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US के तीन राष्ट्रपतियों ने ईरान जंग का ऑफर ठुकराया था, ट्रंप फंस गए, जॉन केरी ने सब बताया

एक इंटरव्यू में अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री John Kerry ने बताया कि इजरायल ने डॉनल्ड ट्रंप से पहले पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश, बराक ओबामा और जो बाइडेन के सामने ईरान युद्ध का प्रपोजल रखा था.

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23 अप्रैल 2026 (पब्लिश्ड: 11:38 AM IST)
john kerry on iran war
अमेरिका के तीन पूर्व राष्ट्रपति- जॉर्ज बुश (बाएं), बराक ओबामा और जो बाइडेन (दाएं).
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इजरायल ने ईरान युद्ध का प्रपोजल डॉनल्ड ट्रंप से पहले तीन और अमेरिकी राष्ट्रपतियों को दिया था. तब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश, बराक ओबामा और जो बाइडेन तीनों ने एक ही स्वर में जवाब दिया- 'NO' (George Bush, Barack Obama, Joe Biden). वे तीनों ईरान के खिलाफ युद्ध नहीं चाहते थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि शांति से बात करने का रास्ता अब भी बचा है. फिर आया डॉनल्ड ट्रंप का 2.0 काल, इजरायल ने प्रपोजल रखा और ट्रंप झट से मान गए. 

अमेरिका के ‘द लेट टॉक शो विथ स्टीफेन कोल्बर्ट’ में पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी मेहमान थे (US Secretary John Kerry). उन्होंने बात करते हुए कहा, 

‘इजरायल ने इससे पहले भी अमेरिका के सामने ईरान युद्ध का प्रपोजल रखा था. ये प्रपोजल अमेरिका के तीन पूर्व राष्ट्रपतियों के दौर में रखा गया. मैं उस बातचीत में शामिल था. तीनों राष्ट्रपतियों ने इजरायल के प्रपोजल को ठुकरा दिया था. उनका मानना था कि बातचीत से मसला हल किया जा सकता है.’

उन्होंने आगे इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका के लोगों से झूठ बोला गया कि ये जंग अमेरिका के लिए लड़ी जा रही है. असल में इस जंग में अमेरिका का कोई हित नहीं है. ये जंग होनी ही नहीं चाहिए थी. इससे पहले भी वियतनाम और इराक़ जंग के वक़्त भी अमेरिकियों से झूठ बोला गया था. उन्होंने आगे कहा, 

‘हमने वियतनाम और इराक़ जंग से यही सीखा कि कभी भी अपने देश के लोगों से सच नहीं छुपाना चाहिए. झूठ बोलकर किसी के बेटे और बेटियों को जंग लड़ने नहीं भेजना चाहिए. ये एक राष्ट्रपति की हार है.’

जॉन केरी ने जंग के मकसद पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि जंग के बाद ईरान में सत्ता परिवर्तन लाने की बात कही गई थी, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. अब सवाल वही है कि प्रेसिडेंट ट्रंप को इजरायल ने कैसे मनाया?

ट्रंप-नेतन्याहू की मीटिंग

द न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक रिपोर्ट में उस मीटिंग के बारे में रिपोर्ट छापी जब 'ऑपरेशन एपिक फ्युरी' को मंजूरी मिली थी (Operation Epic Fury). एनडीटीवी ने इस रिपोर्ट के हवाले से बताया कि 11 फरवरी को वाइट हाउस में हुई एक मीटिंग के दौरान इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक प्रपोजल रखा. बताया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन की स्थिति बन चुकी है और अमेरिका-इजरायल को संयुक्त सैन्य कार्रवाई करते हुए इस्लामिक गणराज्य का अंत कर देना चाहिए. इस पर डॉनल्ड ट्रंप का जवाब आया- 'sounds good to me (बढिया प्लान है).' इसके बाद इस ऑपरेशन को हरी झंडी दे दी गई. जॉन केरी ने इस मीटिंग का ज़िक्र करते हुए कहा कि इजरायल ने जो कुछ प्रिडिक्ट किया था, सब गलत निकला. 

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने उपराष्ट्रपति जेडी वांस और बेंजामिन नेतन्याहू के बीच 'फ़ोन कॉल' पर बहस हुई थी. जेडी वांस ने कहा था कि नेतन्याहू ने जब प्लान बताया तो ऐसे पेश किया जैसे ईरान में सत्ता परिवर्तन बहुत आसान हो. लेकिन उनके सारे दावे झूठे निकल गए. 

वीडियो: बराक ओबामा ने मनमोहन सिंह की तारीफ में क्या कहा था?

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