JNU हिंसा केस में दिल्ली पुलिस की बड़ी गड़बड़ी सामने आई है
RTI से सामने आई ये बात.
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तस्वीर पांच जनवरी की है. जगह- JNU कैंपस, जो तोड़-फोड़ और हिंसा के बाद ऐसा दिख रहा था. (फोटो- ANI)
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खबर एक FIR, एक RTI और एक तारीख से जुड़ी है. जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) और दिल्ली पुलिस से जुड़ी है. बीते दिनों कैम्पस में हिंसा और तोड़-फोड़ हुई थी. अब इस मामले की जो FIR फाइल हुई है उसे लेकर एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है. दिल्ली पुलिस पर बैकडेट में FIR फाइल करने का आरोप है. ये बात एक RTI से पता चली है.
पुलिस की FIR में क्या है? JNU हिंसा मामले में पुलिस ने दो FIR फाइल की थीं. पहली FIR 1 जनवरी को और दूसरी 4 जनवरी को. दोनों में यूनिवर्सिटी कैंपस में तोड़-फोड़ और इसकी वजह से सर्वर डाउन होने का ज़िक्र है. यही वो FIR हैं, जिनमें JNUSU प्रेसिडेंट आइशी घोष का नाम भी शामिल है.
RTI के जवाब में क्या है? ये तो थी एक बात. अब सामने आया है एक RTI का जवाब, जो JNU प्रशासन ने दिया है. RTI में पूछा गया था कि 25 दिसंबर, 2019 से 8 जनवरी, 2020 के बीच यूनिवर्सिटी कैंपस में तोड़-फोड़ की वजह से कितनी बार सर्वर डाउन की कंडीशन बनी. यूनिवर्सिटी की तरफ से जवाब दिया गया- दो बार ऐसी कंडीशन बनी. पहली- 3 जनवरी को और दूसरी- 4 जनवरी को.
दिल्ली पुलिस की FIR में JNUSU प्रेसिडेंट आईशी घोष का नाम भी शामिल है. फोटो- PTI
अब ध्यान दीजिए. पुलिस ने किन दो दिन की FIR फाइल की? 1 जनवरी और 4 जनवरी. यूनिवर्सिटी ने किन दो तारीखों का ज़िक्र किया- 3 जनवरी और 4 जनवरी. बस यहीं बात फंस रही है कि जब पहली घटना 3 जनवरी की है, तो पुलिस ने बैकडेट में 1 जनवरी को FIR कैसे फाइल कर ली? ये RTI नेशनल कैंपेन फॉर पीपुल्स राइट टू इंफॉर्मेशन (NCPRI) के सदस्य मेंबर सौरव दास ने लगाई थी.
RTI के जवाब से ये बातें भी पता चलीं... # बायोमेट्रिक सिस्टम और CCTV कैमरे को न तो 3 जनवरी, न ही 4 जनवरी को कोई नुकसान पहुंचा था. # RTI के जवाब में JNU ने CCTV कैमरों की लोकेशन देने से मना कर दिया. कहा कि ये जानकारी देना सुरक्षा कारणों से ठीक नहीं होगा. # यूनिवर्सिटी ने ये जरूर बता दिया है कि कैंपस के नॉर्थ गेट पर कोई कैमरा नहीं लगा है.
स्मृति ईरानी ने दीपिका पादुकोण के JNU जाने को लेकर जो कहा उसका छुपा मतलब ये रहा
पुलिस की FIR में क्या है? JNU हिंसा मामले में पुलिस ने दो FIR फाइल की थीं. पहली FIR 1 जनवरी को और दूसरी 4 जनवरी को. दोनों में यूनिवर्सिटी कैंपस में तोड़-फोड़ और इसकी वजह से सर्वर डाउन होने का ज़िक्र है. यही वो FIR हैं, जिनमें JNUSU प्रेसिडेंट आइशी घोष का नाम भी शामिल है.
RTI के जवाब में क्या है? ये तो थी एक बात. अब सामने आया है एक RTI का जवाब, जो JNU प्रशासन ने दिया है. RTI में पूछा गया था कि 25 दिसंबर, 2019 से 8 जनवरी, 2020 के बीच यूनिवर्सिटी कैंपस में तोड़-फोड़ की वजह से कितनी बार सर्वर डाउन की कंडीशन बनी. यूनिवर्सिटी की तरफ से जवाब दिया गया- दो बार ऐसी कंडीशन बनी. पहली- 3 जनवरी को और दूसरी- 4 जनवरी को.
दिल्ली पुलिस की FIR में JNUSU प्रेसिडेंट आईशी घोष का नाम भी शामिल है. फोटो- PTIअब ध्यान दीजिए. पुलिस ने किन दो दिन की FIR फाइल की? 1 जनवरी और 4 जनवरी. यूनिवर्सिटी ने किन दो तारीखों का ज़िक्र किया- 3 जनवरी और 4 जनवरी. बस यहीं बात फंस रही है कि जब पहली घटना 3 जनवरी की है, तो पुलिस ने बैकडेट में 1 जनवरी को FIR कैसे फाइल कर ली? ये RTI नेशनल कैंपेन फॉर पीपुल्स राइट टू इंफॉर्मेशन (NCPRI) के सदस्य मेंबर सौरव दास ने लगाई थी.
RTI के जवाब से ये बातें भी पता चलीं... # बायोमेट्रिक सिस्टम और CCTV कैमरे को न तो 3 जनवरी, न ही 4 जनवरी को कोई नुकसान पहुंचा था. # RTI के जवाब में JNU ने CCTV कैमरों की लोकेशन देने से मना कर दिया. कहा कि ये जानकारी देना सुरक्षा कारणों से ठीक नहीं होगा. # यूनिवर्सिटी ने ये जरूर बता दिया है कि कैंपस के नॉर्थ गेट पर कोई कैमरा नहीं लगा है.
स्मृति ईरानी ने दीपिका पादुकोण के JNU जाने को लेकर जो कहा उसका छुपा मतलब ये रहा

