जूलियन असांज को बड़ा झटका, ब्रिटिश हाई कोर्ट ने अमेरिका को सौंपने वाला फैसला सुना दिया
समर्थकों ने कहा- अदालत ने पत्रकारिता को अंधेरे में धकेला.
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साल 2017 में लंदन स्थित एक्वाडोर के दूतावास के बाहर समर्थकों का अभिवादन करते Julian Assange. (फोटो: AP)
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लंबे समय से अभिव्यक्ति की आजादी पर बहस का केंद्र बने जूलियन असांज को लंदन हाई कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है. उसने कहा है कि जूलियन असांज को अमेरिका के हवाले किया जा सकता है. हाई कोर्ट ने इस मामले में ब्रिटेन की ही निचली अदालत के उस फैसले को पलट दिया है, जिसमें कहा गया था कि विकीलीक्स के को-फाउंडर को अमेरिका प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता है. यह फैसला इसी साल जनवरी में दिया गया था.
निचली अदालत ने असांज को अमेरिका के हवाले ना किए जाने के लिए उनकी मानसिक हालत और आत्महत्या की आशंका का हवाला दिया था. इस फैसले के तुरंत बाद अमेरिका ने ब्रिटिश हाई कोर्ट में अपील की थी जिसने उसके पक्ष में फैसला सुना दिया है. अब असांज को अमेरिका प्रत्यर्पित किया जा सकता है. वहां उनके खिलाफ जासूसी के आरोप के तहत सुनवाई शुरू हो सकती है.
जूलियन असांज इस समय हाई सिक्योरिटी के बीच लंदन की बेलमार्श जेल में बंद हैं. अप्रैल, 2019 में एक्वाडोर द्वारा उनका साथ छोड़ने के बाद लंदन पुलिस के अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. अब हाई कोर्ट ने निचली अदालत के जज को आदेश दिया है कि वह असांज को अमेरिका प्रत्यर्पित करने की रिक्वेस्ट रिव्यू के लिए गृह मंत्री को भेजे. यूनाइटेड किंगडम की गृह मंत्री प्रीति पटेल ही असांज को प्रत्यर्पित करने के संबंध में अंतिम फैसला लेंगी.
पिछले एक दशक से अधिक समय से चल रहा जूलियन असांज का मामला अभिव्यक्ति की आजादी पर बहस का केंद्र बना हुआ है. असांज का समर्थन करने वालों का कहना है कि किसी भी दूसरे मीडिया संस्थान की तरह ही विकीलीक्स के पास भी समाज की भलाई के लिए गोपनीय दस्तावेज प्रकाशित करने का अधिकार है. इन लोगों का कहना है कि मीडिया को यह आजादी अमेरिका का संविधान देता है. यही नहीं, पहले भी अमेरिकी मीडिया इस तरह के दस्तावेज प्रकाशित कर चुका है और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक ने इसे जायज बताया है.

लंदन हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते Julian Assange के समर्थन. (फोटो: AP)
जाहिर है लंदन हाई कोर्ट के इस फैसले पर असांज के समर्थकों ने नाराजगी जताई है. रिपोर्टर्स विदऑउट बॉर्डर की यूके ब्रांच हेड रेबेका विनसेंट ने ट्वीट करते हुए कहा,
प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल की तरफ से भी ट्वीट किया गया,
वहीं विकीलीक्स के साथ जुड़े आइसलैंड के पत्रकार क्रिस्टीन रैनसन ने लिखा,
निचली अदालत ने असांज को अमेरिका के हवाले ना किए जाने के लिए उनकी मानसिक हालत और आत्महत्या की आशंका का हवाला दिया था. इस फैसले के तुरंत बाद अमेरिका ने ब्रिटिश हाई कोर्ट में अपील की थी जिसने उसके पक्ष में फैसला सुना दिया है. अब असांज को अमेरिका प्रत्यर्पित किया जा सकता है. वहां उनके खिलाफ जासूसी के आरोप के तहत सुनवाई शुरू हो सकती है.
'घोर अन्याय'
हालांकि असांज के पास अभी भी हाई कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देने का विकल्प खुला हुआ है. उनकी पार्टनर स्टेला मॉरिस ने इस ओर इशारा भी किया है. हाई कोर्ट के फैसले को 'घोर अन्याय' बताते हुए मॉरिस ने कहा कि असांज की लीगल टीम जल्द से जल्द इस फैसले के खिलाफ अपील करेगी.जूलियन असांज इस समय हाई सिक्योरिटी के बीच लंदन की बेलमार्श जेल में बंद हैं. अप्रैल, 2019 में एक्वाडोर द्वारा उनका साथ छोड़ने के बाद लंदन पुलिस के अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था. अब हाई कोर्ट ने निचली अदालत के जज को आदेश दिया है कि वह असांज को अमेरिका प्रत्यर्पित करने की रिक्वेस्ट रिव्यू के लिए गृह मंत्री को भेजे. यूनाइटेड किंगडम की गृह मंत्री प्रीति पटेल ही असांज को प्रत्यर्पित करने के संबंध में अंतिम फैसला लेंगी.
