JNU हिंसा: ABVP के अक्षत ने कैमरे के सामने बताया- मैंने ही हमले के लिए लड़के जमा किए
उसके मुताबिक़ यह एक्शन का रिएक्शन था.
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फोटो - thelallantop
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जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी. जेएनयू में 5 जनवरी को हिंसा हुई. मास्क लगाए गुंडों ने छात्रों और टीचर्स पर हमला किया. 35 लोग घायल हुए. स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष आईशी घोष भी घायल हुईं. अब सवाल उठ रहे हैं कि ये मास्क लगाए गुंडे कौन थे. ये जानने के लिए इंडिया टुडे ने इंवेस्टिगेशन की. आइए जानते हैं इस इंवेस्टिगेशन में क्या पता चला. सर्वर रूम में हमला करने वाले कौन थे? यूनिवर्सिटी के गार्ड ने क्या कहा?
अक्षत अवस्थी
इंडिया टुडे से बातचीत करते हुए अक्षत बताते हैं कि वह फ्रेंच फर्स्ट ईयर के स्टूडेंट है. ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद्) के कार्यकर्ता हैं.
अक्षत 5 जनवरी को हुई हिंसा के एक वायरल वीडियो में दिखे थे. हेलमेट पहने. लाठी लिए. अक्षत ने इंडिया टुडे के इंवेस्टिगेशन में माना कि हेलमेट पहले वही थे. अक्षत ने बताया-
मैंने डंडा लिया हुआ था. पेरियार हॉस्टल के नजदीक कई झंडे थे. वही से डंडा लिया था. एक लड़का दाढ़ी रखे हुए था. कश्मीरी जैसा लग रहा था. मैंने उसे मारा. उसके बाद गेट तोड़ा. मैं कानपुर से आता हूं जहां गुंडई खून में है. पेरियार में सबसे पहले हमला हुआ. यह एक्शन का रिएक्शन था. मेरे एक दोस्त हैं. वह ABVP के आर्गेनाइजेशनल सेक्रेटरी हैं. मैंने उन्हें बताया कि लेफ्ट-विंग के बच्चे साबरमती हॉस्टल में मीटिंग कर रहे हैं. इसलिए साबरमती पर हमला किया गया था. मैंने ही भीड़ जमा किया था. सेनापति की तरह. 20 लोग जेएनयू के थे और 20 बाहर से बुलाए थे. लेफ्ट छात्रों को अंदाजा भी नहीं था कि एबीवीपी इस तरह पलटवार करेगा.
वीडियो देखिए.
विस्तार से पढ़िए. इंडिया टुडे के अंडरकवर रिपोर्टर ने अक्षत से पूछा, "आपके हाथ में क्या है?" उसने कहा, "ये लाठी है सर. इसे मैंने पेरियार हॉस्टल के पास लगे झंडे से निकाला था." रिपोर्टर ने पूछा, "क्या आपने किसी को मारा?" अक्षत ने स्वीकार किया, "बढ़ी हुई दाढ़ीवाला एक आदमी था. वह कश्मीरी जैसा दिख रहा था. मैंने उसे पीटा और लात मारकर दरवाजा तोड़ दिया." अक्षत ने कहा, "मैं कानपुर के ऐसे इलाके से आता हूं जहां हर गली में गुंडई आम बात हैं. हमने ये सब बहुत देखा है." अक्षत ने कहा कि यह हमला उसी दिन पेरियार हॉस्टल में वामपंथी छात्रों द्वारा कथित रूप से किए गए हमले के जवाब में किया गया था. "यह क्रिया की प्रतिक्रिया थी." कुछ ही घंटे में भीड़ को कैसे इकट्ठा किया, यह पूछने पर अक्षत ने अलग अलग कैंपसों के ABVP के पदाधिकारियों का नाम बताया. अक्षय ने विस्तार से बताया, "वे ABVP के आर्गेनाइजेशनल सेक्रेटरी हैं. मैंने उन्हें कॉल की. लेफ्ट विंग के छात्रों और अध्यापकों ने साबरमती हॉस्टल के पास एक मीटिंग रखी थी. जब वहां पर हमला किया गया, वे सभी छुपने के लिए अंदर भाग गए." उसने कहा, "वहां पर जो भी छात्र और अध्यापक खड़े थे, वे भाग गए. उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि ABVP इस तरह से जवाब देगा." रिपोर्टर ने अक्षत से पूछा, "आप बता रहे थे कि ABVP के 20 कार्यकर्ता जेएनयू के थे और 20 बाहर से बुलाए गए थे." अक्षत ने दावा किया, "मैं आपको बता सकता हूं क्योंकि सारी भीड़ मैंने ही एकत्र की थी. उनके पास इतना दिमाग नहीं है. आपको पता है, इसके लिए आपको किसी