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बेसहारा बुजुर्गों को जज साहब ने अपना घर दे दिया

डीएम और सेशन जज आए थे ओल्ड एज होम के फंक्शन में. वहां रह रहे लोगों की हालत देखी तो अपना बंगला उन्हें दे दिया.

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12 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 12 जुलाई 2016, 02:43 PM IST)
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बात एमपी के श्योपुर जिले की है. यहां एक ओल्ड एज होम है. जिसमें प्रोग्राम था. शहर के बड़े लोगों को बुलाया गया था. डीएम पन्नालाल सोलंकी और सेशन जज शशिकांत चौबे भी आए हुए थे. प्रोग्राम हो गया तो दोनों लोगों ने ओल्ड एज होम का मुआयना किया. मुआयने के दौरान उन्होंने देखा वहां कैसे एक ही कमरे में 22 लोग रहते हैं. ऊपर से छत से बारिश के मौसम में पानी टपकता है. ये सब देख कर जज साहब ने अपना घर, यानी जो बंगला उनको अलॉट हुआ था, उसे ओल्ड एज होम के बुजुर्गों को देने की पेशकश की. जिसे डीएम ने तुरंत मंजूरी दे दी. अब उस ओल्ड एज होम में रहने वाले सभी बुजुर्ग बंगले में ट्रांसफर कर गए हैं.

बहुत अच्छी है बंगले की व्यवस्था

बंगले में सारी व्यवस्था एकदम टाइट है. हर कमरे में 5 बेड डाले गए हैं. कूलर और पंखा हर एक कमरे में लगा हुआ है. बाथरूम में गरम पानी के लिए गीजर लगा हुआ है. वाटर कूलर और इन्वर्टर भी है. अब 24 घंटे बिजली आती है. एक हाल है बंगले में, जहां बड़ा वाला एलईडी टीवी लगा हुआ है. सब साथ में बैठ के टीवी देखते हैं. बंगले में एक गार्डन है. उसमें झूला लगा हुआ है. इन सारी व्यवस्थाओं के बीच ये बुजुर्ग काफी खुश हैं. अब मजे में सारे लोग वहां रह रहे हैं. हरियाणा के किशोरीलाल राजपूत और उनकी पत्नी गंगादेवी को उनके दोनों बेटों ने शादी के बाद घर में रखने से मना कर दिया था. जब तक हाथ-पैर साथ दिए, मेहनत-मजदूरी करके दोनों ने काम चलाया. पर जब बुढ़ापा हावी होने लगा तो इस ओल्ड एज होम की शरण ली. दोनों नए घर में आकर बड़े खुश हैं. कहते हैं यहां जिंदगी सुहाने सपने जैसी लग रही है.

पहले अंग्रेजों का बंगला था

वैसे जिस बंगले में इन लोगों को बसाया गया है वो 1935 में बना था. तब उसमें अंग्रेज अफसर रहते थे. आजादी के बाद ये सरकारी बंगला हो गया. 1998 में श्योपुर जिला बना, तबसे चार डीएम भी इस बंगले में रह चुके हैं. भारत में लगातार बुजुर्गों के प्रति बढ़ रहे अपराध के बीच ये एक बहुत ही खुशी देने वाली घटना है. ऐसे ही हम अपने बुजुर्गों को लेकर संवेदनशील हो जाएं तो समाज उनके अनुभवों से फायदा उठा सकेगा. और दुनिया थोड़ी और खूबसूरत हो जाएगी.

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