जानिए, 5 जनवरी की दोपहर और शाम JNU कैंपस में क्या हुआ?
दो-तीन दिनों से कैंपस में तनाव था. अगले सेमेस्टर के रजिस्ट्रेशन पर स्टूडेंट्स में झड़पों की भी ख़बरें आईं थीं.

'अगले सेमेस्टर के लिए हो रहे रजिस्ट्रेशन पर मार-पीट शुरू हुई' रिपोर्टस के मुताबिक, 4 जनवरी से ही कैंपस में तनाव था. ABVP और लेफ्ट संगठनों से जुड़े लोगों के बीच झड़पें हुई थीं. इसका मुद्दा था नए सेमेस्टर को लेकर होने वाला रजिस्ट्रेशन. 1 जनवरी से ही पंजीकरण शुरू हो चुका था. 5 जनवरी आख़िरी तारीख़ थी रजिस्ट्रेशन के लिए. आरोप है कि लेफ्ट पार्टियों के नियंत्रण वाले JNU छात्रसंघ ने बढ़ी हुई फीस के विरोध में रजिस्ट्रेशन बंद करवाने की कोशिश की. उधर ABVP के लोग रजिस्ट्रेशन खुलवाने के लिए कह रहे थे. इनका कहना था कि अगर रजिस्ट्रेशन ब्लॉक कर दिया गया, तो जो स्टूडेंट बढ़ी हुई फीस के बावजूद आगे पढ़ना चाहते हैं उनका एक सेमेस्टर ख़राब हो जाएगा. JNU प्रशासन ने भी 4 जनवरी को प्रदर्शनकारी छात्रों से आग्रह किया था. कहा था कि जो स्टूडेंट बढ़ी हुई फीस देना चाहते हैं, उन्हें रजिस्ट्रेशन करने से न रोका जाए. JNU प्रशासन का दावा है कि 3 जनवरी को कुछ नकाबपोश स्टूडेंट जबरन बिल्डिंग में घुस आए थे. उन्होंने स्टाफ को बाहर निकालकर पावर सप्लाई रोक दी. ताकि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया रुक जाए. 4 जनवरी को कुछ नकाबपोशों ने सेंट्रल इन्फॉर्मेशन सिस्टम में घुसकर सर्वर को नुकसान पहुंचाया. 5 जनवरी को दोपहर करीब एक बजे ABVP से जुड़े स्टूडेंट्स रजिस्ट्रेशन के लिए गए और उन पर हमला हुआ. उन्हें बचाने आए सिक्यॉरिटी गार्ड्स को भी पीटा गया. इसी मसले पर दोनों तरफ से छात्रों में तनाव था. JNU के टीचर्स असोसिएशन ने 5 जनवरी को कैंपस के अंदर एक 'पीस मार्च' बुलाया था. दी लल्लनटॉप की टीम जब जेएनयू पहुंची, तो एबीवीपी और लेफ्ट संगठन - दोनों ने माना कि छात्रों को रजिस्ट्रेशन करने से रोका जा रहा था. खुद को एबीवीपी से जुड़ा बताते लोगों ने दी लल्लनटॉप से कहा कि इस दौरान लेफ्ट संगठनों से जुड़े लोगों ने हिंसा की. मारपीट में चोट आने की बात भी कही गई. इस इल्ज़ाम पर जब दी लल्लनटॉप ने जेएनयू छात्रसंघ के महासचिव सतीश चंद्र यादव से सवाल किया तो उन्होंने माना कि छात्रों से रजिस्ट्रेशन न कराने की अपील की गई थी. लेकिन उन्होंने हिंसा या हिंसा में अपने लोगों के शामिल होने की बात से इनकार किया. खैर, जैसे ही पीस मार्च के लिए छात्र और प्रोफेसर जुटे, हिंसा शुरू हो गई. समय - शाम के तकरीबन साढ़े छह बजे. यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार के मुताबिक, हिंसा की रिपोर्ट मिलने के बाद JNU प्रशासन ने पुलिस को बुलाया.Female students have locked themselves up inside the girls' wing in Sabarmati Hostel. These attackers are roaming the corridors with rods and sticks. ABVP terrorists have broken the cars parked outside. We are under attack. #EmergencyinJNU #SOSJNU pic.twitter.com/rNcB15hVte
— JNUSU (@JNUSUofficial) January 5, 2020
दिल्ली पुलिस हिंसा की जांच करेगी चश्मदीदों का कहना है कि हमलावरों की तादाद 100 के करीब रही होगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें से ज़्यादातर JNU के बाहर के थे. इल्ज़ाम है कि ये लोग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े हुए हैं. दिल्ली पुलिस पर भी आरोप लग रहे हैं. कहा जा रहा है कि पुलिस न केवल इन हमलावरों को JNU कैंपस में घुसने से रोकने में नाकाम रही, बल्कि बहुत देर तक हिंसा को भी काबू में नहीं किया गया. लोगों का कहना है कि JNU के स्टूडेंट्स और शिक्षकों की ओर से पुलिस को कई फोन किए गए. मगर काफी देर तक पुलिस कोई भी असर नहीं दिखा पाई. कैंपस गेट के बाहर रिपोर्टिंग करने पहुंचे कई पत्रकारों के साथ भी मारपीट की गई. योगेंद्र यादव समेत कुछ नेता, जो