'भारत बंद' के दौरान पकौड़े वाले का ठेला पलट दिया, खौलते तेल से झुलसा
घटना जोधपुर के बालेसर के पास सोमेसर गांव की है. आरोप है कि यहां भारत बंद के समर्थकों ने जबरदस्ती लोगों की दुकानें बंद करवाईं. इसी दौरान उन्होंने पकौड़े की खुली रेहड़ी का विरोध किया. वह पकौड़े बनाने के लिए तेल गर्म कर रहा था.

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि राज्य सरकारें चाहें तो SC आरक्षण में सबकैटेगराइज़ेशन कर सकती हैं. इस आदेश के खिलाफ 21 अगस्त को भारत बंद का आयोजन किया गया. इसके चलते राजस्थान के जयपुर समेत कई जगहों पर स्कूलों की छुट्टी घोषित की गई. इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित रहीं. कई जगह बाज़ार बंद रहे. ऐसे ही जोधपुर में दुकानें बंद रहीं. जो बंद नहीं थीं, उन्हें बंद करवाया गया. इसी दौरान पकौड़े का ठेला लगाने वाला एक व्यक्ति गर्म तेल से झुलस गया. वो पकौड़े तलने के लिए तेल गर्म कर रहा था. समर्थकों ने उसे मना किया. बात नहीं मानने पर उन्होंने कथित तौर पर ठेले को पलट दिया. इससे गर्म तेल पकौड़े वाले के दोनों पैरों पर गिर गया.
आजतक से जुड़े अशोक शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक घटना जोधपुर के बालेसर के पास सोमेसर गांव की है. आरोप है कि यहां समर्थकों ने जबरदस्ती लोगों की दुकानें बंद करवाईं. इसी दौरान उन्होंने पकौड़े की खुली रेहड़ी का विरोध किया. ठेले वाले का नाम राकेश जैन है. राकेश पकौड़े बनाने के लिए तेल गर्म कर रहे थे. इतने में बंद समर्थक आए और ठेले को बंद करने के लिए उन्हें कथित तौर पर धक्का दिया. जिससे तेल से भरी हुई कढ़ाई उलट गई. राकेश के दोनों पैरों पर तेल गिर गया. उनके पैर बुरी तरह से झुलस गए.
इस घटना के बाद का एक वीडियो भी सामने आया है. इसमें दिख रहा है कि राकेश एक जगह बैठे हुए हैं. उसके दोनों पैरों पर क्रीम लगी हुई है. वीडियो में ठेला एक तरफ गिरा हुआ है. एक तरफ सिलेंडर गिरा हुआ है. चारों तरफ तेल बिखरा हुआ है. कुछ लोग राकेश की मदद कर रहे हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक इस घटना से नाराज होकर सैकड़ों व्यापारी और ग्रामीण लोगों ने वहीं पर धरना दिया. विरोध प्रदर्शन किया. घटना की जानकारी मिलने पर जिला पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह यादव, एडिशनल एसपी भोपाल सिंह लखावत, शेरगढ़ थाना प्रभारी सवाई सिंह मय जाब्ता मौके पर पहुंचे. उन्होंने घायल को अस्पताल पहुंचाया. गुस्साए गांववालों को शांत करवाया.
आजतक से बातचीत करते हुए पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. उन्हें जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा.
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 1 अगस्त को SC-ST आरक्षण को लेकर एक अहम फैसला सुनाया. उसने SC-ST आरक्षण के तहत सब-क्लासिफिकेशन को लेकर राज्य सरकारों की शक्ति को मान्यता दे दी. सीधा कहें तो अब राज्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के तहत उपजातियां तय कर सकती हैं. सात जजों की संवैधानिक बेंच ने 6-1 के बहुमत से ये फैसला दिया था. मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बेला एम त्रिवेदी, जस्टिस पंकज मिथल, जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने ये फैसला सुनाया.
साथ ही बेंच ने इसी मुद्दे पर साल 2005 के ईवी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य केस से जुड़े फैसले को खारिज कर दिया. बेंच में मौजूद 4 जजों ने SC और ST आरक्षण में क्रीमी लेयर को अलग करने की बात भी कही. बेंच ने कहा कि आरक्षण की कैटेगरी से निकलने के लिए SC-ST में क्रीमी लेयर की पहचान करना जरूरी है. आरक्षण के तहत क्रीमी लेयर उस कैटेगरी को कहा जाता है जिनकी सालाना पारिवारिक आय 8 लाख रुपये के ऊपर होती है.
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