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कन्हैया केस: 'देशभक्त' सिरफिरों ने कोर्ट में दी बहन** गाली

कन्हैया को कोर्ट ने 2 मार्च तक की न्यायिक हिरासत में भेजा. बस्सी बोले- कन्हैया की जमानत का पुलिस नहीं करेगी विरोध.

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17 फ़रवरी 2016 (अपडेटेड: 17 फ़रवरी 2016, 02:32 PM IST)
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पेशी के दौरान कन्हैया कुमार को ले जाते हुए दिल्ली पुुलिस
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दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने जेएनयू छात्रसंघ प्रेसिडेंट कन्हैया कुमार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. कन्हैया कुमार और पत्रकारों के साथ बुधवार को कोर्ट में हुई मारपीट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए कोर्ट परिसर को खाली कराने का आदेश दिया. कोर्ट ने पांच वकीलों को भी पटियाला हाउस कोर्ट भेजा. वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि कन्हैया कुमार की जान को गंभीर खतरा था. कोर्ट परिसर के बाहर कन्हैया कुमार की पिटाई भी की गई. सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की टीम में पटियाला हाउस कोर्ट गए वकील राजीव धवन को बहन** की गाली दी गई. राजीव धवन ने कहा, 'हमें पाकिस्तान का दल्ला कहा गया.'  कन्हैया कुमार ने चिट्ठी लिखकर कहा, 'मुझे देश के कानून और संविधान में पूरा यकीन है. अगर मेरे खिलाफ कोई सबूत मिलता है तो मुझे जेल भेज दें.' KANHAIYAA LETTER 2 मार्च तक जेल में रहेंगे कन्हैया कन्हैया कुमार 2 मार्च तक तिहाड़ जेल में रहेगा. कन्हैया कुमार ने कोर्ट में कहा, 'मेरे साथ कोर्ट परिसर में मारपीट हुई.' कन्हैया कुमार के वकील पटियाला हाउस कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे. दिल्ली पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी ने कहा, 'कन्हैया कुमार की बेल का पुलिस विरोध नहीं करेगी. वकील कोर्ट के ऑफिसर होते हैं, हैवी फोर्स के इस्तेमाल से हालात बिगड़ सकते थे.' पटियाला हाउस कोर्ट से तिहाड़ ले जाते वक्त कोर्ट परिसर में करीब 150 वकील रास्ते में खड़े रहे, जिनके हटने के बाद ही कन्हैया को तिहाड़ ले जाया जा सका. https://twitter.com/PTI_News/status/699916774897090560 https://twitter.com/PTI_News/status/699915932039139328 https://twitter.com/PTI_News/status/699904866450190336 पटियाला हाउस कोर्ट ने जेल सुप्रीटेंडेंट को कन्हैया कुमार की सिक्योरिटी का ध्यान रखने के लिए कहा है. कन्हैया केस में विवादित बयान देने वाले बीएस बस्सी 29 फरवरी को रिटायर हो रहे हैं. बस्सी के बाद सीनियर IPS ऑफिसर आलोक वर्मा दिल्ली के कमिश्नर होंगे. https://twitter.com/PTI_News/status/699963072434180096 https://twitter.com/ANI_news/status/699903948673544192 इससे पहले सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि कन्हैया के साथ मारपीट हुई है, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए  कन्हैया केस में तुरंत सुनवाई रोकने के लिए कहा. https://twitter.com/PTI_News/status/699915009153826816   SC ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी को भी तलब किया. साथ ही दिल्ली पुलिस के वकील से रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा है. https://twitter.com/PTI_News/status/699891692783054848 https://twitter.com/ANI_news/status/699897856157614084 https://twitter.com/PTI_News/status/699894125315796992 इससे पहले घटना से गुस्साए 'देशभक्त' वकीलों ने पटियाला हाउस कोर्ट के बाहर बुधवार को एक बार फिर एक पत्रकार से मारपीट की. पत्रकार 'फर्स्टपोस्ट' से जुड़े हैं और उनका नाम तारिक अनवर है. https://twitter.com/ANI_news/status/699868019489505280 https://twitter.com/ANI_news/status/699871656177577984 पत्रकार तारिक अनवर का कहना है कि मंगलवार को भी जब वकील मारपीट कर रहे थे, पुलिस वहां मौजूद होने के बाद भी मूकदर्शक बनी हुई थी. https://twitter.com/ANI_news/status/699871562254589953 यहां वकीलों के दो गुट मौजूद थे. एक कन्हैया के पक्ष में था और एक उनके विरोध में. बताया जा रहा है कि जिन लोगों ने एक दिन पहले CPI वर्कर्स से मारपीट की थी, बुधवार को उन्होंने ही पत्रकार तारिक अनवर पर हमला किया. https://twitter.com/ANI_news/status/699870072991412224 https://twitter.com/ANI_news/status/699868897621639168 https://twitter.com/ANI_news/status/699867239571283972 https://twitter.com/ANI_news/status/699864851510796288

