भिवानी कांड में जुनैद और नासिर को बचा सकती थी पुलिस, लेकिन यहां गलती हो गई
भिवानी कांड में दो मुस्लिम युवकों की मौत. FIR में आरोप बजरंग दल से जुड़े लोगों पर लगा है.

सुनसान जंगल में रास्ते के किनारे खड़ी एक अकेली गाड़ी. ये दृश्य देखकर आपके ज़ेहन में क्या ख़याल आता है? शायद ये कि गाड़ी में बैठे लोग आस-पास होंगे. किसी काम से उतरे होंगे.या ये कि कोई गाड़ी में बैठा होगा. किसी वजह से रुका होगा. हरियाणा के भिवानी के सुनसान इलाक़े में एक गाड़ी मिली. जली हुई. अंदर दो नर कंकाल. गांव वालों ने पुलिस को आगाह किया. पुलिस ने बताया कि शव नासिर और जुनैद नाम के युवकों के हैं. शक है कि उन्हें ज़िंदा जलाकर मारा गया है. हत्या का आरोप लगा है बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ताओं पर और मामला गोरक्षा से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है. हिंदू धर्म में पार्थिव देह का अग्निदाह किया जाता है. हिंदू धर्म में गाय को पवित्र जानवर माना जाता है. मगर गाय की रक्षा के नाम पर किसी इंसान को ज़िंदा जला देना. धर्म की कौन सी व्याख्या में आता है?
आज बात करेंगे हरियाणा के भिवानी की, जहां दो युवकों की हत्या का मामला सामने आया है. बीती शाम हमारे बुलेटिन सुर्खियों में हमने आपको मामला बताया था. सिलसिलेवार ढंग से आपको घटना का रीकैप करवा देते हैं. आजतक से जुड़े जगबीर सिंह की रिपोर्ट के मुताबिक़, 16 फरवरी को भरतपुर ज़िले के गोपालगढ़ थाने में गांव घाटमीका निवासी इस्माइल ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके चचेरे भाई जुनैद और नासिर को अगवा कर लिया गया है और आरोप लगाए हरियाणा के रहने वाले अनिल, श्रीकांत, रिंकू सैनी, लोकेश सिंगला और मोनू मानेसर पर.ये पांचों लोग बजरंग दल से जुड़े हुए हैं. इस्माइल की तहरीर के मुताबिक़, 15 फरवरी की सुबह-सुबह उनके चचेरे भाई जुनैद और नासिर अपनी बोलेरो गाड़ी से किसी काम से बाहर गए थे. हरियाणा के पीरुका गांव के पांच लोगों ने दोनों का अपहरण कर लिया. और एक अजनबी के ज़रिए इस्माइल को पता चला कि आरोपियों ने दोनों को बुरी तरह पीटा है. वो जंगल में गंभीर रूप से घायल पड़े हैं. पता चलते ही इस्माइल ने तुरंत जुनैद और निसार को फोन किया. दोनों के मोबाइल फोन बंद थे. आगे इस्माइल ने बताया,
अब दूसरा मंज़र. 16 फरवरी की दोपहर हरियाणा के भिवानी के लोहारू तहसील, गांव बारावास में एक गाड़ी और दो लाशें मिली. जली हुई गाड़ी देखकर गांव वालों ने पुलिस को जानकारी दी. इसके बाद फोरेंसिक जांच के लिए FSL की टीम आई. गाड़ी के चेचिस नंबर के आधार पर पुलिस की टीम बोलेरो का रजिस्ट्रेशन नंबर पता करने की कोशिश कर रही थी. तभी पुलिस के पास मृतकों का चचेरा भाई इस्माइल पहुंचा और उसने अपहरण की बात बताई. दोनों ही मृतक राजस्थान के भरतपुर ज़िले के रहने वाले थे. एक और बात बता देते हैं. पुलिस ने जानकारी दी है कि मृतक जुनैद के खिलाफ गो तस्करी के 5 केस दर्ज थे. वापस मामले पर आते हैं. इस मामले में मृतकों के गृह ज़िले भरतपुर में इस्माइल ने अपहरण की FIR दर्ज करवाई थी. अनिल, श्रीकांत, रिंकू सैनी, लोकेश सिंघला और मोनू मानेसर को नामज़द किया गया. भरतपुर के गोपालगढ़ थाने में IPC की धारा-143 यानी (जानबूझकर ग़ैरकानूनी सभा में शामिल होना) और अपहरण की तीन अगल-अलग धाराओं - 365, 367 और 368 - के तहत मामला दर्ज किया गया है. अब इस प्राथमिकी में हत्या की धारा भी जोड़ दी गई है. पहले ये भी ख़बर आई थी कि लाश मिलने की जगह भिवानी में हरियाणा पुलिस ने हत्या की धारा के तहत मुक़दमा बनाया है.लेकिन बाद में पता चला कि हरियाणा में कोई FIR दर्ज नहीं हुई है. सूबे की पुलिस ने अगुवाई के चार्ज पर ही राजस्थान पुलिस को शव सौंप दिए.
