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हाई कोर्ट के जज ने फैसले में लिखा, भारत को हिंदू देश घोषित कर देना चाहिए था

एनआरसी पर एक मुकदमे का फैसला सुना रहे थे जस्टिस सुदीप रंजन सेन.

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13 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 13 दिसंबर 2018, 07:03 AM IST)
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मेघालय हाई कोर्ट के जस्टिस सुदीप रंजन सेन ने अपने फैसले में लिखा है कि आजादी के दौरान ही भारत को एक हिंदू राष्ट्र घोषित कर देना चाहिए था.
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कई हिंदूवादी नेताओं और संगठनों को अक्सर ये बयान देते हुए सुना गया है कि-
''आजादी के दौरान भारत को एक हिंदू राष्ट्र घोषित कर देना चाहिए था.''
लेकिन इस बार ये लाइन हाई कोर्ट के एक फैसले का हिस्सा है और इस फैसले को लिखने वाले हैं मेघालय हाई कोर्ट के जज जस्टिस सुदीप रंजन सेन.
11 दिसंबर को मेघालय हाई कोर्ट में जस्टिस सुदीप रंजन सेन के सामने एक मामला सुनवाई के लिए आया. याचिका अमन राणा नाम के एक शख्स ने लगाई थी और कहा था कि उसे निवास का प्रमाणपत्र दिया जाए. जस्टिस सेन ने अमन राणा की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि अगर वो नागरिकता के मुद्दे पर असली भारत और उसके विभाजन के बारे में नहीं बोलेंगे तो ऐसा लगेगा कि वो अपनी ड्यूटी ठीक से नहीं निभा रहे हैं. इसलिए जस्टिस सेन ने याचिका को खारिज करते हुए जो फैसला लिखा, उसमें असम के नागरिकता रजिस्टर से लेकर, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान तक का जिक्र है. पढ़िए जस्टिस सुदीप रंजन सेन ने अपने फैसले में क्या लिखा है-
A.K. Goel, Chief Justice of Gauhati High court swearing in Sudip Ranjan Sen, as Additional Judge of the Gauhati High Court on February 6, 2012 at Court No. 1 of the High Court in Guwahati on Monday 6th February 2012. PHOTO: EASTERN PROJECTIONS
2014 में जस्टिस सेन मेघालय हाई कोर्ट में स्थायी जज बने थे. ( PHOTO: EASTERN PROJECTIONS)

# किसी को भी भारत को एक और इस्लामिक देश बनाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. ऐसा होता है तो यह भारत और दुनिया का अंत साबित हो सकता है.
# असम के नैशनल रजिस्ट्रार ऑफ सिटिजंश की अपडेशन प्रक्रिया में कई कमियां हैं. इसकी वजह से बहुत सारे विदेशी भी भारतीय बन जाएंगे और जो असली भारतीय हैं, वो भारत के नागरिक नहीं रह जाएंगे.
# केंद्र को एक कानून लाना चाहिए, जिससे पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के गैर मुस्लिम और आदिवासी समुदाय के लोगों को बिना किसी दस्तावेज के या फिर बिना उनसे सवाल पूछे नागरिकता मिल जाए. ऐसे लोग बिना किसी समय सीमा के भारत में रह सकें.
# प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली ये सरकार ही मामले की गंभीरता को समझेगी और ज़रूरी कदम उठाएगी. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को राष्ट्रहित में पीएम मोदी की पूरी मदद करनी चाहिए.
असम के नागरिकता रजिस्टर को लेकर जस्टिस सेन ने ये फैसला लिखा है.
असम के नागरिकता रजिस्टर को लेकर जस्टिस सेन ने ये फैसला लिखा है.

# एनआरसी राज्य सरकार की मशीनरी के तहत काम कर रहा है. अगर एनआरसी से बाहर हुए लोगों को डिटेंशन कैंप में रखा जाएगा, उन्हें और लोगों से अलग-थलग कर दिया जाएगा, तो ये अमानवीय होगा, ये पशुता होगी और उनके साथ न्याय नहीं होगा.
# आजादी के दौरान पाकिस्तान ने खुद को इस्लामिक देश घोषित कर दिया. उस वक्त भारत को भी हिंदू देश घोषित कर देना चाहिए था, लेकिन भारत एक सेक्युलर देश बना रहा.
# भारत में पहले हिंदू राजाओं का शासन था. बाद में मुगल आ गए और भारत के अलग-अलग हिस्सों पर कब्जा कर अपना शासन शुरू कर दिया. उस वक्त बहुत से लोगों का धर्मांतरण करवाया गया.
इस फैसले को लिखने के दौरान जस्टिस सुदीप रंजन सेन ने मेघालय के गवर्नर तथागत रॉय की लिखी किताब My People Uprooted: The Exodus of Hindus from East Pakistan and Bangladesh का हवाला देते हुए बांग्लादेश के हिंदुओं का जिक्र किया. पूरा फैसला लिखने के बाद जस्टिस सुदीप रंजन सेन ने कोर्ट के असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल ए पॉल को कहा कि इस आदेश की एक-एक कॉपी प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और कानून मंत्री को भेज दी जाए, ताकि वो लोग उन हिंदुओं, सिखों, जैन, बौद्ध, क्रिश्चियन, पारसी, खासी, जयंतिया, गारो के हितों के लिए कानून बना सकें जो भारत में रह रहे हों और जो भारत के मूल निवासी होने के बाद भी बाहर रह रहे हों.
जस्टिस सेन ने अपने फैसले में इसी किताब का जिक्र किया है.
जस्टिस सेन ने अपने फैसले में इसी किताब का जिक्र किया है.

अब आखिर में बात जस्टिस सुदीप रंजन सेन की. जस्टिस सेन रहने वाले मेघालय के हैं. राजधानी शिलांग में पैदा हुए जस्टिस सेन लॉ की पढ़ाई करने से पहले एक स्कूल टीचर थे. शिलांग लॉ कॉलेज से वकालत करने के बाद वो दीवानी और फौजदारी दोनों ही मामले देखने लगे. साल 2000 में वो जज बने गए. एनडीपीएस ऐक्ट (जिसमें ड्रग्स से जुड़े मामले शामिल होते हैं), वक्त ट्रिब्यूनल और जमीन अधिग्रहण जैसे मामलों की सुनवाई के लिए साल 2002 में उन्हें डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज बनाया गया. 2010 से 2012 तक गोहाटी हाई कोर्ट में जस्टिस सेन ने बतौर रजिस्ट्रार (एडमिनिस्ट्रेशन) काम किया. 2013 में वो मेघालय हाई कोर्ट में जज बने और जनवरी 2014 में मेघालय हाई कोर्ट में स्थायी जज के तौर पर उनकी नियुक्ति हुई थी.


 

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