इससे पहले हाई कोर्ट ने असांज की मानसिक हालत के संबंध में टिप्पणी करते हुए कहा कि अमेरिका की तरफ से यह आश्वासन दिया गया है कि उनके साथ मानवीय तरीके से व्यवहार किया जाएगा. मामले में अमेरिका का पक्ष रख रहे वकील जेम्स लुईस ने कहा कि असांज कभी भी मानसिक रोगी नहीं रहे और इस बात के कोई सबूत मौजूद नहीं हैं कि वह खुद को नुकसान पहुंचा सकते हैं. अमेरिका की तरफ से हाई कोर्ट को यह भी बताया गया कि अगर कोर्ट असांज के प्रत्यर्पण को मंजूरी देता है, तो दोषी पाए जाने पर असांज को जो भी सजा मिलेगी, उसे वह अपने देश ऑस्ट्रेलिया में पूरी कर सकते हैं. सुनवाई के दौरान अमेरिकी अधिकारियों और वकीलों ने कोर्ट को बताया कि असांज के खिलाफ जासूसी के 17 और कंप्यूटर दुरुपयोग का एक मामला है. कहा कि विकीलीक्स ने सैन्य और कूटनीति से संबंधित हजारों संवेदनशील कागजात लीक किए हैं. अगर इन असांज में असांजे को दोषी पाया जाता है, तो उन्हें अधिकतम 175 साल कैद की सजा हो सकती है. हालांकि, इस तरह के पिछले मामलों में दोषियों को अधिकतम 63 महीने कैद की सजा ही दी गई है.High Court decision “Grave miscarriage of justice,” says Julian Assange’s fiancée after a UK court overturned an earlier decision blocking the extradition of Julian Assange to the United States #FreeAssangeNOW
— WikiLeaks (@wikileaks) December 10, 2021
#AssangeCase
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'शर्मनाक फैसला'
पिछले एक दशक से अधिक समय से चल रहा जूलियन असांज का मामला अभिव्यक्ति की आजादी पर बहस का केंद्र बना हुआ है. असांज का समर्थन करने वालों का कहना है कि किसी भी दूसरे मीडिया संस्थान की तरह ही विकीलीक्स के पास भी समाज की भलाई के लिए गोपनीय दस्तावेज प्रकाशित करने का अधिकार है. इन लोगों का कहना है कि मीडिया को यह आजादी अमेरिका का संविधान देता है. यही नहीं, पहले भी अमेरिकी मीडिया इस तरह के दस्तावेज प्रकाशित कर चुका है और अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक ने इसे जायज बताया है.

लंदन हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते Julian Assange के समर्थन. (फोटो: AP)
जाहिर है लंदन हाई कोर्ट के इस फैसले पर असांज के समर्थकों ने नाराजगी जताई है. रिपोर्टर्स विदऑउट बॉर्डर की यूके ब्रांच हेड रेबेका विनसेंट ने ट्वीट करते हुए कहा,
"यह बहुत ही शर्मनाक है. इस फैसले के चिंतित करने वाले निहितार्थ हैं. ना केवल असांज के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बल्कि पूरी दुनिया में पत्रकारीय आजादी के लिए भी."
This is an utterly shameful development that has alarming implications not only for Assange’s mental health, but also for journalism and press freedom around the world. We’ll have a full reaction out from @RSF_inter
shortly. — Rebecca Vincent (@rebecca_vincent) December 10, 2021
प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल की तरफ से भी ट्वीट किया गया,
"पत्रकारिता अपराध नहीं है. जूलियन असांज को रिहा करो."
Journalism is not a crime. Free Julian Assange.https://t.co/YFdpqX1MGV
— Progressive International (@ProgIntl) December 10, 2021
वहीं विकीलीक्स के साथ जुड़े आइसलैंड के पत्रकार क्रिस्टीन रैनसन ने लिखा,
"संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार के दिन यूनाइटेड किंगडम की एक अदालत ने खोजी पत्रकारिता को अंधेरे में धकेल दिया है और जूलियन असांज का उत्पीड़न जारी रखा."विकीलीक्स के कागजात पर काम कर चुकीं इटली की पत्रकार स्टेफानिया मारूजी ने कहा कि जूलियन असांज का मामला पत्रकारिता का भविष्य तय करेगा. साथ ही साथ यह भी तय करेगा कि नागरिकों के पास सरकारों के काले सच को जानने का अधिकार है या नहीं. मारूजी ने यह भी कहा कि जूलियन असांज को अब बस लोगों का दबाव बनाकर ही बचाया जा सकता है.

