JNU की जिस स्टूडेंट के सिर में सात टांके लगे, उसकी मां ने हौसले वाली बात बोली है
नकाबपोशों के हमले में यूनिवर्सिटी के 34 स्टूडेंट्स घायल हुए हैं.

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) कैम्पस में 5 जनवरी की शाम को जमकर बवाल हुआ. मास्कधारी कुछ गुंडों ने स्टूडेंट्स और टीचर्स को पीटा. जमकर तोड़-फोड़ मचाई. इस वारदात में करीब 34 स्टूडेंट्स घायल हुए. इनमें JNUSU की प्रेसिडेंट आइशी घोष भी शामिल हैं. उनके सिर पर गहरी चोट आई है. एम्स में भर्ती कराया गया, उन्हें पांच टांके लगे हैं. आइशी अब अस्पताल से डिस्चार्ज हो गई हैं और अब वो उन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करवाएंगी, जिनका इस पूरे मामले में हाथ है.
इधर आइशी के पैरेंट्स ने भी इस पूरे मामले पर अपनी बात रखी है. समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, आइशी के माता-पिता अपनी बेटी को पूरी तरह सपोर्ट कर रहे हैं. वो नहीं चाहते कि उनकी बेटी इस हमले से डरकर पीछे हटे.
आइशी के पिता ने कहा,
'पूरे देश में हालात बदल रहे हैं. हम डरे हुए हैं. मेरी बेटी के ऊपर हमला हुआ है. कल कोई और पीटा जाएगा. कौन जानता है. हो सकता है कि कल मुझे ही पीट दिया जाए. मैंने हमले के बाद से डायरेक्टली अपनी बेटी से बात नहीं की है. बाकी लोगों के जरिए मुझे घटना की जानकारी मिली है. शांतिपूर्ण आंदोलन काफी लंबे समय से चल रहा है. मेरी बेटी के सिर पर पांच टांके आए हैं. वो लेफ्ट मूवमेंट के साथ है. हर जगह, हर कोई लेफ्ट के मूवमेंट को रोकने की कोशिश करता है.'
आइशी की मां ने पूरे मामले में वीसी एम जगदेश कुमार के ऊपर गुस्सा निकाला है. उनके इस्तीफे की मांग की है. उन्होंने कहा है,
'वीसी को इस्तीफा दे देना चाहिए. वो कुछ नहीं कर रहे. वो स्टूडेंट्स से बात तक नहीं करते. बहुत सारी घटनाएं हो रही हैं. इस पूरे मूवमेंट में कई सारे लड़के-लड़कियां शामिल हैं. उन सभी को चोट लगी है. किसी को ज्यादा, तो किसी को कम. मैं उसे कभी भी प्रोटेस्ट छोड़ने के लिए नहीं कहूंगी.'
JNU में हुई हिंसा की जांच दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है. तीन टीमें बना दी गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक जांच शुरू हो चुकी है. वहीं पुलिस के ऊपर भी हिंसा रोकने की कोशिश न करने और ढिलाई बरतने के आरोप लग रहे हैं.
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