इस्माइल ने FIR में दर्ज करवाया है कि मौक़े पर मौजूद लोगों ने आरोपियों को जुनैद और नासिर को पीटते हुए देखा है.ये भी बताया कि पुलिस ने उन्हें जानकारी दी थी कि उनके भाइयों की लाश मिली है. इसमें एक ज़रूरी बात और सामने आई है. मृतकों के परिजनों का ये भी कहना है कि आरोपी बजरंग दल के सदस्यों ने पहले नासिर और जुनैद को पीटा फिर उन्हें गाड़ी समेत राजस्थान से हरियाणा के फिरोजपुर झिरका थाने में ले गए. दोनों की अधमरी हालत देखकर पुलिस ने उन्हें अपने पास रखने से मना कर दिया और इसके अगले दिन यानी 16 फरवरी को दोनों की जली हुई लाश पाई गई.
शो की स्क्रिप्ट लिखे जाने तक इस पूरे मामले में अभी तक किसी भी आरोपी गिरफ़्तार नहीं हुआ है. सभी फ़रार हैं. भरतपुर के IG गौरव श्रीवास्तव ने 16 फरवरी की शाम को मीडिया से बात की थी. और बताया था कि परिवार ने इस मामले में हत्या को कोई मोटिव नहीं बताया है. पुलिस संदिग्धों की तलाश में लगी हुई है.
अब इस मामले में पांच लोगों के नाम है. पुलिस ने कहा कि मुख्य आरोपी है मोनू मानेसर. ये कौन है बताते हैं.
हरियाणा के गुरुग्राम जिले में एक शहर है मानेसर.मोनू मानेसर का संबंध इसी मानेसर से है. आज खुद को सच्चा गो-रक्षक बताने वाले मोनू की कहानी 2012 तक किसी आम छात्र की तरह थी. तब वह पॉलिटेक्निक डिप्लोमा की पढ़ाई कर रहा था. टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में मोनू ने बताया था कि,
2012 से लेकर अब तक 10 साल से ज्यादा का समय हो चुका है और इन 10 सालों में 28 साल का मोनू मानेसर गुड़गांव के कथित गो-रक्षक नेटवर्क का एक बड़ा चेहरा बन चुका है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट की माने तो पिछले साल मोनू को जिले की गो-रक्षा टास्क फोर्स का प्रमुख बनाया गया था. अब ये गो-रक्षा टास्क फोर्स क्या है? जुलाई 2021 में हरियाणा सरकार ने गो रक्षा टास्क फोर्स के लिए नोटिफिकेशन जारी किया था. यह टास्क फोर्स दो स्तर पर काम करती है. पहला राज्य के स्तर पर और दूसरा जिले के स्तर पर. राज्य स्तर पर 6 सदस्य होते हैं. जबकि जिला स्तर पर 11. इस टास्क फोर्स का मुख्य कार्य हरियाणा गोवंश संरक्षण और गोसंवर्धन एक्ट, 2015 को लागू करवाना था. आसान शब्दों में कहें तो ये टास्क फोर्स न केवल अवैध तस्करी और गोवंश वध को रोकेगी बल्कि तस्करी और वध के बारे में जानकारी इकट्ठा कर पुलिस के साथ मिलकर कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित करेगी और उनका पुनर्वास करेंगे. इसके अलावा मोनू मानेसर में ज़िला प्रशासन की नागरिक सुरक्षा टीम का भी सदस्य है.