स्थिति का जायजा लेने मौके पर पहुंचे थे, उनके साथ भी मारपीट की गई. पुलिस पर हिंसा रोकने की कोशिश न करने और कार्रवाई में ढिलाई बरतने के आरोप लग रहे हैं. गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस को इस मामले की जांच करने को कहा है. गृह मंत्रालय ने एक ट्वीट में लिखा कि अमित शाह ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से बात करके उन्हें ज़रूरी कार्रवाई करने को कहा है. जॉइंट CP स्तर के अधिकारी से जांच करवाने का भी निर्देश दिया गया है.A university stands for tolerance, dialogue and an agreement to disagree. Violence is anathema to the idea of a university and violates the foundations of a civilization. The incidents yesterday on the JNU campus are a very low point in our post independence history.
— Prof. Errol D'Souza (@proferroldsouza) January 6, 2020
हिंसा से जुड़े कई विडियो सोशल मीडिया पर इस वारदात से जुड़ी कई तस्वीरें, कई विडियो सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे हैं. एक विडियो में मुंह पर नकाब बांधे कुछ लोग एक हॉस्टल के कॉरिडोर में खड़े दिखते हैं. इनमें से एक के हाथ में हथौड़ा है. एक लड़की भी है साथ में, हाथ में डंडा लिए. एक विडियो में कुछ लड़कियां हमलावरों से पीछे हटने को कहती हैं. मगर वो हाथ में सरिया-डंडा लिए हमला करने के लिए उनकी तरफ दौड़ते हैं. एक विडियो JNU छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशे घोष का भी है. विडियो में वो काफी जख़्मी हालत में दिखती हैं. उनके माथे से खून निकल रहा है. विडियो में आइशे कहती हैं कि उनके ऊपर ABVP के लोगों ने हमला किया. घायलों में सबसे ज़्यादा संख्या स्टूडेंट्स की है. इनमें से कुछ को इलाज के लिए AIIMS और सफ़रजंग अस्पताल में भर्ती किया गया है.Union Home Minister has spoken to Delhi Police Commissioner over JNU violence and instructed him to take necessary action. Hon’ble minister has also ordered an enquiry to be carried out by a Joint CP level officer and asked for a report to be submitted as soon as possible.
— गृहमंत्री कार्यालय, HMO India (@HMOIndia) January 5, 2020
VC पर भी इल्ज़ाम लग रहे हैं JNU के वाइस चांसलर जगदीश कुमार ने इस वारदात पर अफ़सोस जताया है. अपने एक ट्वीट में उन्होंने रजिस्ट्रार द्वारा जारी एक प्रेस नोट नत्थी किया. इसमें फीस बढ़ाए जाने के विरुद्ध हो रहे प्रोटेस्ट का ज़िक्र था. साथ में अफ़सोस जताया गया था कि किस तरह छात्रों का एक समूह विरोध के अपने हिंसक तौर-तरीकों का इस्तेमाल कर हज़ारों ग़ैर-प्रदर्शनकारी छात्रों को अकादमिक कामकाज नहीं करने दे रहा है. हालांकि VC के बर्ताव पर काफी समय से उंगलियां उठ रही हैं. मीडिया से बात करते JNU के कुछ टीचर्स ने आरोप लगाया कि VC मौके पर नहीं मिलते. न ही संवाद करते हैं. ये इल्ज़ाम भी लगाया गया कि वो ABVP को शह देते हैं. JNU से पढ़े रक्षामंत्री और विदेशमंत्री ने क्या कहा? रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस जयशंकर, जो कि ख़ुद JNU से पढ़े हुए हैं, ने भी इस घटना की निंदा की है. जयशंकर ने एक ट्वीट में लिखा कि कैंपस में जो हुआ, वो यूनिवर्सिटी की परंपरा और संस्कृति के पूरी तरह विरुद्ध है. सीतारमण ने ट्विटर पर लिखा कि वो जिस JNU को जानती हैं, वहां जमकर बहस होती है. लोग अपने-अपने विचार रखते हैं, मगर हिंसा नहीं होती. सीतारमण ने लिखा-JNUSU President Aishi Ghosh right now. Brutally beaten up and profusely bleeding from the head. When will this stop? #SOSJNU #shame pic.twitter.com/c9a5YiR5N6
— Yogendra Yadav (@_YogendraYadav) January 5, 2020
ये सरकार, चाहे पिछले हफ़्तों में जो भी कहा गया हो उसके बावजूद, यूनिवर्सिटी को सभी छात्रों के लिए एक सुरक्षित जगह बनाना चाहती है.
