JNU हिंसा पर क्या बोले वहीं से पढ़े नोबेल विजेता अभिजीत बैनर्जी
अभिजीत और मोदी सरकार में मंत्री निर्मला सीतारमण एक ही लाइन पर दिखे.
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5 जनवरी की शाम JNU में हिंसा हुई. बाईं ओर की तस्वीर इसी हिंसा में शामिल नकाबपोश हमलावरों की बताई जा रही है. दाहिनी तरफ हैं अर्थशास्त्र में नोबेल जीतने वाले अभिजीत बैनर्जी, जो कि ख़ुद भी JNU से पढ़े हुए हैं. यूनिवर्सिटी में हुई घटना पर अभिजीत ने कहा कि हिंसा कभी JNU की परंपरा का, उसकी संस्कृति का हिस्सा नहीं रही (फोटो: PTI+इंडिया टुडे)
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5 जनवरी की शाम JNU में हुई हिंसा में सबसे परेशान करने वाली बात क्या है? ये कि आपसी विवाद और असहमतियों के निपटारे के लिए युवा हिंसा का सहारा ले रहे हैं. ये कहा है नोबेल विजेता अभिजीत बैनर्जी ने.
6 जनवरी को अभिजीत बैनर्जी और एस्तेय डिफ्लो 'इंडियन एक्सप्रेस' के प्रोग्राम 'एक्सप्रेस अड्डा' में पहुंचे थे. अभिजीत और एस्तेय, दोनों पति-पत्नी हैं. दोनों को अर्थशास्त्र में नोबेल मिला है. वहां हुई बातचीत के क्रम में अभिजीत से 5 जनवरी को JNU में हुई हिंसा पर भी सवाल पूछे गए. इस पर बोलते हुए अभिजीत बैनर्जी ने कहा-
JNU हिंसा: प्रत्यक्षदर्शी, छात्रसंघ, ABVP और दिल्ली पुलिस क्या कह रही है?
नीतियों के भविष्य के लिहाज से देखें, तो हिंसा का रास्ता पकड़ना, हिंसा पर आमादा हो जाना बेहद डराने वाली बात है. इसकी वजह आज की युवा पीढ़ी के लिए चिंता होती है. किसी संघर्ष, किसी मसले को सुलझाने का उनका तरीका ये है कि बाकी लोगों को पीट दो. मेरे लिए असली परेशान करने वाली बात यही है.
सिटिज़नशिप ऐक्ट समेत कई मामलों में मोदी सरकार से अलग राय रखने वाले और कई बार केंद्र की नीतियों की आलोचना करने वाले अभिजीत बैनर्जी की JNU की परंपरा पर जो राय है, वो वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण से मिलती है. दोनों JNU से पढ़े हैं और दोनों का मानना है कि असहमतियों को लेकर हिंसा पर उतारू हो जाना, ये JNU की परंपरा नहीं. JNU के अपने दिनों को याद करते हुए अभिजीत बैनर्जी बोले-Nobel laureate Abhijit Banerjee comments on #JNUViolencehttps://t.co/SznFHTfRwN
— India Today (@IndiaToday) January 6, 2020
साल 1983 में मुझे तिहाड़ जेल भेजा गया था. क्योंकि श्रीमती गांधी (इंदिरा) को लगता था कि JNU में बहुत घमंड, बहुत हेकड़ी है. JNU में धुर विरोधी होने की लंबी परंपरा है. लेकिन जैसा कि कल निर्मला सीतारमण ने कहा, JNU की ख़ासियत यही थी कि ये जगह असहमतियां रखने वालों के लिए भी सुरक्षित थी. ये बहुत जीवंत था, बहुत सारी विविधताओं से भरा था.अभिजीत ने जिस संदर्भ में निर्मला सीतारमण का ज़िक्र किया, वो भी 5 जनवरी को JNU में हुई हिंसा से जुड़ी है. हिंसा की ख़बरें आने के बाद वित्तमंत्री ने अपने एक ट्वीट में लिखा था-
JNU से ख़ौफ़नाक तस्वीरें आ रही हैं. मैं जिस JNU को जानती हूं और जो JNU मुझे याद है, वहां घनघोर बहसें हुआ करती थीं. प्रचंड राय दी जाती थी. मगर कभी हिंसा नहीं होती थी. मैं आज हुई घटनाओं की पुरजोर निंदा करती हूं. ये सरकार, पिछले कुछ हफ़्तों में जो भी कहा गया हो उनके बावजूद, ये चाहती है कि विश्वविद्यालय हर छात्र के लिए सुरक्षित हो.
