'छुट्टे नहीं हैं' का बहाना नहीं चलेगा, कालका मैय्या पेटीएम ले रही हैं
अमां कब तक नोटबंदी पर बकैती झाड़ते रहोगे. हियां देखो. भगवान भी डिजिटल हो गए हैं.

हजार और पांच सौ के नोट बंद होने के बाद से लोगों को सिर्फ दो ही चीजों से आस है. एक तो एटीएम और दूसरा पेटीएम. इंट्रेस्टिंग बात ये है कि इस कतार में सिर्फ इंसान ही नहीं, भगवान भी हैं. पेटीएम और फ्रीचार्ज जैसी ऐप्स से अगर आपका काम हो सकता है, तो भला भगवान का क्यों नहीं. वो भी डिजिटल हो गए हैं. धर्म-कर्म के सेक्टर में भी पेटीएम की बहार आ गई है.
दिल्ली में कालका देवी का बड़ा फेमस मंदिर है. बहुस्सारी जनता है, जो जहां आकर भगवान से डील करती है. नोटबंदी के बाद से कालका देवी के दरबार में भी पेटीएम की व्यवस्था कर दी गई है. आपके दरबार में पहुंचने से पहले ही पेटीएम की गूंज सुनाई देने लगती है.
अभी तक समस्या थी कि लोगों के पास कैश नहीं था. ऐसे में अगर कोई दान देना भी चाह रहा था, तो कैश न होने के चलते मन मारकर रह जा रहा था. लेकिन अब उसका जुगाड़ हो गया है. भगवान पेटीएम एक्सेप्ट करने लगे हैं और अब उनके और आपके बीच कोई अवरोध नहीं है. मूर्ति के सामने जो दानपात्र रखा है, उस पर भी पेटीएम का पोस्टर चस्पा है. देखिए, मोबाइल उठाइए और दान दीजिए.
अब इंडिया इससे ज्यादा डिजिटल क्या होगा. कॉर्पोरेट सेक्टर और आईटी कंपनियों से निकलकर अब दुकानदारों की गुल्लकें और भगवान का दानपात्र तक पेटीएम की जद में आ गया है. अब और क्या चाहिए.
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