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कैराना में हुए गैंगरेप के गवाह को मार डाला, और किसी को पता भी नहीं चला

11 साल के बेटे के साथ गौशाला में सो रहे थे ब्रह्मपाल यादव.

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जागृतिक जग्गू
22 नवंबर 2016 (Updated: 22 नवंबर 2016, 07:51 AM IST)
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सोमवार को कुछ लोगों ने ब्रह्मपाल यादव का मर्डर कर दिया. वो सुनहाटी गांव के अकबरपुर में रहते थे. ब्रह्मपाल कैराना में हुए रेप और मर्डर के गवाह थे. इस रेपकांड के बाद अकबरपुर में काफी बवाल भी हुआ था. रामपाल कश्यप ब्रह्मपाल के छोटे भाई हैं. उन्होंने 6 लोगों के खिलाफ पुलिस में केस दर्ज करा दिया है. कैराना पुलिस स्टेशन ऑफिसर के मुताबिक, 'मुस्तफा अहमद, मोहम्मद अमजद, साबदार अली, मौलाना मेहसर, सुफियाना और परवेज के खिलाफ हमने केस दर्ज कर लिया है.  उनपर मर्डर का इल्जाम है.
संडे को ब्रह्मपाल के घर कुछ नाते-रिश्तदार आए हुए थे. तो वो अपने 11 साल के बेटे को लेकर गौशाला में सोने चले गए. सुबह जब उनकी पत्नी उन्हें जगाने गई तो देखा कि वो मरे पड़े हैं. सर में गोली लगी है और खून बह रहा है. रामपाल के मुताबिक उनके भतीजे को भी ये आइडिया नहीं है कि ये सब कब और कैसे हुआ.
रामपाल का कहना है, 'मैंने रात में कुछ लोगों को देखा था. उसी के आधार पर केस दर्ज कराया है.' रामपाल के पड़ोसी मांगे राम ने भी बताया है कि ब्रह्मपाल को गोली रात के तकरीबन 1:30 बजे मारी गई है. उनकी बीवी ने कुछ आवाज सुनी थी, जिससे उनकी नींद खुल गई. दरवाजा खोलकर देखा पर कुछ पता नहीं चला.

क्या था मामला?

4 अप्रैल 2015. कैराना में एक 35 साल की दलित औरत को पहले किडनैप किया गया था. और बाद में फिर 4 लोगों ने गैंगरेप किया था. औरत की डेड बॉडी तीन दिन बाद यमुना किनारे मिली थी. इस हत्याकांड के दो आरोपी मोहसिन और कुर्बान जेल में है. पुलिस ने मरने वाली औरत के रिश्तेदार अंकुश और रामेंद्र को भी आरोपी बनाया था. अंकुश और रामेंद्र फरार हैं. घटना के गवाह ब्रह्मपाल थे. इस घटना से सुनहेटी गांव के अकबरपुर में बवाल कट गया था. बीजेपी सांसद हुकुम सिंह ने घटना को लेकर आवाज उठाई थी. 21 सितंबर को नेशनल ह्यूमन राइट्स कमिशन (NHRC) ने अपनी एक रिपोर्ट में पुलिस की नाकामियों पर सवाल दागे थे. मामले को लेकर हुकुम सिंह का कहना है, 'सुनहेटी गांव के अकबरपुर इलाके से लगातार हिंदू पलायन कर रहे हैं. मैं देखना चाहता हूं कि पुलिस इस मामले में अब क्या करती है. क्योंकि इससे पहले पुलिस अपराधियों को धरने के बजाए औरत के रिश्तेदारों को ही अपराधी बता देती थी.'
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