सोशल मीडिया पर भी मोनू काफी एक्टिव है. यूट्यूब पर उसके चैनल MONU MANESAR BAJRANG DAL के दो लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं और फेसबुक पर उसके पेज के 80 हजार से ज्यादा फॉलोवर्स हैं. मोनू के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रक का पीछा करने और फिर उनसे गोवंश उतारने वाले वीडियो से भरा पड़ा है. कई वीडियो में मोनू के साथ पुलिस को भी देखा जा सकता है. पीछा करते हुए कुछ वीडियो में गोलीबारी भी देखी जा सकती है. हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में गुरुग्राम में कथित गोतस्करों का पीछा करते हुए मोनू पर हमला हुआ था और इस दौरान मोनू के सीने में गोली लगी थी. मोनू का कहना है कि वो गोतस्करों का पीछा करते हैं और फिर उन्हें पकड़कर पुलिस के हवाले कर देते हैं. मोनू का दावा है कि इस दौरान उसने कभी कानून हाथ में नहीं लिया और न ही किसी के साथ मारपीट की. लेकिन मोनू के इस दावे पर बीबीसी की रिपोर्ट सवाल उठाती है.
28 जनवरी की सुबह हरियाणा के नूह से एक वीडियो वायरल हुआ था. वीडियो के जरिए दावा था कि कुछ कथित गोरक्षकों ने तीन मुस्लिमों युवकों को बुरी तरह पीटा. वीडियो में युवकों ने अपना नाम वारिस, शौकीन और नफ़ीस बता रहे थे. कुछ घंटों बाद तीन में से एक युवक वारिस की मौत हो गई. बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक वारिस के घरवालों ने इसे हत्या बताया और आरोप मोनू मानेसर पर लगाया. जबकि मोनू का कहना था कि मारपीट के आरोप निराधार हैं. वारिस की मौत सड़क हादसे के कारण हुई थी. बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में चश्मदीदों के बयान भी शामिल किए हैं. चश्मदीदों का कहना था कि एक्सीडेंट के बाद बजरंग दल वालों ने मुस्लिम लड़कों के साथ मारपीट की थी. इस दौरान हादसे के बाद के सीसीटीवी में भी कुछ लोग मुस्लिम युवकों के साथ मारपीट करते हुए दिखाई देते हैं. चश्मदीदों का दावा है कि पिटाई के समय मोनू मानेसर भी मौजूद था. पुलिस से जब मामले पर बात की गई तो पुलिस का कहना था कि जांच जारी है.
