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NDA को 'नरेंद्र दामोदर मोदी का अनुशासन' बताने वाले शंकराचार्य के बारे में कितना जानते हैं?

विजयेंद्र सरस्वती कांची मठ के 70वें शंकराचार्य हैं. मात्र 14 साल की उम्र में इन्होंने संन्यास ले लिया था.

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21 अक्तूबर 2024 (अपडेटेड: 21 अक्तूबर 2024, 11:15 PM IST)
Shankaracharya Vijayendra Saraswati
प्रधानमंत्री के साथ कांची पीठ के शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती. (PTI)
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'नरेंद्र दामोदर दास मोदी पर ईश्वर की कृपा है और इनकी सरकार 'NDA' (का मतलब) नरेंद्र दामोदर दास का अनुशासन है.'

ये बयान है कांची कामकोटि पीठ के शंकराचार्य शंकर विजयेंद्र सरस्वती का. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अक्टूबर को वाराणसी में आरजे शंकर नेत्र चिकित्सालय का उद्घाटन किया. इसी दौरान शंकराचार्य ने पीएम मोदी की तारीफ में कसीदे पढ़े. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी आम आदमी की दिक्कतों को समझते हैं, इसलिए उन्हें खत्म करने के लिए काम करते हैं. शंकराचार्य ने कहा कि NDA सरकार वैश्विक स्तर पर शासन का एक आदर्श उदाहरण है, जिसे अन्य देश भी अपनाने की कोशिश कर रहे हैं.

कौन हैं पीएम मोदी की तारीफ करने वाले शंकराचार्य?

विजयेंद्र सरस्वती कांची मठ के 70वें शंकराचार्य हैं. विजयेंद्र, जयेन्द्र सरस्वती के शिष्य थे. शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती के निधन के बाद मार्च, 2018 विजयेंद्र कांची कामकोटि के पीठाधिपति बने. पीठ के प्रमुख को शंकराचार्य की उपाधि दी जाती है.

विजयेंद्र के बचपन का नाम शंकरनारायणन है. इनका जन्म 1969 में कांचीपुरम के करीब थंडलम में हुआ था. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक इनके पिता कृष्णमूर्ति शास्त्री वेदों के अच्छे जानकार थे. वो तमिलनाडु के पोलूर के एक वैदिक स्कूल में ऋग्वेद पढ़ाते थे. मात्र 14 साल की उम्र शंकरनारायण ने संन्यास ले लिया था. और 1983 में ही जयेंद्र सरस्वती को अपना गुरु मान लिया. जयेन्द्र सरस्वती ने इन्हें शिष्य के रूप में स्वीकार किया और उत्तराधिकारी घोषित कर इन्हें शंकर विजयेंद्र सरस्वती का नाम भी दिया.

गुरु पर हत्या का आरोप लगा, बरी हुए

नवंबर, 2004 में तत्कालीन शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती पर कांची मठ के प्रबंधक शंकररमण की हत्या का आरोप लगा था. शंकररमण की हत्या 3 सितंबर, 2004 को मंदिर परिसर में की गई थी. तमिलनाडु पुलिस ने जयेंद्र सरस्वती को 11 नवंबर, 2004 को हैदराबाद में गिरफ़्तार कर लिया. इसके बाद 2005 में विजयेंद्र सरस्वती को भी इसी आरोप में गिरफ़्तार किया गया. 10 जनवरी, 2005 को सुप्रीम कोर्ट ने तब के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को जमानत दे दी. ठीक एक महीने बाद विजयेंद्र सरस्वती को भी बेल मिल गई. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक मामले की सुनवाई 2009 में शुरू हुई, जिसमें कोर्ट में 189 गवाहों को प्रस्तुत किया गया था. लेकिन सबूतों के अभाव के चलते सभी आरोपियों को पुदुचेरी कोर्ट ने 13 नवंबर, 2013 को बरी कर दिया.

मठ को लेकर विवाद

kamakoti.org के मुताबिक इस पीठ की स्थापना 482 ईसा पूर्व में की गई थी. वेबसाइट के मुताबिक मठ की शुरुआत स्वयं आदिगुरु शंकराचार्य ने की थी. हालांकि, यह एक विवादित विषय है. कर्नाटक का श्रींगेरी मठ कहता है कि आदिशंकर का जन्म केरल के कलडी में 788 ईसा पूर्व के आसपास हुआ था. इस मठ के अनुसार आदिशंकर ने ही चार अलग-अलग दिशाओं में चार मठों की स्थापना की थी. ओडिशा (पूर्व) में गोवर्धन मठ, कर्नाटक (दक्षिण) में श्रींगेरी मठ, द्वारका (पश्चिम) में कालिका मठ और बद्रिकाश्रम (उत्तर) में ज्योतिर्मठ. ये चार मठ चारों वेदों का प्रतिनिधित्व भी करते हैं.

वीडियो: ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने पीएम मोदी का नाम लेकर क्या कहा?

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