एक वाक्य से फैला मुसलमानों को नौकरी न देने का कंफ्यूजन?
अगर आरटीआई का जवाब असली है तो 'लल्लन' को लगता है कि यह भ्रम शायद एक वाक्य की अस्पष्टता की वजह से हुआ हो.
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फोटो - thelallantop
पत्रकार को उठा लिया गया है. पुष्प शर्मा नाम है. उन्होंने ही वह खबर लिखी थी कि मोदी सरकार की आयुष मिनिस्ट्री मुसलमानों को नौकरी देने से मना कर रही है. दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को पूछताछ के लिए पत्रकार पुष्प शर्मा को हिरासत में ले लिया.
पुष्प ने यह खबर एक आरटीआई से मिले जवाब के आधार पर लिखी थी. लेकिन खबर को आयुष मिनिस्ट्री ने न सिर्फ खारिज किया था, बल्कि दिल्ली पुलिस से इसकी शिकायत भी की थी. मिनिस्ट्री ने इसे 'फर्जी' आरटीआई बताया था.
पुष्प शर्मा की खबर 'द मिली गैजेट' में छपी थी और उसका हवाला देते हुए बाकी मीडिया ने भी इसे छापा था. अगर आरटीआई का जवाब असली है तो 'लल्लन' को लगता है कि यह भ्रम शायद एक वाक्य की अस्पष्टता की वजह से हुआ हो.
आरटीआई के जवाब में लिखा है कि कुल 711 मुस्लिम उम्मीदवारों ने विदेशों के शॉर्ट टर्म असाइनमेंट के लिए अप्लाई किया. आगे लिखा है,
कंफ्यूजन यहीं से फैला लगता है. इस वाक्य को ट्रांसलेट करें तो इस तरह होगा.
हो सकता है आरटीआई का जवाब देने वाले अधिकारी लिखना चाहते हों कि सरकारी नीति के मुताबिक, किसी मुस्लिम (या हिंदू) कैंडिडेट को इनवाइट नहीं किया गया. सरकारी नीति (नियमों) के अनुरूप किसी मुस्लिम कैंडिडेट को सेलेक्ट नहीं किया गया. यानी जो नियम हैं, उनके अनुरूप चुने जाने के काबिल नहीं समझा गया और इसलिए विदेश नहीं भेजा गया. जवाब लिखने वाले ने तीन चीजें एक ही वाक्य में कह दी हैं. इससे हुआ ये है कि वाक्य के शुरू में लिखा गया 'सरकारी नीति के मुताबिक' तीनों बातों के संबंध में कहा गया लगता है. ये सिर्फ हमारा अनुमान है. हो सकता है कि ऐसा हुआ हो. हमने जवाब को दो बार पढ़ा तो ऐसा लगा. वरना कोई पत्रकार करियर दांव पर लगाकर इतना बड़ा झूठा दावा क्यों करेगा. 'द मिली गैजेट' ने अपने फेसबुक पेज पर पुष्प के हिरासत की खबर इस तरह लिखी है: कोटला मुबारकपुर पुलिस स्टेशन से होने का दावा करने वाली एक पुलिस टीम ने पत्रकार पुष्प शर्मा को शाम 6:30 बजे लाजपत नगर के उनके घर से हिरासत में ले लिया. पुष्प शर्मा को 'द मिली गैजेट' और दूसरे मीडिया आउटलेट, पोर्टल और चैनलों पर छपी एक स्टोरी के सिलसिले में अरेस्ट किया गया है. यह आयुष मिनिस्ट्री के उस आरटीआई जवाब के बारे में था, जिसमें कहा गया था कि मिनिस्ट्री ने किसी मुस्लिम योगा ट्रेनर की भर्ती नहीं की गई. आयुष मिनिस्ट्री का दावा है कि आरटीआई का जवाब फर्जी है लेकिन पत्रकार पुष्प शर्मा अड़े हुए हैं कि जवाब मिनिस्ट्री से ही आया था.
'As per government policy- No muslim candidate was invited, selected or send abroad.'
कंफ्यूजन यहीं से फैला लगता है. इस वाक्य को ट्रांसलेट करें तो इस तरह होगा.
'सरकार की नीति के मुताबिक- किसी मुस्लिम कैंडिडेट को इनवाइट, सेलेक्ट नहीं किया गया. न ही विदेश भेजा गया.'
हो सकता है आरटीआई का जवाब देने वाले अधिकारी लिखना चाहते हों कि सरकारी नीति के मुताबिक, किसी मुस्लिम (या हिंदू) कैंडिडेट को इनवाइट नहीं किया गया. सरकारी नीति (नियमों) के अनुरूप किसी मुस्लिम कैंडिडेट को सेलेक्ट नहीं किया गया. यानी जो नियम हैं, उनके अनुरूप चुने जाने के काबिल नहीं समझा गया और इसलिए विदेश नहीं भेजा गया. जवाब लिखने वाले ने तीन चीजें एक ही वाक्य में कह दी हैं. इससे हुआ ये है कि वाक्य के शुरू में लिखा गया 'सरकारी नीति के मुताबिक' तीनों बातों के संबंध में कहा गया लगता है. ये सिर्फ हमारा अनुमान है. हो सकता है कि ऐसा हुआ हो. हमने जवाब को दो बार पढ़ा तो ऐसा लगा. वरना कोई पत्रकार करियर दांव पर लगाकर इतना बड़ा झूठा दावा क्यों करेगा. 'द मिली गैजेट' ने अपने फेसबुक पेज पर पुष्प के हिरासत की खबर इस तरह लिखी है: कोटला मुबारकपुर पुलिस स्टेशन से होने का दावा करने वाली एक पुलिस टीम ने पत्रकार पुष्प शर्मा को शाम 6:30 बजे लाजपत नगर के उनके घर से हिरासत में ले लिया. पुष्प शर्मा को 'द मिली गैजेट' और दूसरे मीडिया आउटलेट, पोर्टल और चैनलों पर छपी एक स्टोरी के सिलसिले में अरेस्ट किया गया है. यह आयुष मिनिस्ट्री के उस आरटीआई जवाब के बारे में था, जिसमें कहा गया था कि मिनिस्ट्री ने किसी मुस्लिम योगा ट्रेनर की भर्ती नहीं की गई. आयुष मिनिस्ट्री का दावा है कि आरटीआई का जवाब फर्जी है लेकिन पत्रकार पुष्प शर्मा अड़े हुए हैं कि जवाब मिनिस्ट्री से ही आया था.

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