इसी महीने की शुरुआत में मोनू का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक 6 फरवरी की देर रात पटौदी के बाबर शाह मोहल्ले में दो समुदायों में आपसी विवाद के बीच पत्थरबाजी हुई थी. इस दौरान मोनू मानेसर ताबड़तोड़ फायरिंग करते हुए कैमरे में कैद हुआ था. विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक बहस से हुई थी. मोहल्ले की आपसी लड़ाई-झगड़े की बात बजरंग दल तक पहुंची तो मोनू मानेसर अपनी टीम के साथ मोहल्ले में पहुंचा और फायरिंग करते हुए कैमरे में कैद हो गया था. इस दौरान 20 साल के मोईन के पेट में गोली लगी थी और उसे गंभीर हालत में गुरुग्राम के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
घटना पर मोनू ने किसी भी तरह की फायरिंग से इनकार किया था और कहा था कि दलित परिवार को मुस्लिम परेशान कर रहे थे इसलिए हमारी टीम वहां गई थी. घटना के बाद मोईन के पिता की तरफ से शिकायत दर्ज कराई गई थी और पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी. इस तरह की घटनाओं के अलावा मोनू का मुस्लिमों के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने का भी इतिहास है. साल 2021 के जुलाई महीने में हरियाणा के पटौदी में एक हिन्दू महापंचायत का आयोजन हुआ था. आयोजन में अपनी बात रखते हुए मोनू ने कहा था,
पिछले साल जुलाई के महीने में मानेसर के एक मंदिर में पंचायत का आयोजन किया गया था.मोनू मानेसर इस पंचायत के आयोजन कर्ता में से एक था और इस पंचायत में खुलेआम मुसलमानों के आर्थिक वहिष्कार की बात कही गई थी.इसके अलावा जब आप मोनू का फेसबुक अकाउंट खंगालेंगे तो बड़े-बड़े नेताओं, अफसरों और सेलिब्रिटीज के साथ उसकी तस्वीर मिलेगीं लेकिन मोनू किसी भी तरह की राजनीतिक संभावनाओं से इनकार करता रहा है.
अब इस भिवानी वाले कांड में मोनू ने खुद को निर्दोष बताया है. अपनी बेगुनाही के सबूत के तौर पर उसने ट्विटर पर घटना वाली रात की एक सीसीटीवी फुटेज शेयर की. ये फुटेज एक होटल की थी. मोनू ने दावा किया कि वो घटना की रात होटल में था. आजतक के साथ बातचीत में मोनू ने केस में CBI जांच की मांग की है. उसका कहना है कि उसे और उसके साथियों को फंसाया जा रहा है.
अब बात करते हैं स्वघोषित गो रक्षकों की. देशभर में कथित गो रक्षकों ने अपने-अपने कई ग्रुप्स बनाए हुए हैं और ये लोग बहुत संगठित तौर पर काम करते हैं. समय-समय पर इन संगठनों के ज़रिए गो-तस्करी के शक में मारपीट के मामले भी सामने आते रहे हैं. ऐसा ही एक ख़बर पिछले साल दिल्ली के छावला इलाके़ से आई थी. गो हत्या के आरोप में राजाराम नाम के एक शख़्स की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी. राजा राम छावला के एक फार्म हाउस में अपने परिवार के साथ केयर टेकर के तौर पर रहता था.DW वेबसाइट की रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले को लेकर पुलिस ने बताया था कि उन्हें उस फ़ार्म हाउस पर गो-हत्या और गो-मांस की बिक्री की ख़बर मिली थी.जिसकी जांच के लिए एक टीम वहां जा रही थी, लेकिन कथित गो रक्षक उनसे पहले वहां पहुंच गए.इसके बाद राजाराम की पिटाई हुई और अस्पताल में राजा राम ने दम तोड़ दिया.राजधानी दिल्ली में ये इस तरह का पहला मामला था.
कथित गोरक्षा के नाम पर होने वाली ऐसी घटनाओं को लेकर देश की कई अदालतें भी चिंता ज़ाहिर कर चुकी हैं.इस मसले पर रिसर्च करते हुए हमारी नज़र इलाहाबाद हाईकोर्ट की साल 2020 में की गई एक टिप्पणी पर पड़ी.दरअसल, गोहत्या क़ानून के तहत जेल में बंद रहीमुद्दीन की ज़मानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा था कि 'उत्तर प्रदेश में गोहत्या संरक्षण कानून का निर्दोष लोगों के ख़िलाफ़ दुरुपयोग हो रहा है.जब कभी कोई मांस बरामद होता है, तो उसे फोरेंसिक लैब में जांच कराए बिना गोमांस बता दिया जाता है और निर्दोष व्यक्ति को उस अपराध के लिए जेल भेज दिया जाता है, जो शायद उसने किया ही नहीं है.'
