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भीम आर्मी चीफ़ आज़ाद को ज़मानत देते हुए जज ने टैगोर की ये कविता क्यों सुना दी?

इस कविता का अंग्रेज़ी वर्जन ख़ूब चला

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16 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 16 जनवरी 2020, 07:21 AM IST)
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जिस कविता का ज़िक्र कोर्ट में हुआ, वो भले ही बांग्ला में लिखी गई हो, लेकिन उसका अंग्रेज़ी वर्जन ख़ूब चला
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दिल्ली की अदालत ने 15 जनवरी, बुधवार को एक मामले में भीम आर्मी चीफ़ चंद्रशेखर आजाद को ज़मानत दे दी. वो भी रवीन्द्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कविता 'व्हेयर द माइंड इज विदाउट फियर' का पाठ करते हुए. अदालत ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है, जिसमें सरकार कटौती नहीं कर सकती है.

एडिशनल सेशन जज कामिनी लॉ ने कहा, “1900 की शुरुआत में जब अंग्रेज फूट डालो, राज करो की नीति अपना रहे थे, तब टैगोर ने ऐसे राष्ट्र की कल्पना की, जहां लोगों के मन में कोई डर न हो. सभी को शिक्षा मिले और भेदभाव की दीवारें न बनाई जाएं”


# जज ने और क्या कहा

एडिशनल सेशन जज कामिनी लॉ ने ये भी कहा, 'लोकतंत्र में हमें अधिकार है शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन का और सरकार इसे नागरिकों से छीन नहीं सकती. हमारा संविधान कर्तव्य और अधिकार, दोनों की बात करता है. इसलिए अपने अधिकार के तौर पर जब हम शांति से विरोध प्रदर्शन कर रहे हों, तो हमें अपने कर्तव्य की भी याद रहनी चाहिए. किसी के प्रदर्शन के अधिकार से किसी दूसरे नागरिक के अधिकारों में बाधा नहीं आनी चाहिए.'


बांग्ला में लिखी टैगोर की वो कविता जिसका ज़िक्र हुआ है. पहले ये कविता 'चित्तो जेथा भोयशून्य ...' बांग्ला में लिखी थी जिसे बाद में गीतांजली संग्रह की बाक़ी कविताओं के साथ ही अंग्रेज़ी में लिखा गया. हालांकि अंग्रेज़ी वाला अनुवाद ही लोगों के बीच में मशहूर हुआ.
बांग्ला में लिखी टैगोर की वो कविता जिसका ज़िक्र हुआ है. पहले ये कविता 'चित्तो जेथा भोयशून्य ...' बांग्ला में लिखी थी जिसे बाद में गीतांजली संग्रह की बाक़ी कविताओं के साथ ही अंग्रेज़ी में लिखा गया. हालांकि अंग्रेज़ी वाला अनुवाद ही लोगों के बीच में मशहूर हुआ.

# क्या है मामला?

चंद्रशेखर आजाद के संगठन ने 20 दिसंबर को पुलिस की अनुमति के बिना CAA के खिलाफ जामा मस्जिद से जंतर-मंतर तक मार्च का आयोजन किया था. इस मामले में गिरफ्तार अन्य 15 लोगों को अदालत ने 9 जनवरी को जमानत दे दी थी.

आजाद की जमानत याचिका वकील महमूद प्राचा के जरिये दाखिल की गई थी. इसमें कहा गया था कि एफआईआर में आजाद की कोई विशेष भूमिका का जिक्र नहीं है. साथ ही इसका कंटेंट ‘अटकलों’ और ‘संदेह’ पर आधारित है, जबकि वो शांति कायम रखने की कोशिश कर रहे थे.

भीम आर्मी चीफ ने अपनी याचिका में कहा था कि वह मामले की जांच में पूरा सहयोग करना चाहते हैं. साथ ही वे न तो किसी सबूत से छेड़छाड़ नहीं करेंगे, न ही किसी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश करेंगे.

चलते-चलते आप टैगोर की वो कविता भी पढ़ लीजिए, जिसका जिक्र जज ने किया.
Where the mind is without fear and the head is held high Where knowledge is free Where the world has not been broken up into fragments By narrow domestic walls Where words come out from the depth of truth Where tireless striving stretches its arms towards perfection Where the clear stream of reason has not lost its way Into the dreary desert sand of dead habit Where the mind is led forward by thee Into ever-widening thought and action Into that heaven of freedom, my Father, let my country awake.


वीडियो देखें:

दिल्ली चुनावः AAP की लिस्ट आने के बाद टिकट न पाने वाले विधायक ने आरोप लगाए हैं

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