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JNU हिंसा: वार्डन ने कहा- 4 बजे भीड़ देखी तो पुलिस को फोन किया लेकिन मदद नहीं मिली

5 जनवरी को सबसे ज्यादा हिंसा साबरमती हॉस्टल में हुई, यहां के वार्डन की रिपोर्ट क्या कहती है?

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12 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 12 जनवरी 2020, 07:16 AM IST)
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बायीं तरफ साबरमती हॉस्टल और दायीं तरफ नकाबपोश. फाइल फोटो: India Today
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5 जनवरी को JNU में हुई हिंसा का सबसे ज़्यादा असर साबरमती हॉस्टल में हुआ. अब यहां के दो वार्डन ने कहा है कि शाम 4 बजे लाठी-डंडों और रॉड के साथ एक भीड़ उन्होंने देखी, जो हॉस्टल से निकल रही थी. उनका कहना है कि पुलिस और JNU सिक्योरिटी दोनों को अलर्ट किया गया लेकिन चार घंटों तक कोई मदद नहीं पहुंची.
इंडियन एक्सप्रेस
की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मेस वार्डन डॉ. स्नेहा और साफ-सफाई वार्डन डॉ. राज यादव ने कहा कि रात 8 बजे तक पुलिस या सिक्योरिटी वाले नहीं आए. वार्डन ने जांच की मांग की है.
सीनियर वार्डन रामावतार मीणा और वार्डन (रीक्रिएशन) प्रकाश चंद्रा साहू ने इस घटना के बाद इस्तीफा दे दिया था. हालांकि वीसी जगदीश कुमार ने कहा कि छात्रों ने दोनों के ऊपर इस्तीफे का दबाव बनाया. दोनों का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है. यूनिवर्सिटी ने मामले की जांच के लिए इंटरनल कमिटी बनाई है, जिसमें डॉ. स्नेहा को अभी बुलाया नहीं गया है. चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर नवीन यादव ने मामले पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया.
Jnu
JNU में 5 जनवरी के दिन हुई हिंसा के दौरान साबरमती हॉस्टल में जमकर तोड़-फोड़ हुई थी. फोटो- PTI

वार्डन ने अपनी रिपोर्ट में क्या लिखा
स्नेहा और राज यादव ने अपनी रिपोर्ट में लिखा,
40-50 लोगों की भीड़ नकाब लगाकर हॉस्टल से बाहर आती देखी गई...हॉस्टल के बाहर खड़े लोगों ने बताया कि भीड़ हॉस्टल के लोगों को खोज रही थी लेकिन जब लोग कमरों में नहीं मिले तो भीड़ चली गई. भीड़ के हाथ में सरिया, डंडे वगैरह थे. 100 नंबर पर तुरंत पुलिस को फोन किया गया. तब तक कोई हिंसा नहीं हुई थी. साढ़े चार बजे के आस-पास दो वार्डन रामावतार मीणा और प्रकाश साहू हॉस्टल के दफ्तर आए और पुलिस को कॉल करने लगे. स्थिति गंभीर लग रही थी इसलिए 5.30 बजे तीन वार्डन की मीटिंग हुई.
वार्डन का कहना है कि पुलिस के अलावा चीफ सिक्योरिटी ऑफिसर से एक्स्ट्रा सिक्योरिटी मांगी गई और गार्ड्स से चौकन्ना रहने को कहा गया. स्नेहा का कहना है कि तीन घंटे बाद जब भीड़ लौटी, नकाबपोशों की संख्या बढ़ गई थी.
रिपोर्ट के मुताबिक, 7 बजे के आस-पास फिर से भीड़ (150 के करीब नकाबपोश जिसमें लड़के-लड़कियां शामिल थे) हॉस्टल में घुसे. भीड़ लड़कों के अलावा लड़कियों के विंग में भी घुसी. भीड़ ने स्टूडेंट्स पर हमला किया और उनके कमरों में तोड़-फोड़ की. बॉयज विंग में 18 कमरों में तोड़-फोड़ हुई और एक दृष्टिबाधित छात्र के अलावा कई छात्रों पर हमला हुआ. मेन गेट और मेस गेट के शीशे को तोड़ा गया. गर्ल्स विंग में तोड़-फोड़ नहीं हुई. रिपोर्ट कहती है कि दूसरे हॉस्टल्स के करीब 20 छात्र स्नेहा के घर पर रुके, जो साबरमती हॉस्टल के बगल में है. स्नेहा के घर की एक खिड़की से हॉस्टल का मेन गेट दिखता है.
JNU में पिछले कई हफ्तों से फ़ीस बढ़ोत्तरी के खिलाफ़ प्रोटेस्ट चल रहा है. (फोटो: पीटीआई)
JNU में पिछले कई हफ्तों से फ़ीस बढ़ोत्तरी के खिलाफ़ प्रोटेस्ट चल रहा था. (फोटो: पीटीआई)

रिपोर्ट में ये भी लिखा गया है,
छात्रों की शिकायत थी कि भीड़ के हाथों में एसिड और पेपर स्प्रे भी था. घटना की गंभीरता को देखते हुए हॉस्टल के वार्डन जांच की मांग करते हैं...हॉस्टल की जो प्रॉपर्टी नष्ट हुई है, उसे ठीक किए जाने की ज़रूरत है.
वार्डन यादव का कहना है कि साहू ने उन्हें बताया तो वो 7.30 बजे के आस-पास कैंपस भागीं.
हॉस्टल में कोई 'बाहरी' मिलने पर होगा ऐक्शन
वहीं हिंसा के बाद JNU प्रशासन ने एक सर्कुलर ज़ारी किया है.  JNU के हॉस्टल्स में 'बाहरी' लोगों को लेकर ऐक्शन होगा. डीन उमेश ए कदम ने सभी सीनियर वॉर्डन को ज़ारी सर्कुलर में कहा है कि अगर कोई बाहरी/अनधिकृत छात्र/मेहमान JNU के किसी हॉस्टल में पाया गया तो संबंधित छात्र के ख़िलाफ़ प्रशासनिक नियमों के हिसाब से ज़रूरी ऐक्शन लिया जाएगा. इसमें कहा गया है कि 7 जनवरी को वसंत कुंज थाने की तरफ से पत्र मिला, जिसमें रजिस्ट्रार को सुझाव दिया गया है कि इस बात का ऑडिट कराया जाए कि हॉस्टल में कोई बाहरी तो नहीं रह रहा है. ऐसा पाए जाने पर तुरंत थाना प्रभारी को बताया जाए.


JNUSU अध्यक्ष आईशी घोष ने दिल्ली पुलिस को हिंसा की जानकारी 3 बजे दे दी थी

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