Have seen pictures of what is happening in #JNU. Condemn the violence unequivocally. This is completely against the tradition and culture of the university.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) January 5, 2020
HRD मिनिस्ट्री ने क्या कहा? BJP का कहना है कि इस घटना के पीछे अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे तत्वों का हाथ है. पार्टी का दावा है कि स्टूडेंट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है. इस तरह अव्यवस्था पैदा करके अपने घट रहे राजनैतिक प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश की जा रही है. मानव संसाधन विकास मंत्रालय (HRD) ने भी इस घटना की निंदा की है. मंत्रालय ने एक ट्वीट में लिखा कि नकाबपोश लोगों का एक समूह कैंपस में घुसा. उन्होंने पत्थरबाजी की. यूनिवर्सिटी की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया. स्टूडेंट्स पर हमला किया. मंत्रालय ने लिखा कि इस तरह की हिंसा और अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. HRD मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने भी इस वारदात को दुर्भाग्यपूर्ण बताया.Horrifying images from JNU — the place I know & remember was one for fierce debates & opinions but never violence. I unequivocally condemn the events of today. This govt, regardless of what has been said the past few weeks, wants universities to be safe spaces for all students.
— Nirmala Sitharaman (@nsitharaman) January 5, 2020
कैंपस के बाहर और भीतर अंधेरा क्यों था? 'इंडिया टुडे' ने मौके पर मौजूद कुछ चश्मदीदों से बात की. उनमें से एक ने बताया कि यूनिवर्सिटी कैंपस में हिंसा की ख़बरों के बावजूद पुलिस नज़र नहीं आ रही थी. चश्मदीद का कहना है-It has come to Ministry's notice that a group of masked people entered the JNU campus today, threw stones, damaged property and attacked students. This is very unfortunate and highly condemnable, such acts of violence and anarchy will not be tolerated.
— Ministry of HRD (@HRDMinistry) January 5, 2020
IIT फ्लाइओवर से लेकर JNU तक का पूरा रास्ता अंधेरे में डूबा है. एक ट्रैफिक लाइट तक में रोशनी नहीं है. JNU कैंपस की ओर आने वाला रास्ता पूरी तरह अंधेरा है. हॉस्टलों को JNU प्राशासनिक ब्लॉक से जोड़ने वाला रास्ता भी अंधेरा है. लोग दौड़ाए जा रहे हैं. मेरी जांघ पर भी डंडा मारा गया. कोई नहीं जानता कि हमें दौड़ा कौन रहा है और क्यों ये सब हो रहा है.विपक्ष के कई नेताओं ने इस घटना की निंदा की है. कांग्रेस लीडर प्रियंका गांधी घायलों से मिलने AIIMS गईं. क्रांगेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने अपने ट्वीट में लिखा कि JNU कैंपस पर हुआ ये हमला पूर्व नियोजित था. उनका आरोप है कि इस हमले को JNU प्रशासन की तरफ से मदद दी गई. उन्होंने हमलावरों के BJP से जुड़े होने का आरोप भी लगाया. पूरी रात JNU मुख्य गेट के बाहर माहौल गर्म रहा. लेफ्ट और ABVP, दोनों तरफ के लोग वहां डटकर नारेबाज़ी करते रहे.
JNU प्रशासन ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी, छात्रों को परीक्षा देने से रोक रहे हैं