इसी लाइन पर बोलते हुए अभिजीत बैनर्जी ने कहा-Horrifying images from JNU — the place I know & remember was one for fierce debates & opinions but never violence. I unequivocally condemn the events of today. This govt, regardless of what has been said the past few weeks, wants universities to be safe spaces for all students.
— Nirmala Sitharaman (@nsitharaman) January 5, 2020
JNU का चरित्रचित्रण हमेशा यूं किया जाता है कि ये एक तरह से लेफ्ट का गढ़ है, मगर उसी जगह से निर्मला सीतारमण, एस जयशंकर, सीताराम येचुरी, प्रकाश करात और योगेंद्र यादव सभी पढ़कर निकले. बंगाल के मिडिल-क्लास परिवार से ताल्लुक रखने के कारण मैं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को जानता नहीं था. मगर JNU कैंपस में मेरी उनसे मुलाकात हुई. वो भी बातचीत करते थे, मगर विनम्रता के साथ. JNU में पहली दफ़ा मुझे इतनी अलग-अलग तरह की राय देखने और जानने को मिली. मगर मुझे लगता है कि विचारों की असहमति के बावजूद हम घुल-मिलकर रहते थे.मतभेदों और असहमतियों को लेकर अभिजीत बैनर्जी ने आगे कहा-
ज़रूरी है कि हमारे यहां ऐसा माहौल हो जहां असहमत होने के बावजूद संवाद हो सके. हमारे लिए ये ज़रूरी है कि असहमतियों के लिए, विरोध के लिए भी जगह हो. JNU जैसे प्रतिष्ठान के लिए मायने ये रखता कि आप यहां दोनों हो सकते हैं. वो भी जो किसी मसले पर बहुत पुरजोर राय रखता हो. और साथ-ही-साथ वो उस मसले पर बिना हिंसक हुए बौद्धिक तरीके से उसका समाधान खोज सके. बिना हिंसक हुए बौद्धिक तरीके से उस मसले को समझा सके.
JNU में क्या हुआ? 5 जनवरी की शाम कुछ नकाबपोश हमलावरों ने JNU कैंपस में घुसकर हिंसा की. कई छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया गया. दिल्ली पुलिस इस हिंसा की जांच कर रही है. ख़बरों के मुताबिक, शाम को हुई हिंसा से पहले ही JNU में माहौल तनावपूर्ण था. बढ़ी हुई फीस को लेकर पिछले करीब तीन महीने से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. ऐसे में 1 जनवरी को अगले सेमेस्टर के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हुई. 5 जनवरी आख़िरी तारीख़ थी रजिस्ट्रेशन की. लेफ़्ट संगठनों के नियंत्रण वाले JNU छात्रसंघ ने रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का बहिष्कार करने का फैसला किया. ऐसे में जो छात्र बढ़ी हुई फीस के बावजूद रजिस्ट्रेशन करवा रहे थे, उन्हें रोका गया. इसे लेकर कैंपस के लेफ़्ट और राइट खेमे में तनाव बढ़ा. आरोप है कि 5 जनवरी की शाम हुई हिंसा से पहले भी एक राउंड हिंसा हो चुकी थी. कहा जा रहा है कि तब लेफ़्ट के छात्रों ने ABVP के कुछ लोगों की पिटाई की थी. इसके बाद शाम को बड़े स्तर पर कैंपस में हिंसा हुई, जिसके पीछे ABVP का हाथ बताया जा रहा है. इसमें कई छात्र और शिक्षक घायल हुए. हॉस्टलों में बड़े स्तर पर तोड़फोड़ भी हुई.JNU has taught me a lot about India, says Nobel Prize winner Abhijit Banerjee as he speaks #exclusively to Rahul Kanwal#ITVideo
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JNU हिंसा: प्रत्यक्षदर्शी, छात्रसंघ, ABVP और दिल्ली पुलिस क्या कह रही है?