सुपरिंटेंडेंट या कमांडर की तरह काम करना होता है. जो करना है वह क्यों करना है और कहां करना है. मैंने उन्हें हर चीज के बारे में गाइड किया, कहां उन्हें छुपना है, कहां जाना है. मैंने उन्हें नियोजित ढंग से सब समझा दिया था. मेरी कोई खास पोजीशन नहीं है, लेकिन उसने मेरी बात को गौर से सुना." उसने कहा, "मैंने सिर्फ उन्हें एकत्र ही नहीं किया बल्कि उनके गुस्से को सही दिशा में निकालने में मदद की." इस हिंसा के अगले दिन जब ABVP ने जेएनयू कैंपस में प्रदर्शन किया, तब भी इंडिया टुडे की टीम ने अक्षत को अपने कैमरे में कैद किया. फ्रेंच प्रोग्राम के फर्स्ट ईयर में ही पढ़ने वाले एक और छात्र ने पुष्टि की कि 5 जनवरी को हुए हमले में अक्षत की संलिप्तता थी. रोहित शाह नाम के छात्र ने स्वीकार किया कि जब अक्षत हमले की तैयारी कर रहे थे तब उसने अपना हेलमेट अक्षत को दिया था. शाह ने कहा, "जब आप शीशे तोड़ते हैं तो यह (हेलमेट) सुरक्षा के लिए जरूरी था." उसने कहा कि भीड़ हॉस्टल में एबीवीपी के एक कमरे में एकत्र हुई, जिसके बाद उसने उन्हें हॉस्टल के वासियों के बारे में जानकारी दी कि कौन किस संगठन का है. शाह ने कहा, "यह हमला जिस तरह से किया गया, अगर ऐसा नहीं होता तो संभव नहीं था. उन्हें (वामपंथी छात्रों को) एबीवीपी की ताकत का अंदाजा नहीं लग पाया." अपने कबूलनामे में अक्षत ने दावा किया कि ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारी ने भीड़ को लेफ्ट के छात्रों को पीटने के लिए प्रात्साहित किया. अक्षत ने दावा किया, "वे (पुलिस) कैंपस के बाहर नहीं, बल्कि अंदर थे. पेरियार हॉस्टल में (पहले की झड़प में) एक लड़के को चोट लगी थी, उसके बाद मैंने खुद पुलिस को बुलाया था. वह मनीष (एक छात्र) से मिले और कहा, 'उन्हें मारो, उन्हें मारो'." भीड़ ने अपना चेहरा क्यों ढंका था, यह पूछने पर इस छात्र ने कहा कि यह तरीका लेफ्ट के हमला करने के तरीके की ही नकल था. "हमने उनकी नकल की. लेफ्ट के लोग चेहरा ढंक कर आए थे. इसलिए हमने कहा कि हम भी चेहरा ढंक लेते हैं." अक्षत ने भीड़ में मौजूद चेहरा ढंके हुए एक लड़की के अलावा अन्य कई लोगों की भी पहचान की. इंडिया टुडे पुलिस के समक्ष संदिग्ध लोगों की पहचान जाहिर कर सकता है. इस पूरे मामले पर ABVP की जनरल सेक्रेटरी निधि त्रिपाठी ने ट्वीट कर कहा है-#JNUTapes | JNU's 1st year student confesses to leading attacks on Jan 5 Watch LIVE with @rahulkanwal: https://t.co/4fqxBVUizLpic.twitter.com/zABFDyknuj
— India Today (@IndiaToday) January 10, 2020
अक्षत अवस्थी न तो कोई पदाधिकारी और न ही एबीवीपी के कार्यकर्ता हैं, जैसा कि इंडिया टुडे ने दावा किया है. यह इंडिया टुडे द्वारा हमें बदनाम करने वाला कैंपेन है. यह दिल्ली पुलिस के उन सारे फैक्ट्स के उल्टा है जिसमें पुलिस ने हिंसा के पीछे लेफ्ट का हाथ बताया. यह शर्मनाक है कि दिल्ली पुलिस ने स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष आईशी घोष को आरोपी बनाया है और इंडिया टुडे उसे दोषमुक्त बता रही है.इस ट्वीट को बीजेपी आईटी सेल के मुखिया अमित मालवीय ने भी रिट्वीट किया है.
वीडियो- JNU हिंसा: ABVP के लड़कों ने कहा, योगेंद्र यादव यहां क्यों आए?Akshat Awasthi is neither an office bearer, nor a karyakarta of ABVP, as claimed by @IndiaToday. This is a smear campaign run by India Today to deviate everyone from the facts put forth by @DelhiPolice proving #LeftBehindJNUVoilence.
- National General Secretary @nidhitripathi92 — ABVP (@ABVPVoice) January 10, 2020

