The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • kamman soil of tamilnadu for the soft landing test of chandrayaan 3

चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग तमिलनाडु की इस मिट्टी ने तय कर दी थी

तमिलनाडु के बेटों ने ही नहीं, राज्य की धरती ने भी चंद्रमा मिशन में योगदान दिया है.

Advertisement
pic
23 अगस्त 2023 (अपडेटेड: 24 अगस्त 2023, 11:43 AM IST)
kamman soil of tamilnadu for the soft landing test of chandrayaan-3
तमिलनाडु की मिट्टी में ही टेस्ट और प्रैक्टिस के बदौलत आज भारत चांद पर है. (तस्वीरें: इसरो और Unsplash.com)
Quick AI Highlights
Click here to view more

Son and soil. अंग्रेजी के दो शब्द. पहले का अर्थ बेटा और दूसरे का माटी. एक राज्य है, जिसके बेटों और माटी की बदौलत भारत चांद पर पहुंचने में कामयाब रहा. ये राज्य है तमिलनाडु. जिसके न केवल बेटों, बल्कि मिट्टी का भी चंद्रयान मिशन की सफलता के पीछे हाथ है. ये तमिलनाडु की माटी ही थी, जिसके चलते चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग हो सकी है. क्या है तमिलनाडु की के बेटों और माटी का चंद्रयान-3 कनेक्शन. आइए जानते हैं.

- डॉ एपीजे अब्दुल कलाम 
- चंद्रयान-2 मिशन के निदेशक मयिलसामी अन्नादुराई 
- चंद्रयान-3 के परियोजना निदेशक पी वीरमुथुवेल

यही वे नाम हैं जिन्होंने चंदा मामा को दूर के नहीं, एक टूर के बना दिया है. भारत को चांद पर पहुंचाने में भूमिका अदा करने वाले ये तीनों वैज्ञानिक तमिलनाडु के बेटे हैं. अब मिट्टी के योगदान पर बात कर लेते हैं.

चांद का चक्कर लगाने से लैंडिंग तक

कहानी शुरू होती है साल 2004 से. ISRO के वैज्ञानिक तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ कलाम को एक प्रेजेंटेशन देने के लिए मिले. ये भारत के चंद्र मिशन का प्रेजेंटेशन था. मिशन का नाम था "चंद्रयान-1". वैज्ञानिकों ने डॉ कलाम को बताया कि भारत चांद से 100 किमी की दूरी पर परिक्रमा करने वाला एक सैटेलाइट लॉन्च करने जा रहा है. पूर्व राष्ट्रपति ने चंद्रयान-1 के निदेशक मयिलसामी अन्नादुराई से पूछा, 

“जब आपका स्पेसक्राफ्ट चांद के इतने करीब तक जा रहा है तो हम चांद पर लैंड क्यों नहीं करते?” 

कलाम के इस सवाल के बाद भारत के चंद्र मिशन का नजरिया बदल गया. चंद्रयान-1 के बाद चंद्रयान-2 का लक्ष्य चांद की सतह पर उतरना था. पिछली बार हम थोड़ा चूक गए थे. लेकिन इस बार भारत चांद पर है. चंद्रयान-3 सफलतापूर्वक चांद की जमीन पर लैंड कर चुका है. इस लैंडिंग से पहले इसकी प्रैक्टिस होनी थी. धरती पर चांद जैसी माटी में. और ये माटी थी तमिलनाडु के पास.

धरती पर चांद जैसी माटी

तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से 400 किमी दूर एक जिला है. नाम, नमक्कल. बताया जाता है कि तमिलनाडु के इस जिले की माटी ठीक वैसी है जैसी चांद पर पाई जाती है. साल 2012 से यहां की मिट्टी चंद्रयान के लैंडिंग टेस्ट के लिए भेजी जाती रही है. इससे चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग के लिए लैंडर मॉड्यूल की क्षमता-परीक्षण और उसमें सुधार के प्रयोग किए जाते रहे हैं. द हिन्दू से बात करते हुए पेरियार विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग के निदेशक, प्रोफेसर एस. अंबाझगन ने बताया,

“तमिलनाडु के नमक्कल में उस प्रकार की मिट्टी है, जैसी चंद्रमा की सतह पर मौजूद है. ये मिट्टी विशेष रूप से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद मिट्टी के समान है. चंद्रमा की सतह पर 'एनोर्थोसाइट' (एक प्रकार की अग्नेय चट्टान से बनी मिट्टी) टाइप की मिट्टी है. यह मिट्टी नमक्कल क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में है. ISRO को जब जरुरत पड़ी है, यहां से मिट्टी की आपूर्ति की गई है.”

प्रो. अंबाझगन ने बताया कि अभी तक ISRO को नमक्कल से लगभग 50 टन मिट्टी पहुंचाई जा चुकी है. ये तीसरा मौका था, जब नमक्कल से चंद्रयान के लिए मिट्टी की आपूर्ति की गई.

कैसे काम आई नमक्कल की माटी?

ISRO के वैज्ञानिकों ने पूरे देश में चांद की मिट्टी के नमूने के आधार पर सॉइल टेस्ट किए. वैज्ञानिक ये देखना चाहते थे कि भारत के किस हिस्से में चांद जैसे मिट्टी है. भारत की धरती पर चांद जैसी मिट्टी मिली. दो-तीन जगह मिली. लेकिन सबसे ज्यादा मिट्टी थी, तमिलनाडु के नमक्कल जिले के सीथमपुंडी और कुन्नामलाई गांव में. इसके अलावा आंध्र प्रदेश के कुछ इलाकों और उत्तर भारत में कुछ जगह ये मिट्टी मिली है, पर उतनी ज्यादा नहीं जितनी तमिलनाडु में.

वैज्ञानिक चांद जैसी मिट्टी में लैंडिंग मॉड्यूल को लैंड कराते हैं. ये एक तरह की प्रैक्टिस लैंडिंग होती है. इस लैंडिग के आधार पर अंदाजा लगाया जाता है कि असल लैंडिंग कैसी होगी. उस समय संभावित दिक्कत क्या हो सकती है. ये एक तरह का परफॉर्मेंस टेस्ट है. इस टेस्ट के आधार पर लैंडर में जरूरी परिवर्तन किए जाते हैं. जिससे सुरक्षित सॉफ्ट लैंडिंग कराई जा सके. इसीलिए कहा जा रहा है कि तमिलनाडु की मिट्टी में ही टेस्ट और प्रैक्टिस की बदौलत आज भारत चांद पर है.  

(ये स्टोरी हमारे साथी अनुराग अनंत ने की है.)  

वीडियो: खर्चा-पानी: चंद्रयान-3 पर कितना पैसा खर्च हुआ, बैंकों के पास पैसे खत्म हो गए हैं?

Advertisement

Advertisement

()