगे. कहने का मतलब यही है कि ये कहीं जाकर नहीं रुकेगा. इन चीजों पर होने वाला विरोध खोखला है और इनसे इंडिया के लोगों को बचना चाहिए.