कथित गो रक्षकों की मनमानी को लेकर ऐसा ही एक टिप्पणी पिछले साल पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की तरफ से भी आई थी.एक मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने हरियाणा सरकार से स्पष्टीकरण मांगा था कि गो रक्षकों के पास लोगों के घरों पर छापा मारने का क्या अधिकार है.कोर्ट ने कहा था कि ऐसी कार्रवाई पहली नजर में गैरकानूनी है और किसी भी व्यक्ति द्वारा कानून अपने हाथ में लिए जाने जैसा है.
2018 में येल के प्रोफ़ेसर और लीगल हिस्टोरियन रोहित डे ने एक किताब लिखी थी: A People’s Constitution: The Everyday Life of Law in the Indian Republic. किताब में रोहित ने आज़ाद भारत में गाय संरक्षण क़ानूनों के जटिल इतिहास की तफ़्सील दी है. रोहित ने लिखा है कि गोहत्या का मुद्दा हाल का नहीं हैं.19वीं सदी के अंत से ही भारत में गोरक्षा पर सार्वजनिक बहस, छोटी-मोटी हिंसाएं और जन लामबंदी चलती आ रही है. चूंकि संविधान की ड्राफ़्टिंग कमिटि के प्रमुख थे बी आर आम्बेडकर और आम्बेडकर भारत को एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य के रूप में परिभाषित करने के मत के थे. तो उन्होंने गोरक्षा के प्रश्न को अपने मूल ड्राफ़्ट से बाहर रखा. गोरक्षा लॉबी ने गोरक्षा के मुद्दे को मौलिक अधिकार के रूप में शामिल करने की मांग की थी.लेकिन, आम्बेडकर ने गोरक्षा पर संशोधन को निर्देशक सिद्धांतों यानी डायरेक्टिव प्रिंसिपल्स में डाल दिया. आज़ादी के बाद, भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी गोहत्या की समस्या को राज्य विधानसभाओं को संदर्भित कर दिया और इसे 'वैधानिक क़ानून' के दायरे में ला दिया. किताब में इस मुद्दे के प्रासंगिक होने के दो कारण भी बताए - सांस्कृतिक एकरूपता और बहुसंख्यकवाद.मगर इतिहास में दर्ज उदाहरणों से पता चलता है कि भारतीय लोकतंत्र के संस्थापकों के सामने गोरक्षा का एक भावनात्मक मुद्दा था. बावजूद इसके, उन्होंने अपनी संवेदनाओं को बहुसंख्यकों के दबाव के सामने झुकने नहीं दिया.राज्य के धर्मनिरपेक्ष कानून को साम्प्रदायिक भावनाओं से ऊपर तजरीह दी.
आज की तारीख़ में भारत के 24 राज्यों में गोहत्या या गोतस्करी से जुड़े क़ानून हैं.उन क़ानूनों की जानकारी एक बुलेटिन में नहीं समेटी जा सकती.फिलहाल भारतीय संविधान में इसे लेकर क्या प्रावधान हैं ये समझने के लिए हमने एक्सपर्ट का सहारा लिया.
कानून की परिभाषा तो समझ ली लेकिन भिवानी वाले मसले पर तैयार होते नए राजनीतिक मुद्दे का भी विश्लेषण ज़रूरी है.दर्शक जानते ही हैं कि गाय और उसकी रक्षा का मुद्दा कई बरस से पॉलिटकल बहस का हिस्सा रहा भिवानी वाले मामले को लेकर ये बहस फिर से छिड़ गई है.
कथित गौ तस्करी के शक में हुई हत्याओं पर वैसी ही राजनीतिक बयानबाजियां हो रही हैं जैसी होती आई हैं. लेकिन सच तो ये है कि दो लोगों का बेरहमी से कत्ल हुआ है. इसकी जांच में जो कुछ भी निकलेगा हम आप तक पहुंचाते रहेंगे.
वीडियो: जुनैद-नासिर को जिंदा जलाने का आरोप जिस मोनू मानेसर पर लगा, वो कौन है?

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