कोर्ट में पेशी के दौरान वकील साहब ने लगाए वंदे मातरम के नारे!

उधर सुप्रीम कोर्ट में कन्हैया की पेशी के दौरान बुधवार को एक वकील साहब की देशभक्ति उफान मार गई. कन्हैया का केस लड़ रहे प्रशांत भूषण अपनी बात रख रहे थे, तभी बीच कार्यवाही वकील राजीव यादव ने 'वंदे मातरम' के नारे लगा दिए. जस्टिस चेकमेश्वर ने सिक्योरिटी से उन्हें कोर्टरूम से बाहर ले जाने को कहा. जस्टिस चेकमेश्वर ने कहा कि वकीलों की मौजूदगी से ज्यादा यहां मीडिया के लोगों का होना जरूरी है क्योंकि वे लोगों तक बात पहुंचाते हैं. हालांकि बाद में वकील राजीव यादव ने माफी मांग ली.

बस्सी बोले, 'या PTI की मान लो या हमारी'

दिल्ली पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी ने कहा कि उनके पास कन्हैया कुमार के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं और उन्हें अभी क्लीन चिट नहीं दी गई है. उन्होंने कहा कि जानकारी के मुताबिक, जेएनयू छात्रों के साथ कुछ आउटसाइडर भी मौजूद थे. बस्सी ने कहा, 'अगर पीटीआई कोई खबर चलाता है तो वो आप नजरअंदाज कर सकते हैं. आप पीटीआई की खबर मान लो या जो इनवेस्टिगेशन कर रहा है उसकी.' उन्होंने कहा कि उन पर जो उंगली उठा रहा है वो नासमझ है और फिर इस मौके पर कवि प्रदीप को भी याद किया. https://twitter.com/ANI_news/status/699854052813737984

चिट्ठी से एक नाम कटा, किसका?

उधर अब वो लेटर सामने आया है जिसमें JNU प्रशासन से इवेंट की इजाजत मांगी गई थी. इसमें लिखा गया है कि 'पोएट्री रीडिंग' का इवेंट होगा. कुल 4 लोगों ने यह इजाजत मांगी थी, जिनमें पीएचडी स्टूडेंट उमर खालिद भी है. उमर खालिद अभी जेएनयू से फरार बताया जा रहा है. JNU permisssion1 JNU permisssion2 हालांकि इस लेटर में एक और चीज गौर करने लायक है. इसमें किसी एक स्टूडेंट का नाम और सिग्नेचर बाद में काटे गए हैं. जिससे शक होता है कि नाम काटने वाले को अंदाजा रहा होगा कि इस इवेंट में एंटी-नेशनल गतिविधियां हो सकती हैं, इसलिए उसने अपना नाम वापस ले लिया होगा.

पुलिस को मिला सबसे बड़ा सबूत!

