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जेएनयू हिंसा: दिल्ली पुलिस ने एफआईआर में कहा, दोपहर से कैंपस में थी पुलिस मौजूद

जेएनयू में हुए मारपीट और तोड़-फोड़ के मामले में पहली एफआईआर दर्ज

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6 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 6 जनवरी 2020, 02:58 AM IST)
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Jnu Attack Delhi Police
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जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) कैम्पस में 5 जनवरी की शाम को जमकर बवाल हुआ. कुछ नकाबपोश गुंडों ने स्टूडेंट्स और टीचर्स को पीटा. जमकर तोड़-फोड़ मचाई. इस वारदात में करीब 34 स्टूडेंट घायल हुए. इनमें JNUSU की प्रेसिडेंट आइशी घोष भी शामिल हैं. उनके सिर पर गहरी चोट आई है. एम्स में भर्ती कराया गया, जहांं उन्हें पांच टांके लगे. आइशी अब अस्पताल से डिस्चार्ज हो गई हैं. वो उन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करवाएंगी, जिनका इस पूरे मामले में हाथ है. हालांकि इस मामले में दिल्ली पुलिस ने एक एफआईआर दर्ज की है. Jnu Fir (1) क्या है इस एफआईआर में वसंत कुंज थाने में दर्ज इस एफआईआर के मुताबिक,
जेएनयू के छात्र पिछले कुछ दिनों से हॉस्टल फीस वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. हाईकोर्ट के निर्देश के मुताबिक, एडमिन ब्लॉक के 100 मीटर के दायरे में किसी भी विरोध प्रदर्शन की अनुमति नहीं है. एक इंस्पेक्टर की अगुवाई में एक पुलिस टीम 5 जनवरी को दोपहर 3.45 बजे एडमिन ब्लॉक में तैनात की गई. कुछ छात्रों के बारे में सूचना मिली कि पेरियार हॉस्टल में इकट्ठा हुए हैं और उनके बीच लड़ाई हुई है, वे संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं. इसी दौरान जेएनयू प्रशासन की तरफ से एक रिक्वेस्ट लेटर मिला था, जिसमें हालात पर काबू पाने के लिए कहा गया था. इसलिए और फोर्स बुलाई गई.
Jnu Fir
इंस्पेक्टर अन्य पुलिसकर्मियों के साथ पेरियार हॉस्टल पहुंचे, जहां उन्होंने लगभग 40- 50 अनजान लोगों को नकाब पहने और लाठियों से लैस पाया. भीड़ हॉस्टल में छात्रों को पीट रही थी और संपत्ति को नुकसान पहुंचा रही थी. लेकिन पुलिस को देखकर वे सभी भाग गए. लेकिन शाम करीब 7 बजे साबरमती हॉस्टल में भड़के छात्रों की पिटाई के पीसीआर कॉल आने लगे. पीए सिस्टम की मदद से वैंडल्स को चेतावनी जारी की गई थी. लेकिन इसके बावजूद उपद्रवी संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे थे और छात्रों की पिटाई कर रहे थे. थोड़ी देर बाद वे सब भाग गए. जो छात्र घायल हुए थे, उन्हें एम्स ले जाया गया. उपद्रवियों के खिलाफ सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी धाराओं (आईपीसी की धारा 145, 147, 148 149, 151 और धारा 3) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है.
https://youtu.be/-6CGl2v174s पुलिस ने बनाई जांच टीम उधर गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस से रिपोर्ट मांगी है. दिल्ली पुलिस ने ज्वाइंट सीपी शालिनी सिंह की अगुवाई में दो ACP और चार इंस्पेक्टर की जांच टीम गठित कर दी है. हिंसा के बाद से छात्र सहमे हुए हैं. कैंपस में तनाव का माहौल है. गेट के बाहर भारी संख्या में पुलिस को तैनात किया गया है. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने जेएनयू में हिंसा की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा,
जो कुछ भी हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है. आज एचआरडी सचिव ने जेएनयू के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की है. हम शैक्षिक संस्थान को राजनीति का अड्डा नहीं बनने देंगे. दोषियों को दंडित किया जाएगा.
वैसे देश के कई हिस्सों से जेएनयू में हिंसा के खिलाफ आवाज उठ रही है. कई जगह छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं.
वीडियो:  JNU हिंसा: गेट पर दिल्ली पुलिस के सामने योगेंद्र यादव को पीटे जाने की पूरी कहानी

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