JNU में हुई घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर तैर रहे हैं. वे कितने ऑथेंटिक हैं, पता नहीं. लेकिन 9 फरवरी की घटना का ऑथेंटिक वीडियो मौजूद जरूर है, लेकिन वह सोशल मीडिया पर नहीं है. यह वीडियो खुद JNU प्रशासन ने बनवाया था, क्योंकि इजाजत न मिलने के बाद भी ये इवेंट किया जा रहा था.
JNU ने एक सिक्योरिटी टीम को खास इसी बात के लिए भेजा था कि वो घटना का वीडियो बनाए. यह वीडियो यूनिवर्सिटी ने दिल्ली पुलिस को सौंप दिया है. माना जा रहा है कि इस जांच में यह सबसे बड़ा सबूत होगा और इसी से पता चलेगा कि किन लोगों ने भारत को तोड़ने के नारे लगाए और क्या इनमें JNUSU प्रेसिडेंट कन्हैया कुमार भी शामिल थे?
तब तक के लिए जेएनयू ने 8 छात्रों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें क्लासेस लेने से रोक दिया है. इनमें कन्हैया कुमार समेत वे पांचों स्टूडेंट शामिल हैं, जिनके खिलाफ पुलिस ने केस दर्ज किया है. हालांकि यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने तक यह टेंपरेरी कार्रवाई है. जेएनयू के प्रॉक्टर की अगुवाई में जांच चल रही है. यह कमेटी 22 फरवरी को JNU को रिपोर्ट सौंपेगी.

कन्हैया ने की दिल्ली पुलिस की मदद, नहीं लगाए नारे: सूत्र

वैसे कन्हैया से हुई पूछताछ की अंदरूनी खबर सूत्रों के हवाले से आ रही है. बताया जा रहा है कि पूछताछ में उन्होंने कहा है कि उसने आरएसएस और प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना की, लेकिन देशविरोधी नारे नहीं लगाए. कन्हैया ने कार्यक्रम के मुख्य आयोजकों को पहचानने में पुलिस की मदद की है. कन्हैया को 12 फरवरी को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. कन्हैया ने पुलिस को शुरुआती पूछताछ में बताया कि प्रेसिडेंट होने के नाते उन्हें एक दिन पहले पता चला कि DSU कोई इवेंट कराने जा रही है. लेकिन उन्हें तब यह नहीं पता था कि यहां अफजल के पक्ष या भारत के खिलाफ नारे लगाए जाएंगे. उनका दावा है कि 8 फरवरी को उनकी तबीयत खराब थी और 9 फरवरी को ज्यादातर वक्त वह सो रहे थे. 9 फरवरी की शाम AISF वर्कर्स ने उन्हें यह बताते हुए जगाया कि प्रशासन ने इवेंट की इजाजत नहीं दी है. कन्हैया को यह भी बताया गया कि मौके पर एबीवीपी और प्रोटेस्ट मार्च कर रहे छात्रों के बीच झड़प की स्थिति हो गई है.
कन्हैया शाम 5:30 बजे तक साबरमती ढाबा पहुंचे, जहां इवेंट हो रहा था. वहां नारेबाजी की जा रही थी. कन्हैया ने पुलिस से कहा कि JNUSU प्रेसिडेंट होने के नाते उन्होंने माइक लिया और वहां मौजूद भीड़ को संबोधित करने लगे. कन्हैया ने कहा कि उन्होंने आरएसएस, मोदी सरकार और उसकी नीतियों की आलोचना की लेकिन देशद्रोह की कोई बात नहीं की.
कन्हैया ने असल आयोजकों तक पहुंचने में दिल्ली पुलिस की मदद की है. उन्होंने पुलिस के DSU के चार लोगों के नाम बताए हैं. ये हैं, उमर खालिद, अनिर्बन भट्टाचार्य, रियाजुल हक और रुबीना सैफी. JNU स्टूडेंट यूनियन ने कन्हैया की रिहाई और ओपी शर्मा की गिरफ्तारी की मांग करते हुए गुरुवार को सॉलिडैरिटी मार्च बुलाया है. स्टूडेंट्स मंडी हाउस से जंतर मंतर तक मार्च करेंगे.

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